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मध्य प्रदेश में मानसून का बदला मिजाज फिलहाल रिमझिम बारिश का दौर अगले हफ्ते कई जिलों में फिर भारी बारिश के आसार

मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच अब मौसम कुछ राहत देने वाला है। मौसम विभाग के अनुसार अगले तीन दिनों तक प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश का दौर बना रहेगा और कहीं भी अत्यधिक वर्षा की संभावना नहीं है। हालांकि यह राहत ज्यादा लंबी नहीं होगी क्योंकि अगले सप्ताह एक नया मौसम तंत्र सक्रिय होने के साथ ही कई जिलों में फिर से भारी बारिश का दौर शुरू हो सकता है। ऐसे में लोगों को एक बार फिर सतर्क रहने की जरूरत होगी। मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल सक्रिय मानसूनी सिस्टम कमजोर पड़ रहा है। इसी वजह से ग्यारह जुलाई से तेरह जुलाई तक अधिकांश जिलों में रुक रुक कर हल्की बारिश होने का अनुमान है। शनिवार को भोपाल इंदौर उज्जैन जबलपुर ग्वालियर सहित प्रदेश के सभी जिलों में गरज चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है। कई स्थानों पर चालीस से पचास किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की भी संभावना जताई गई है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक पाकिस्तान के ऊपर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है जिसका असर अगले सप्ताह मध्य प्रदेश के मौसम पर दिखाई देगा। चौदह जुलाई से कई जिलों में फिर तेज बारिश की संभावना बन रही है। यदि नया सिस्टम पूरी तरह सक्रिय हुआ तो प्रदेश के कई हिस्सों में एक बार फिर भारी वर्षा देखने को मिल सकती है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल तेज बारिश का रुकना खरीफ फसलों के लिए राहत की खबर है। पिछले कुछ दिनों में कई जिलों में लगातार भारी बारिश के कारण खेतों में पानी भर गया था जिससे फसलों में गलन और नुकसान की आशंका बढ़ने लगी थी। अब हल्की बारिश और मौसम में संतुलन रहने से फसलों को बेहतर बढ़वार मिलने की उम्मीद है। बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस बार जून महीने में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई थी लेकिन जुलाई के शुरुआती दिनों ने पूरी तस्वीर बदल दी है। प्रदेश में अब तक लगभग नौ दशमलव पांच इंच बारिश हो चुकी है जो सामान्य से अधिक है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में औसत से काफी ज्यादा बारिश दर्ज की गई है जबकि पूर्वी हिस्से के कुछ जिलों में अब भी सामान्य से कम वर्षा हुई है। प्रदेश के लगभग तीस जिलों में सामान्य से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है। इनमें भोपाल इंदौर देवास हरदा उज्जैन रतलाम राजगढ़ सीहोर शाजापुर ग्वालियर गुना खंडवा खरगोन और विदिशा जैसे जिले शामिल हैं। वहीं अनूपपुर बालाघाट जबलपुर कटनी रीवा सतना सागर और शहडोल सहित कई जिलों में अभी भी सामान्य से कम वर्षा दर्ज हुई है। देवास इस समय प्रदेश का सबसे अधिक बारिश वाला जिला बन गया है जहां अब तक करीब अठारह इंच पानी गिर चुका है। वहीं इंदौर और सीहोर में चौदह इंच से अधिक तथा भोपाल में तेरह इंच से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। दूसरी ओर आलीराजपुर सबसे कम बारिश वाला जिला बना हुआ है जहां अब तक केवल लगभग सवा दो इंच वर्षा हुई है। मौसम विभाग का कहना है कि जुलाई का महीना प्रदेश के लिए सबसे महत्वपूर्ण मानसूनी महीना माना जाता है क्योंकि सामान्य तौर पर पूरे सीजन की लगभग चालीस प्रतिशत बारिश इसी महीने होती है। ऐसे में अगले कुछ दिनों का मौसम किसानों और आम लोगों दोनों के लिए बेहद अहम रहने वाला है।

हर की पौड़ी की सेवा परंपरा को बड़ा झटका, हजारों भूखों तक भोजन पहुंचाने वाले 'भंडारा किंग बाबा' रमाशंकर गुप्ता का निधन, हरिद्वार ने खोई अपनी अनोखी पहचान

