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ओमकारा की शूटिंग का अनसुना किस्सा सैफ अली खान ने बताया क्यों ठुकराया विशाल भारद्वाज का बोल्ड सीन

नई दिल्ली । विशाल भारद्वाज की फिल्म ओमकारा को हिंदी सिनेमा की बेहतरीन फिल्मों में गिना जाता है। इस फिल्म में सैफ अली खान ने लंगड़ा त्यागी का किरदार निभाकर दर्शकों और समीक्षकों दोनों का दिल जीत लिया था। फिल्म को रिलीज हुए अब 20 साल पूरे हो चुके हैं और इसी मौके पर सैफ ने शूटिंग के दौरान का एक ऐसा किस्सा साझा किया है जिसने सभी का ध्यान खींच लिया। सैफ अली खान ने एक इंटरव्यू में बताया कि फिल्म के एक महत्वपूर्ण दृश्य को लेकर निर्देशक विशाल भारद्वाज की सोच बेहद अलग थी। उस सीन में एक लंबा संवाद था जिसे आईने के सामने फिल्माया जाना था। विशाल चाहते थे कि यह पूरा दृश्य बिना कपड़ों के शूट किया जाए ताकि किरदार की मानसिक स्थिति और असुरक्षा को अधिक प्रभावी ढंग से दिखाया जा सके। सैफ ने बताया कि निर्देशक का यह सुझाव उन्हें दिलचस्प तो लगा लेकिन सेट पर मौजूद बड़ी संख्या में लोगों की वजह से वह सहज महसूस नहीं कर पा रहे थे। ऐसे में उन्होंने विशाल भारद्वाज के सामने एक मजेदार शर्त रख दी। सैफ ने कहा कि अगर निर्देशक भी उसी तरह बिना कपड़ों के उन्हें डायरेक्ट करेंगे तो वह यह सीन करने के लिए तैयार हैं। इस पर विशाल भारद्वाज ने मुस्कुराते हुए मना कर दिया और बात वहीं खत्म हो गई। हालांकि अब जब सैफ उस पल को याद करते हैं तो उन्हें लगता है कि शायद उन्हें वह दृश्य कर लेना चाहिए था। उनके मुताबिक उस सीन को पीछे की ओर से फिल्माया जा सकता था और इससे किरदार की गंभीरता और प्रभाव दोनों बढ़ जाते। उन्होंने कहा कि आज के समय में फिल्मों में नए तरह के प्रयोग हो रहे हैं और अगर आज ऐसा प्रस्ताव मिलता तो शायद वह इसे स्वीकार कर लेते। सैफ ने यह भी बताया कि शूटिंग शुरू होने से ठीक पहले विशाल भारद्वाज ने उस पूरे दृश्य में बड़ा बदलाव कर दिया। पहले जहां लंबा संवाद रखा गया था वहीं बाद में निर्देशक ने तय किया कि इस दृश्य में कोई संवाद नहीं होगा। इसके बजाय सैफ को आईने के सामने खड़े होकर एक भारी धातु की वस्तु से शीशा तोड़ना था। इस दौरान उनके हाथ से खून बहता दिखाया जाना था ताकि किरदार के भीतर का गुस्सा और टूटन बिना शब्दों के दर्शकों तक पहुंच सके। सैफ के अनुसार विशाल भारद्वाज की यही खासियत है कि वह अंतिम समय तक अपने दृश्यों पर काम करते रहते हैं और यदि उन्हें कोई बेहतर विचार आता है तो वह पूरी पटकथा में बदलाव करने से भी नहीं हिचकते। यही कारण है कि ओमकारा आज भी अपने दमदार निर्देशन बेहतरीन अभिनय और प्रभावशाली दृश्यों के लिए याद की जाती है। ओमकारा ने न केवल सैफ अली खान के अभिनय करियर को नई पहचान दी बल्कि यह भी साबित किया कि चुनौतीपूर्ण किरदार निभाने से कलाकार की प्रतिभा और निखरकर सामने आती है। फिल्म के 20 साल बाद सामने आया यह किस्सा दर्शाता है कि पर्दे पर दिखने वाले हर यादगार दृश्य के पीछे कई रोचक कहानियां छिपी होती हैं।

Morena news: ग्रामीण बोले-पैसे चाहिए तो हमसे लो, लेकिन शहर को जलभराव और गंदगी से मुक्त करो