नई दिल्ली । हरिद्वार की हर की पौड़ी क्षेत्र से जुड़ी सेवा और मानवता की एक प्रेरणादायक पहचान अब इतिहास का हिस्सा बन गई है। वर्षों तक श्रद्धालुओं और दानदाताओं को जरूरतमंद लोगों से जोड़ने वाले रमाशंकर गुप्ता, जिन्हें लोग स्नेहपूर्वक ‘भंडारा किंग बाबा’ के नाम से जानते थे, का निधन हो गया। उनके जाने से न केवल हरिद्वार बल्कि उन हजारों लोगों के बीच भी शोक का माहौल है, जिनके लिए वह नियमित रूप से भोजन की व्यवस्था कराने का माध्यम बने थे। रमाशंकर गुप्ता मूल रूप से उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के निवासी थे, लेकिन लंबे समय पहले हरिद्वार आकर उन्होंने अपना जीवन सेवा कार्यों को समर्पित कर दिया। हर की पौड़ी के निकट शिवसेतु पर बैठकर वह श्रद्धालुओं से विनम्र आग्रह करते थे कि यदि संभव हो तो भूखे साधुओं, गरीबों और जरूरतमंद लोगों के लिए भंडारे में सहयोग करें। उनका यह प्रयास व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि समाज के वंचित वर्ग तक भोजन पहुंचाने के उद्देश्य से होता था। समय के साथ उनकी पहचान एक ऐसे व्यक्ति के रूप में बनी, जिस पर श्रद्धालु पूरी तरह भरोसा करते थे। लोग जानते थे कि उनके माध्यम से दिया गया सहयोग वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचेगा। यही विश्वास उन्हें सामान्य व्यक्ति से अलग बनाता था। हरिद्वार आने वाले अनेक श्रद्धालु विशेष रूप से उन्हें खोजते थे और उनके माध्यम से भोजन वितरण की व्यवस्था कराते थे। उनकी सादगी और पारदर्शिता ने समाज में उनकी अलग छवि स्थापित की। रमाशंकर गुप्ता हमेशा इस बात पर जोर देते थे कि भोजन की गुणवत्ता से कभी समझौता नहीं होना चाहिए। उनका मानना था कि जैसा भोजन वह स्वयं ग्रहण करते हैं, वैसा ही भोजन जरूरतमंदों को भी मिलना चाहिए। इसी सोच के साथ वह भोजन तैयार करवाने और उसके वितरण की व्यवस्था में सक्रिय भूमिका निभाते थे। उनका उद्देश्य केवल भोजन कराना नहीं, बल्कि सम्मानपूर्वक सेवा उपलब्ध कराना था। उनके निधन के बाद सबसे बड़ा प्रश्न यह भी सामने आया है कि अब उन लोगों की सहायता किस प्रकार होगी, जिनके लिए वह प्रतिदिन भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित करते थे। वह दान देने वालों और भोजन पाने वालों के बीच एक मजबूत कड़ी थे। उनकी मौजूदगी ने वर्षों तक सेवा कार्यों को सरल और व्यवस्थित बनाए रखा। अब उनकी अनुपस्थिति में इस व्यवस्था को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी समाज और स्थानीय लोगों के सामने एक महत्वपूर्ण चुनौती के रूप में खड़ी है। हरिद्वार जैसे धार्मिक नगरों की पहचान केवल मंदिरों, घाटों और धार्मिक आयोजनों से नहीं बनती, बल्कि ऐसे लोगों से भी बनती है जो निस्वार्थ सेवा को अपना जीवन बना लेते हैं। रमाशंकर गुप्ता ने बिना किसी संस्था, प्रचार या पद के समाज सेवा का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया, जिसने उन्हें लोगों के बीच विशेष सम्मान दिलाया। उनकी पहचान किसी औपचारिक संगठन से नहीं, बल्कि उनके कार्यों और सेवा भाव से बनी। आज जब श्रद्धालु हर की पौड़ी की ओर जाएंगे और शिवसेतु से गुजरेंगे, तो वहां उनकी परिचित आवाज सुनाई नहीं देगी। हालांकि उनका जीवन यह संदेश अवश्य छोड़ गया है कि समाज में छोटे-छोटे प्रयास भी हजारों लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। सेवा, विश्वास और मानवता के प्रति उनका समर्पण लंबे समय तक लोगों को प्रेरित करता रहेगा और हरिद्वार की सामाजिक स्मृतियों में उनकी पहचान हमेशा जीवित रहेगी।