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Morena news: मुरैना। अंबाह में हुई एक दिन की जोरदार बारिश ने ही शहर की प्रशासनिक व्यवस्थाओं कच्चा चिट्ठा खोलकर रख दिया है। कई इलाकों में जलभराव और कीचड़ से परेशान लोगों का गुस्सा आखिरकार सड़कों पर फूट पड़ा। नाराज नागरिक पानी से भरी सड़क पर ही बैठ गए और अनोखे अंदाज में धरना देकर नगर पालिका प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने ‘नगर पालिका मुर्दाबाद’ के नारे लगाए और आरोप लगाया कि हर साल बरसात में शहर की यही हालत हो जाती है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जाता। CMO को ‘रिश्वत’ देने पहुंच गए लोग धरने के बाद बड़ी संख्या में लोग रैली निकालते हुए नगर पालिका कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने नगर पालिका CMO सरिव कौशल के नाम एक अनोखा ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने अपनी-अपनी जेब से पैसे इकट्ठा कर प्रतीकात्मक रूप से विकास कार्यों के लिए ‘रिश्वत’ देने की पेशकश की। लोगों का कहना था कि ‘अगर शहर का विकास कराने के लिए रिश्वत ही चाहिए, तो हम पैसे देने को भी तैयार हैं। बस जलभराव, टूटी सड़कें और गंदगी से शहर को निजात दिला दीजिए। संसदीय समिति की चौंकाने वाली रिपोर्ट जेलों के भीतर मोबाइल और प्रतिबंधित सामान का खेल नहीं थम रहा सड़कें बनीं तालाब, लोगों का निकलना हुआ मुश्किल स्थानीय लोगों का आरोप है कि अंबाह के कई मोहल्लों में पहली बारिश के बाद ही सड़कें तालाब जैसी नजर आने लगी हैं। जगह-जगह पानी भरने और कीचड़ होने से लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को हो रही है। लोगों का कहना है कि नालियों की समय पर सफाई नहीं होने और जल निकासी की उचित व्यवस्था के अभाव में हर बारिश के साथ हालात और बिगड़ जाते हैं। बंगाल की मासूम से दरिंदगी का आरोपी प्रभास मंडल एनकाउंटर में मारा गया अब CID करेगी पूरे घटनाक्रम की जांच चेतावनी भी दी प्रदर्शनकारियों ने नगर पालिका प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही जल निकासी, सड़क मरम्मत और सफाई व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो आंदोलन और बड़ा किया जाएगा। उन्होंने साफ कहा कि इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। फिलहाल अंबाह में हुए इस अनोखे विरोध प्रदर्शन की पूरे इलाके में चर्चा है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि नगर पालिका प्रशासन उनकी शिकायतों पर कितनी जल्दी और कितनी गंभीरता से कार्रवाई करता है।

टॉक्सिक के तबाही गाने का धमाका 24 घंटे में करोड़ों दर्शक बोल्ड रोमांस और रिकॉर्ड व्यूज ने बढ़ाई फिल्म की चर्चा

नई दिल्ली । साउथ सुपरस्टार यश और अभिनेत्री कियारा आडवाणी की बहुप्रतीक्षित फिल्म टॉक्सिक रिलीज से पहले ही जबरदस्त चर्चा में है। फिल्म का नया गाना तबाही सामने आते ही सोशल मीडिया और यूट्यूब पर छा गया है। रिलीज के महज 24 घंटे के भीतर इस गाने ने 16 मिलियन से अधिक व्यूज हासिल कर लिए और यूट्यूब ट्रेंडिंग में पहला स्थान भी अपने नाम कर लिया। अलग अलग भाषाओं में रिलीज हुए इस गाने को भी दर्शकों का शानदार समर्थन मिल रहा है जिससे फिल्म को लेकर उत्सुकता और बढ़ गई है। गाने में यश और कियारा आडवाणी की रोमांटिक केमिस्ट्री ने दर्शकों का ध्यान सबसे ज्यादा खींचा है। दोनों के बीच फिल्माए गए कई बोल्ड और इंटेंस रोमांटिक दृश्य सोशल मीडिया पर चर्चा का बड़ा विषय बन गए हैं। कुछ दर्शकों ने इसे डार्क रोमांस का बेहतरीन उदाहरण बताया तो कुछ ने सेंसर बोर्ड को लेकर सवाल उठाते हुए मजेदार प्रतिक्रियाएं दीं। कई यूजर्स ने कमेंट करते हुए लिखा कि ऐसा कंटेंट लंबे समय बाद देखने को मिला है जबकि कुछ लोगों ने पुराने दौर की रोमांटिक फिल्मों और कलाकारों की याद भी ताजा कर दी। गाने की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कमेंट सेक्शन में हजारों प्रतिक्रियाएं लगातार आ रही हैं। किसी ने यश की स्क्रीन प्रेजेंस की तारीफ की तो किसी ने कियारा आडवाणी के ग्लैमरस अवतार को फिल्म का सबसे बड़ा आकर्षण बताया। कई दर्शकों ने दोनों कलाकारों की जोड़ी को बेहद प्रभावशाली बताया और फिल्म रिलीज होने का इंतजार जताया। वहीं कुछ लोगों ने यह भी अनुमान लगाया कि गाने में दिखाए गए दृश्य फिल्म की कहानी से गहराई से जुड़े हो सकते हैं और यह केवल रोमांस नहीं बल्कि भावनात्मक मोड़ का हिस्सा भी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो रहे फनी मीम्स और कमेंट्स ने भी इस गाने की लोकप्रियता को नई ऊंचाई दी है। कुछ यूजर्स ने मजाकिया अंदाज में कियारा के पति सिद्धार्थ मल्होत्रा का जिक्र किया तो कई लोगों ने यश की तुलना बॉलीवुड के पुराने रोमांटिक सितारों से कर दी। इन प्रतिक्रियाओं ने गाने को केवल संगीत प्रेमियों तक सीमित नहीं रखा बल्कि आम सोशल मीडिया यूजर्स के बीच भी चर्चा का विषय बना दिया। फिल्म टॉक्सिक का टीजर पहले ही यह संकेत दे चुका था कि इसकी कहानी पारंपरिक मसाला फिल्मों से अलग होगी। अब तबाही गाने ने यह साफ कर दिया है कि फिल्म में रोमांस के साथ इमोशन और डार्क टोन का भी खास मिश्रण देखने को मिलेगा। यही वजह है कि दर्शकों के बीच फिल्म को लेकर उत्सुकता लगातार बढ़ती जा रही है। फिल्म का निर्देशन गीतू मोहनदास ने किया है। इसमें यश और कियारा आडवाणी के अलावा नयनतारा और तारा सुतारिया भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगी। फिल्म की रिलीज डेट पहले कई बार बदली जा चुकी है लेकिन अब इसके अगस्त में सिनेमाघरों में आने की उम्मीद जताई जा रही है। तब तक तबाही गाना दर्शकों के बीच अपनी लोकप्रियता का सिलसिला लगातार जारी रखे हुए है और यह साफ संकेत दे रहा है कि टॉक्सिक साल की सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल हो सकती है।

संसदीय समिति की चौंकाने वाली रिपोर्ट जेलों के भीतर मोबाइल और प्रतिबंधित सामान का खेल नहीं थम रहा

नई दिल्ली । देश की जेलों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। केंद्रीय गृह मामलों की संसदीय स्थायी समिति की ताजा रिपोर्ट में सामने आया है कि मोबाइल फोन समेत कई प्रतिबंधित सामान बड़ी आसानी से जेलों के भीतर पहुंच रहे हैं। सबसे चिंता की बात यह है कि आधुनिक सुरक्षा उपकरण जैमर और सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने के बावजूद यह सिलसिला थम नहीं रहा है। रिपोर्ट के अनुसार इस पूरे नेटवर्क में जेल स्टाफ के साथ अस्पताल से जुड़े कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत भी सामने आई है जिससे जेल सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जेलों में लंबे समय तक एक ही स्थान पर तैनात रहने वाले कर्मचारियों और कैदियों के बीच नजदीकियां बढ़ जाती हैं। यही कारण है कि कई मामलों में सांठगांठ विकसित हो जाती है और प्रतिबंधित सामान अंदर पहुंचाने का रास्ता आसान बन जाता है। समिति ने सुझाव दिया है कि जेल कर्मचारियों का नियमित अंतराल पर तबादला किया जाए ताकि इस तरह की मिलीभगत की संभावना कम हो सके। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि देश की अधिकांश जेलों में आधुनिक सुरक्षा संसाधनों की कमी है। कई स्थानों पर लगे जैमर प्रभावी ढंग से काम नहीं कर रहे हैं जबकि सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं है। इसलिए गृह मंत्रालय से सिफारिश की गई है कि राज्यों को पर्याप्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए ताकि डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर हैंड हेल्ड स्कैनर बैगेज स्कैनर बॉडी वॉर्न कैमरे आधुनिक सीसीटीवी सिस्टम और अन्य सुरक्षा उपकरण खरीदे जा सकें। साथ ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कैदियों की पेशी को बढ़ावा देने की भी सलाह दी गई है जिससे जेल से बाहर ले जाने की जरूरत कम हो सके। हाल के वर्षों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिन्होंने जेल सुरक्षा पर गंभीर चिंता बढ़ा दी है। गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के जेल के भीतर से मोबाइल फोन और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए आपराधिक नेटवर्क संचालित करने के आरोपों ने पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया। राष्ट्रीय जांच एजेंसी भी पहले कई बार यह संकेत दे चुकी है कि कुछ संगठित अपराधी जेल के भीतर से ही उगाही ड्रग तस्करी हवाला और टारगेट किलिंग जैसी गतिविधियों का संचालन करते रहे हैं। पूर्व वरिष्ठ जेल अधिकारियों का भी मानना है कि जेल मैनुअल में समय के अनुसार बदलाव की जरूरत है। उनका कहना है कि केवल निचले स्तर के कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं होगा क्योंकि कई मामलों में प्रभावशाली लोगों का संरक्षण भी ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा देता है। जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी और भ्रष्टाचार पर कठोर कार्रवाई नहीं होगी तब तक सुधार की प्रक्रिया अधूरी रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि जेल केवल अपराधियों को बंद रखने का स्थान नहीं बल्कि सुधार गृह भी हैं। यदि जेलों के भीतर ही आपराधिक गतिविधियां संचालित होती रहेंगी तो कानून व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों के लिए खतरा बढ़ेगा। ऐसे में संसदीय समिति की सिफारिशों को गंभीरता से लागू करना समय की सबसे बड़ी जरूरत बन गई है ताकि जेलों की सुरक्षा मजबूत हो सके और अपराधियों के नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

देशविरोधी कंटेंट पर सरकार का शिकंजा स्कूलों और कोचिंग सेंटरों की किताबों की होगी स्क्रीनिंग

नई दिल्ली । जम्मू कश्मीर सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा और अहम फैसला लिया है। सरकार ने केंद्र शासित प्रदेश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों के साथ साथ कोचिंग संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे अपनी लाइब्रेरी कक्षाओं और अन्य शैक्षणिक स्थानों पर रखी सभी किताबों की गहन जांच करें। इस जांच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्रों तक ऐसी कोई पुस्तक या अध्ययन सामग्री न पहुंचे जिसमें देशविरोधी विचार अलगाववाद हिंसा या किसी प्रकार की आपत्तिजनक सामग्री शामिल हो। सरकार का मानना है कि शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों में सकारात्मक सोच वैज्ञानिक दृष्टिकोण और राष्ट्रीय मूल्यों का विकास करना है इसलिए किसी भी प्रकार की भ्रामक सामग्री को शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा नहीं बनने दिया जाएगा। स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार सभी स्कूलों और कोचिंग संस्थानों के प्रमुखों को सात दिनों के भीतर अपनी लाइब्रेरी और कक्षाओं में मौजूद पुस्तकों की जांच पूरी करनी होगी। इसके बाद उन्हें प्रमाणित करना होगा कि उनके संस्थान में ऐसी कोई पुस्तक मौजूद नहीं है जो राष्ट्रीय हितों के खिलाफ हो या छात्रों के मानसिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डालती हो। यदि जांच के दौरान कोई संदिग्ध या आपत्तिजनक पुस्तक मिलती है तो उसकी पूरी जानकारी संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध करानी होगी ताकि आगे आवश्यक कार्रवाई की जा सके। यह कदम हाल ही में सामने आए उस विवाद के बाद उठाया गया है जिसमें कुछ पुस्तकों में जम्मू कश्मीर को भारत के कब्जे वाला क्षेत्र बताया गया था और कुछ अलगाववादी व्यक्तियों का सकारात्मक चित्रण किया गया था। इन पुस्तकों के सामने आने के बाद प्रशासन ने इसे गंभीर मामला मानते हुए तत्काल जांच शुरू कर दी। इसके बाद उपराज्यपाल ने संबंधित शिक्षा अधिकारियों पर कार्रवाई करते हुए कई अधिकारियों को निलंबित कर दिया और पूरे प्रदेश में शैक्षणिक सामग्री का ऑडिट कराने के निर्देश दिए। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी शिक्षण संस्थानों में उपयोग होने वाली सामग्री नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप होनी चाहिए। ऐसी किसी भी पुस्तक को स्वीकार नहीं किया जाएगा जो धार्मिक भावनाओं को आहत करे समाज में विभाजन पैदा करे या छात्रों को भटकाने का प्रयास करे। शिक्षा विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों और संस्थानों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे मामले पर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे इतिहास और वैचारिक स्वतंत्रता से जोड़कर देखा है। कुछ नेताओं का कहना है कि किताबों की स्क्रीनिंग के नाम पर इतिहास को बदला नहीं जाना चाहिए जबकि सरकार का तर्क है कि छात्रों को तथ्य आधारित और संतुलित शिक्षा देना उसकी जिम्मेदारी है तथा किसी भी प्रकार की भ्रामक या राष्ट्रविरोधी सामग्री को शिक्षा का हिस्सा नहीं बनने दिया जा सकता। इस बीच बाल अधिकारों से जुड़े संगठनों ने भी इस विषय को गंभीर बताया है। उनका कहना है कि बच्चों को ऐसी सामग्री उपलब्ध कराना जो हिंसा अलगाववाद या भ्रामक विचारों को बढ़ावा देती हो उनके मानसिक विकास और भविष्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए शैक्षणिक संस्थानों में पाठ्य सामग्री की समय समय पर समीक्षा आवश्यक है। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा किसी भी समाज की सबसे मजबूत नींव होती है। ऐसे में स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ाई जाने वाली पुस्तकों का तथ्यपरक संतुलित और संविधान की भावना के अनुरूप होना बेहद जरूरी है। यदि किसी सामग्री पर विवाद की आशंका हो तो उसकी निष्पक्ष समीक्षा कर उचित निर्णय लेना शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।

बंगाल की मासूम से दरिंदगी का आरोपी प्रभास मंडल एनकाउंटर में मारा गया अब CID करेगी पूरे घटनाक्रम की जांच

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल के बारुईपुर में 11 वर्षीय बच्ची के साथ हुई हैवानियत ने पूरे देश को झकझोर दिया। चार दिन तक चली पुलिस जांच के बाद इस सनसनीखेज मामले का मुख्य आरोपी प्रभास मंडल पुलिस एनकाउंटर में मारा गया। जिस इलाके में मासूम की दर्दनाक मौत हुई थी उसी क्षेत्र के पास आरोपी की मौत होने से यह मामला और भी चर्चा में आ गया है। अब इस पूरे एनकाउंटर की जांच अपराध जांच विभाग यानी CID को सौंपी जा रही है जबकि न्यायिक जांच भी समानांतर रूप से जारी रहेगी। घटना की शुरुआत 4 जुलाई को हुई जब बारुईपुर के सूर्यपुर हाट क्षेत्र के एक तालाब से बोरे में बंद 11 वर्षीय बच्ची का शव बरामद हुआ। बच्ची अपनी सहेली के लिए उपहार खरीदने घर से निकली थी लेकिन वापस नहीं लौटी। जांच के दौरान सामने आया कि उसके साथ पहले दरिंदगी की गई और फिर उसे गंभीर रूप से घायल अवस्था में बोरे में भरकर तालाब में फेंक दिया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह भी संकेत मिले कि बच्ची तालाब में फेंके जाने के समय जीवित थी और उसके फेफड़ों तथा पेट में पानी मिला जिससे डूबने की पुष्टि हुई। शरीर पर कई चोटों के साथ निजी अंगों पर गंभीर जख्म और काटने के निशान भी पाए गए। जांच के दौरान पुलिस ने इलाके के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज में प्रभास मंडल आखिरी बार बच्ची के साथ दिखाई दिया। इसके बाद पुलिस ने उसके घर पर दबिश दी। शुरुआत में परिवार ने आरोपी के घर पर न होने का दावा किया लेकिन पुलिस ने घर के अंदर तलाशी ली तो वह एक कोने में छिपा मिला। पूछताछ के दौरान उसने पहले पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की और अन्य लोगों पर आरोप लगाया लेकिन बाद में कथित रूप से उसने अपराध में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली। घटना के चार दिन बाद देर रात पुलिस आरोपी को घटनास्थल पर लेकर पहुंची जहां पूरे घटनाक्रम का पुनर्निर्माण कराया जा रहा था। पुलिस के अनुसार इसी दौरान प्रभास मंडल ने एक पुलिस अधिकारी की पिस्तौल छीनकर भागने की कोशिश की और पुलिस पर फायरिंग भी की। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने गोली चलाई जो उसके सीने और शरीर के अन्य हिस्सों में लगी। घायल आरोपी को अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। एनकाउंटर के बाद अब पूरे मामले की जांच CID को सौंपने की तैयारी की गई है क्योंकि मुठभेड़ में स्थानीय पुलिस के अधिकारी शामिल थे। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाती है। इसके साथ ही न्यायिक जांच भी जारी रहेगी ताकि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष समीक्षा की जा सके। यह मामला एक बार फिर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। साथ ही यह भी स्पष्ट करता है कि ऐसे जघन्य अपराधों की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कितनी आवश्यक है ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और समाज में कानून के प्रति विश्वास बना रहे।

दुनिया में रहने लायक सबसे अच्छे शहरों की सूची में दिल्ली 120वें स्थान पर, मुम्बई उससे भी पीछे

नई दिल्ली। दुनिया भर में रहने के लिहाज से सबसे अच्छे शहरों (Best Cities) की ताजा लिस्ट आ गई है। इस हफ्ते ‘द इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट’ ने अपनी नई ‘ग्लोबल लिवेबिलिटी इंडेक्स 2026’ (Global Liveability Index 2026) रिपोर्ट जारी की है। इस सूचकांक में कुल 173 शहरों को वहां मौजूद सुविधाओं और रहने की स्थितियों के अलग-अलग पैमानों पर परखा गया है। अगर भारतीय शहरों की बात करें तो नई दिल्ली (New Delhi) को 120वां स्थान मिला है। वहीं, डेनमार्क का शहर कोपेनहेगन (Copenhagen) दुनिया के सबसे बेहतरीन और रहने लायक शहरों की लिस्ट में नंबर वन पर बरकरार है। कोपेनहेगन ने ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना को पीछे छोड़ते हुए अपना पहला स्थान बरकरार रखा है। द इकोनॉमिस्ट मैगजीन की सहयोगी संस्था ईआईयू ने दुनिया भर के 173 शहरों को शिक्षा, स्थिरता, हेल्थकेयर, इंफ्रास्ट्रक्चर और संस्कृति जैसे पैमानों पर परखा है। भारतीय शहरों की रैंकिंगरिपोर्ट के मुताबिक, भारत के प्रमुख शहरों की रैंकिंग कुछ इस प्रकार है:– नई दिल्ली: 120वें पायदान पर– मुंबई: 121वें पायदान पर– चेन्नई: 123वें पायदान पर– बेंगलुरु: 127वें पायदान पर गौर करने वाली बात यह है कि देश की राजधानी नई दिल्ली और आर्थिक राजधानी मुंबई की रैंकिंग में पिछले साल के मुकाबले कोई बदलाव नहीं आया है। ये दोनों शहर अपनी पुरानी स्थिति पर ही बने हुए हैं। दुनिया के 10 सबसे बेहतरीन शहररहने के लिहाज से डेनमार्क के कोपेनहेगन ने ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना और ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न को पछाड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया है: कोपेनहेगन क्यों है नंबर वन?रिपोर्ट के मुताबिक, कोपेनहेगन को स्थिरता, इंफ्रास्ट्रक्चर और शिक्षा के मामले में “परफेक्ट” स्कोर मिला है। ईआईयू के एक प्रवक्ता ने बताया कि इस शहर की शानदार स्थिरता और बुनियादी ढांचे के साथ-साथ बेहतरीन संस्कृति, पर्यावरण और उच्च गुणवत्ता वाली सार्वजनिक सेवाओं के बेजोड़ तालमेल ने इसे शीर्ष पर बनाए रखा है। अमेरिका और कनाडा का क्या है हाल?टॉप-10 की ग्लोबल लिस्ट में उत्तरी अमेरिका का केवल एक शहर जगह बना पाया है, और वह है कनाडा का वैंकूवर (9वां स्थान)। अगर अमेरिकी शहरों की बात करें तो न्यूयॉर्क तीन पायदान की छलांग लगाकर 66वें नंबर पर आ गया है। अपराध दर में कमी और आतंकी घटनाओं के कम होते खतरे की वजह से इसके ‘स्टेबिलिटी स्कोर’ में काफी सुधार हुआ है। हालांकि, दो पायदान नीचे खिसकने के बावजूद होनोलूलू (25वां स्थान) अभी भी अमेरिका का सबसे ऊंची रैंकिंग वाला शहर बना हुआ है। एशिया के स्कोर में सुधार, यूरोप में ठहरावइंडेक्स के आंकड़ों के अनुसार, पश्चिमी यूरोप अभी भी रहने के लिहाज से दुनिया का सबसे शानदार क्षेत्र बना हुआ है, हालांकि अब इसके औसत स्कोर में एक ठहराव आ गया है। इसके उलट, एशिया के औसत स्कोर में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। साल 2025 की तुलना में इस बार चीन के 10 शहरों ने अपनी रैंकिंग में सुधार किया है। इसके अलावा, रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि ईरान युद्ध की वजह से पूरे खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता प्रभावित हुई है। एशिया के हेल्थकेयर में सुधार से रैंकिंग उछलीइस साल एशिया के औसत लिवेबिलिटी स्कोर में 0.3 अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे यह 73.9 हो गया है। इसकी सबसे बड़ी वजह यहां की स्वास्थ्य सेवाओं (हेल्थकेयर) का मजबूत होना है। चीन के कई शहरों की रैंकिंग में भी उछाल आया है, जैसे फुझोऊ सात पायदान चढ़कर 93वें नंबर पर पहुंच गया है। ईआईयू की इंडस्ट्री डायरेक्टर एना निकोल्स के मुताबिक, एशिया के स्कोर में बढ़ोतरी का नतीजा यह है कि अब टॉप-20 में यूरोप के सात शहरों के साथ एशिया के नौ शहर शामिल हो गए हैं। वहीं, पश्चिमी यूरोप अभी भी रहने के लिहाज से सबसे मजबूत क्षेत्र बना हुआ है, हालांकि पिछले साल के मुकाबले इसका औसत स्कोर थोड़ा गिरकर 91.7 हो गया है। युद्ध की वजह से खाड़ी देशों को भारी नुकसानईरान युद्ध के नतीजे खाड़ी (गल्फ) क्षेत्र के शहरों की रैंकिंग में साफ दिखाई दे रहे हैं, जहां स्थिरता स्कोर में भारी गिरावट दर्ज की गई है। मस्कट 14 पायदान गिरकर 123वें नंबर पर और कुवैत सिटी 12 स्थान खिसककर 105वें नंबर पर आ गया है। लिस्ट में सबसे नीचे सीरिया का दमिश्क शहर है, जो अभी भी दुनिया में रहने के लिहाज से सबसे खराब शहर माना गया है। इसके अलावा, युद्ध के कारण ईरान की राजधानी तेहरान खिसककर 164वें और यूक्रेन का कीव 166वें नंबर पर पहुंच गया है।

चीन के जिनजियांग शहर में जूतों की फैक्ट्री में लगी भीषण आग…..28 लोगों की मौत

बीजिंग। चीन (China) के जिनजियांग शहर (Jinjiang City) में गुरुवार को जूतों की फैक्ट्री (Shoe factory) में भीषण आग लगने से 28 लोगों की मौत हो गई। स्थानीय अधिकारियों ने यह जानकारी दी। घटना के वीडियो में इमारत और उसके आसपास की आग की लपटें उठती हुई दिख रही हैं। आपातकालीन प्रबंधन मंत्रालय ने आग लगने के बाद बचाव और राहत कार्यों के लिए संयुक्त कार्य दल पूर्वी चीन (Eastern China) के फुजियान प्रांत (Fujian Province) के जिनजियांग शहर भेज दिए हैं। मंत्रालय ने बताया कि आग दोपहर करीब 12 बजे लगी। सरकारी समाचार एजेंसी ‘शिन्हुआ’ की खबर के अनुसार, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अधिकारियों को तलाश और बचाव अभियानों में हरसंभव प्रयास करने, घटना का कारण पता लगाने और जवाबदेही तय करने का निर्देश दिया है। जिनपिंग ने दिए सख्त आदेशजिनपिंग ने घटना की तेजी से जांच करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई करने का आदेश दिया। शहर के फायर डिपार्टमेंट ने एक बयान में कहा कि आग जिनजियांग शहर में हुईटेंग शू कंपनी की एक फैक्ट्री में लगी, जिसे चीन की जूतों की राजधानी भी कहा जाता है। आग लगने का कारण तुरंत पता नहीं चला, और यह भी साफ नहीं है कि हाल के सालों में चीन में लगी सबसे जानलेवा आग में और लोग घायल हुए हैं या नहीं। लोकल मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि लोग छत पर फंस गए थे। हिरासत में फैक्ट्री का मालिक और इंचार्जशिन्हुआ के अनुसार, फैक्ट्री के मालिक और दूसरे इंचार्ज को हिरासत में ले लिया गया है और कंपनी के अकाउंट फ्रीज कर दिए गए हैं। स्टेट ब्रॉडकास्टर CCTV के वीडियो में कई मंजिल वाली एक बिल्डिंग का अगला हिस्सा जला हुआ काला और सफेद धुएं से ढका हुआ दिख रहा है। पहले के फुटेज में दिख रहा है कि कई मंजिलों पर आग लगी हुई थी और बिल्डिंग घने काले धुएं से ढकी हुई थी। जब आग लगी, तब फैक्ट्री में 237 वर्कर और दो विजिटर थे। अधिकारियों ने 213 लोगों को निकाला या बचाया है। सरकारी ब्रॉडकास्टर CCTV के मुताबिक, मरने वाले 28 लोगों में से दो को हॉस्पिटल ले जाने के बाद मृत घोषित कर दिया गया। जूते की राजधानी है जिनजियांगतटीय फुजियान प्रांत में जिनजियांग जूते और कपड़े बनाने का एक बड़ा हब है और इसे अक्सर चीन की जूते की राजधानी कहा जाता है। एक स्थानीय अधिकारी ने CCTV को बताया कि शुरुआती जांच से पता चलता है कि आग फैक्ट्री के ग्राउंड फ्लोर पर लगी थी। अधिकारी ने कहा कि बिल्डिंग में रखा जूता बनाने का सामान बहुत ज्यादा आग पकड़ने वाला था और इससे आग तेजी से फैल सकती थी। वहां मौजूद सामान और चिपकने वाली चीजों की वजह से, मौके पर तेज गंध थी, जिससे आंखों में जलन हो रही थी। सरकारी ब्रॉडकास्टर ने फायरफाइटर्स के हवाले से बताया कि सीढ़ियों पर भी बहुत सारा सामान जमा हो गया था, जिससे बचाव और आग बुझाने के काम में रुकावट आ रही थी।

MP: BJP विधायक ने लिया ऐसा प्रण… जिसे सुन CM भी हैरान, बोले- अच्छे कार्य के लिए जूते-चप्पल छोड़ने की जरूरत नहीं

शाजापुर। मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के कालापीपल (Kalapipal) से भाजपा विधायक घनश्याम चंद्रवंशी (BJP MLA Ghanshyam Chandravanshi) ने गुरुवार को एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) के सामने एक ऐसा प्रण ले लिया, जिसे सुनकर सीएम भी हैरान रह गए। चंद्रवंशी ने अपने विधानसभा क्षेत्र की सड़कें बनने तक जूते-चप्पल नहीं पहनने की घोषणा कर दी, जिसके बाद मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि अच्छे कार्य के लिए जूते-चप्पल छोड़ने की जरूरत नहीं है, साथ ही विधायक की भाषा के लिए उन्हें एक हिदायत भी दी। कालापीपल में आयोजित किसान सम्मेलन के दौरान सीएम की मौजूदगी में विधायक ने अपने विधानसभा क्षेत्र की सड़कों की खराब स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि जब तक क्षेत्र की सड़कें नहीं बनेंगी, तब तक वह जूते-चप्पल का त्याग करेंगे, चाहे इसमें दस वर्ष ही क्यों न लग जाएं। MLA ने लिया काम पूरा होने तक जूते-चप्पल नहीं पहनने का प्रणदरअसल कार्यक्रम के दौरान विधायक घनश्याम चंद्रवंशी ने सीएम से अपनी विधानसभा की 48 सड़कों के उन्नयन और 16 नई सड़कों की स्वीकृति समेत नए राजस्व भवन और अरनियाकला में आर्ट एंड साइंस खोलने की मांग रखी। इसी दौरान उन्होंने कहा कि, 16 सड़कें स्वीकृत नहीं हुईं या उनका निर्माण पूरा नहीं हुआ तो मैं जूते-चप्पल नहीं पहनूंगा। सीएम बोले- जूते-चप्पल छोड़ने की जरूरत नहींविधायक की घोषणा के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंच से प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्य में पांच लाख किलोमीटर से ज्यादा सड़कों का निर्माण हुआ है और सरकार विकास कार्यों के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि जूते-चप्पल छोड़ने की जरूरत नहीं है, बल्कि अच्छे और सच्चे कार्य के लिए संकल्प के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने विधायक को शब्दों के चयन में भी सावधानी बरतने की सलाह दी। सीएम बोले- 16 नहीं, हम 17 सड़कें देंगे, शब्दों का ध्यान रखेंमुख्यमंत्री यादव ने विधायक को जवाब देते हुए कहा, ’16 नहीं, 17 सड़कें देंगे। हमारे जूते-चप्पल कांटों से बचाने और दौड़ लगाने के लिए हैं। विधायक जी को जूते-चप्पल छोड़ने की जरूरत नहीं है। अपनी बात और शब्दों का ध्यान रखना चाहिए। यह काम कांग्रेसियों के लिए रहने दो। सरकार अच्छे और सच्चे काम के लिए आपके साथ है।’ सीएम ने दी 30.86 करोड़ के विकास कार्यों की सौगातमुख्यमंत्री ने आगे कहा, ‘यह कागज मैंने ले लिया है। नाम नहीं पढ़ूंगा, लेकिन आपको बुलाकर सभी मांगें मंजूर कर रहा हूं। विकास के कामों में कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी।’ इसके साथ ही सीएम ने 30.86 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन भी किया। इस दौरान उन्होंने 16 प्रमुख सड़कों के निर्माण एवं उन्नयन के साथ ही सांसद की मांग पर रेलवे ओवर ब्रिज की भी घोषणा की। दरअसल ये पूरा वाकिया शाजापुर जिले के कालापीपल में आयोजित किसान सम्मेलन में नजर आया, जिसमें शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव पहुंचे थे। इस कार्यक्रम के दौरान प्रदेश सरकार में मंत्री इंदर सिंह परमार, सांसद महेंद्र सोलंकी और स्थानीय विधायक घनश्याम चंद्रवंशी समेत अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्यजन नागरिक भी उपस्थित रहे।

Ind vs Eng Test : लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर आज इतिहास रचने उतरेगी भारतीय महिला टीम

लंदन । लॉर्ड्स (Lord’s) के ऐतिहासिक मैदान पर शुक्रवार से भारत और इंग्लैंड की महिला टीमों के बीच टेस्ट मुकाबला खेला जाएगा। भारत की कप्तान (India captain) हरमनप्रीत कौर (Harmanpreet Kaur) ने लॉर्ड्स (Lord’s) में इंग्लैंड (England) के खिलाफ होने वाले ऐतिहासिक महिला टेस्ट (Historic Women’s Test) को टीम के लिए टर्निंग प्वाइंट बताया है. उन्होंने कहा कि इस मुकाबले में जीत T20 वर्ल्ड कप से मिली निराशा को खत्म कर सकती है और टीम का आत्मविश्वास लौटाएगी. कप्तान ने पहली बार लॉर्ड्स में महिला टेस्ट होने, रेड-बॉल क्रिकेट, श्री चरणी और महिला टेस्ट के भविष्य पर भी खुलकर बात की। भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर का मानना है कि अगर भारत इस मुकाबले में जीत दर्ज करता है तो हालिया T20 वर्ल्ड कप में ग्रुप स्टेज से बाहर होने का दर्द काफी हद तक कम हो जाएगा और टीम नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ेगी। हरमनप्रीत ने कहा कि T20 वर्ल्ड कप में भारतीय टीम अपनी क्षमता के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी. कुछ मुकाबलों में टीम ने अच्छा खेल दिखाया, लेकिन पूरे टूर्नामेंट में लगातार बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाई. यही वजह है कि लॉर्ड्स टेस्ट टीम के लिए नई शुरुआत साबित हो सकता है। उन्होंने कहा- अगर हम यह टेस्ट जीतते हैं तो टीम के लिए यह बहुत बड़ी उपलब्धि होगी. वर्ल्ड कप के बाद हर खिलाड़ी निराश था, लेकिन इस टेस्ट के जरिए हम अपना आत्मविश्वास वापस हासिल कर सकते हैं. जीत के बाद आपको महसूस होता है कि आप दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीमों में शामिल हैं। कप्तान ने कहा कि जब परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं आते तो खिलाड़ियों का मनोबल गिरता है. ऐसे समय में टीम का एकजुट रहना सबसे ज्यादा जरूरी होता है. उन्होंने भरोसा जताया कि अगर सभी खिलाड़ी एक-दूसरे का साथ दें और टीम के लिए खेलें तो यह जीत आने वाले बड़े टूर्नामेंटों में भी भारत के लिए फायदेमंद साबित होगी। 142 साल बाद लॉर्ड्स में पहली बार महिला टेस्टलॉर्ड्स में यह पहला महिला टेस्ट मैच होगा. इस ऐतिहासिक मौके पर हरमनप्रीत ने कहा कि हर क्रिकेटर का सपना होता है कि वह लॉर्ड्स में टेस्ट खेले. उन्हें यह जानकर भी हैरानी हुई कि इस प्रतिष्ठित मैदान पर अब तक महिला टेस्ट आयोजित नहीं हुआ था। उन्होंने कहा- जब हमें पता चला कि इतने साल बाद यहां पहला महिला टेस्ट होने जा रहा है तो हम सभी हैरान थे. मुझे पहले इसकी जानकारी नहीं थी. लेकिन मैं यही कहूंगी कि देर हुई है, बहुत ज्यादा देर नहीं हुई. मैं खुश हूं कि अपने करियर में मुझे इस ऐतिहासिक मैच का हिस्सा बनने का मौका मिला। उन्होंने बताया कि पूरी भारतीय टीम इस मुकाबले को लेकर बेहद उत्साहित है और सभी खिलाड़ी इस ऐतिहासिक अवसर को यादगार बनाना चाहते हैं। रेड-बॉल क्रिकेट चुनौती भी, मौका भीहरमनप्रीत ने माना कि महिला खिलाड़ियों को रेड-बॉल क्रिकेट खेलने के ज्यादा मौके नहीं मिलते, इसलिए यह फॉर्मेट चुनौतीपूर्ण जरूर है. हालांकि उन्होंने कहा कि टीम ने पिछले कुछ दिनों में कई प्रैक्ट‍िस सेशन किए हैं और खिलाड़ी अच्छी लय में नजर आए। उन्होंने कहा- हम रेड-बॉल क्रिकेट खेलने के आदी नहीं हैं, लेकिन जब किसी चीज को लेकर उत्साह होता है तो खिलाड़ी अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करते हैं.” ज्यादा महिला टेस्ट खेलने की जताई इच्छाभारतीय कप्तान ने महिला टेस्ट क्रिकेट के भविष्य पर भी अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि खिलाड़ी के तौर पर वह ज्यादा से ज्यादा टेस्ट मैच खेलना चाहती हैं, लेकिन इसका फैसला ICC और संबंधित क्रिकेट बोर्डों को करना है। हरमनप्रीत ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में महिला क्रिकेट लगातार आगे बढ़ा है. पिछले साल मार्च में भारत ने टेस्ट खेला था और अब लॉर्ड्स में एक और मौका मिला है. उन्हें उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में महिला टेस्ट मैचों की संख्या और बढ़ेगी। इंग्लैंड के खिलाफ रिकॉर्ड से बढ़ा भरोसाहरमनप्रीत ने कहा कि भारत ने हाल के टेस्ट मुकाबलों में अच्छा प्रदर्शन किया है और इंग्लैंड के खिलाफ भी टीम का रिकॉर्ड मजबूत रहा है. ऐसे में खिलाड़ियों ने तय किया है कि वे एकजुट होकर मैदान पर उतरेंगे और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेंगे. श्री चरणी पर कप्तान को पूरा भरोसाकप्तान ने बाएं हाथ की स्पिनर श्री चरणी की जमकर तारीफ की, जो लॉर्ड्स टेस्ट में डेब्यू करने जा रही हैं. T20 वर्ल्ड कप में भारत की सबसे सफल गेंदबाज रहीं चरणी को लेकर हरमनप्रीत ने कहा कि वह टीम की सबसे अहम गेंदबाजों में से एक हैं. उन्होंने कहा कि चरणी ने केवल वर्ल्ड कप ही नहीं, उससे पहले भी लगातार शानदार प्रदर्शन किया है. जब भी टीम को विकेट की जरूरत होती है, वह कप्तान की उम्मीदों पर खरी उतरती हैं. ऐसे खिलाड़ी कप्तान का आत्मविश्वास भी बढ़ाते हैं और टीम को मुश्किल परिस्थितियों से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाते हैं।