शंकराचार्य से बढ़ती नजदीकियों के सहारे नया राजनीतिक संदेश, सनातन और समाजवाद को साथ जोड़ने की रणनीति पर आगे बढ़े अखिलेश यादव

नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले नए राजनीतिक संकेत देखने को मिल रहे हैं। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की हालिया मुलाकात ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा को जन्म दिया है। इस मुलाकात में सनातन, गौरक्षा और राम मंदिर से जुड़े विषयों पर बातचीत हुई, जिसे राजनीतिक विश्लेषक समाजवादी पार्टी की बदलती रणनीति के रूप में देख रहे हैं। हाल के वर्षों में सामाजिक न्याय और पीडीए की राजनीति पर जोर देने वाली पार्टी अब धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर भी अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराने का प्रयास करती दिखाई दे रही है। लखनऊ में हुई इस मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें और वीडियो साझा करते हुए सनातन और समाजवाद के बीच समानता का संदेश दिया। मुलाकात के दौरान उन्होंने शंकराचार्य का आशीर्वाद लिया और जमीन पर बैठकर संवाद किया। इस प्रतीकात्मक प्रस्तुति को भी राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी की ओर से इसे सामाजिक समरसता और भारतीय परंपरा के सम्मान का संदेश बताया गया। बैठक में राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे के कथित अनियमितता के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। अखिलेश यादव ने इस विषय पर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई। उनका कहना था कि धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि आस्था से जुड़े विषयों को राजनीतिक लाभ या नुकसान के बजाय जनविश्वास के दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पिछले कुछ समय से विभिन्न धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर अपनी स्पष्ट राय रखते रहे हैं। गौरक्षा, सनातन परंपरा और अन्य धार्मिक विषयों पर उनकी सक्रियता लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। हाल के महीनों में उनकी कई सार्वजनिक टिप्पणियों ने प्रदेश की राजनीति में भी प्रभाव डाला है। ऐसे समय में समाजवादी पार्टी नेतृत्व का उनसे लगातार संवाद राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे पहले भी अखिलेश यादव और उनकी पत्नी एवं सांसद डिंपल यादव शंकराचार्य से मुलाकात कर चुके हैं। दोनों पक्षों के बीच गौरक्षा, धार्मिक परंपराओं और सामाजिक मुद्दों पर विचार-विमर्श होता रहा है। इन बैठकों ने यह संकेत दिया है कि समाजवादी पार्टी धार्मिक नेतृत्व के साथ संवाद बनाए रखने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रयास पार्टी की व्यापक सामाजिक पहुंच बढ़ाने की दिशा में भी देखा जा सकता है। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपने-अपने जनाधार को मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे में धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक विमर्श एक-दूसरे से जुड़े हुए दिखाई दे रहे हैं। समाजवादी पार्टी जहां सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्गों की राजनीति को आगे बढ़ाने की बात करती रही है, वहीं अब सनातन परंपरा से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी सक्रिय भागीदारी दिखा रही है। इससे प्रदेश की चुनावी राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावनाओं पर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि इस मुलाकात के राजनीतिक प्रभाव का वास्तविक आकलन आगामी चुनावी माहौल और मतदाताओं की प्रतिक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल इतना तय है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में धार्मिक नेतृत्व और राजनीतिक दलों के बीच बढ़ता संवाद चुनावी रणनीतियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है, जहां सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों के साथ राजनीतिक संदेश भी समानांतर रूप से आगे बढ़ रहे हैं।

कार्यवाहक प्रमोशन पर चला सरकार का बड़ा फैसला हजारों पुलिसकर्मियों की बढ़ी मुश्किलें मूल पद पर लौटाने की तैयारी शुरू

मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में नए पदोन्नति नियम लागू होने के बाद बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल सकता है। पिछले कई वर्षों से कार्यवाहक पदोन्नति के आधार पर उच्च पदों पर जिम्मेदारी संभाल रहे करीब पंद्रह हजार पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों पर अब मूल पद पर लौटने का खतरा मंडरा रहा है। सरकार द्वारा मध्य प्रदेश पदोन्नति नियम दो हजार पच्चीस लागू किए जाने के बाद पुलिस मुख्यालय ने नियमित विभागीय पदोन्नति समिति की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसके साथ ही कार्यवाहक पदोन्नति के सभी मामलों की चरणबद्ध समीक्षा शुरू कर दी गई है जिससे पूरे विभाग में चिंता और असमंजस का माहौल बन गया है। दरअसल वर्ष दो हजार सोलह के बाद लंबे समय तक नियमित पदोन्नतियां नहीं हो सकीं। विभाग में रिक्त पदों और प्रशासनिक जरूरतों को देखते हुए वर्ष दो हजार इक्कीस से बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों को कार्यवाहक पदोन्नति देकर उच्च पदों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अब नए नियम लागू होने के बाद इन सभी मामलों का दोबारा परीक्षण किया जा रहा है ताकि नियमित पदोन्नति केवल पात्र और योग्य कर्मचारियों को ही मिल सके। इस प्रक्रिया की पहली बड़ी कार्रवाई पांढुर्णा जिले में देखने को मिली है जहां कार्यवाहक प्रधान आरक्षक के रूप में काम कर रहे बत्तीस पुलिसकर्मियों से प्रभार वापस लेकर उन्हें फिर से आरक्षक पद पर पदस्थ कर दिया गया। पुलिस अधीक्षक द्वारा जारी आदेश के बाद सभी कर्मचारियों ने अपने मूल पद पर कार्यभार संभाल लिया। विभाग का कहना है कि यह कार्रवाई नए पदोन्नति नियमों और पुलिस मुख्यालय के निर्देशों के अनुरूप की गई है। सूत्रों के अनुसार नियमित विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक से पहले प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी के पिछले पांच वर्षों के सेवा रिकॉर्ड की गहन जांच की जा रही है। इसमें वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन अनुशासनात्मक कार्रवाई निलंबन विभागीय दंड और न्यायालयों में लंबित मामलों का भी मूल्यांकन किया जा रहा है। जिन कर्मचारियों का रिकॉर्ड निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं होगा उन्हें नियमित पदोन्नति नहीं मिलेगी और उनका कार्यवाहक प्रभार भी समाप्त कर दिया जाएगा। पुलिस मुख्यालय के प्रारंभिक आकलन के अनुसार फिलहाल करीब एक हजार अधिकारी और कर्मचारी ऐसे हैं जिन पर इस प्रक्रिया का सीधा प्रभाव पड़ सकता है। आने वाले कुछ दिनों में प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसी तरह की कार्रवाई शुरू होने की संभावना है। विभागीय अधिकारियों का अनुमान है कि आगे चलकर प्रभावित होने वालों की संख्या पंद्रह हजार तक पहुंच सकती है। वर्षों से उच्च पदों पर कार्य कर रहे कई पुलिसकर्मियों का मानना है कि यदि उन्हें फिर से मूल पद पर भेजा गया तो इससे उनका मनोबल प्रभावित होगा और कार्यक्षमता पर भी असर पड़ सकता है। दूसरी ओर विभाग का कहना है कि नई व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी और नियम आधारित होगी ताकि योग्य कर्मचारियों को ही स्थायी पदोन्नति का लाभ मिल सके। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव द्वारा सभी विभागों से पदोन्नति प्रक्रिया की जानकारी मांगे जाने के बाद पुलिस विभाग सहित कई विभागों में लंबित पदोन्नति मामलों पर तेजी से काम शुरू हुआ है। ऐसे में आने वाले दिनों में पुलिस महकमे में बड़े स्तर पर प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

बैंक OTP से लेकर सरकारी अलर्ट तक हो सकते हैं मिस 140 और 1600 नंबरों पर TRAI ने दूर किया बड़ा भ्रम

नई दिल्ली । अगर आप मोबाइल पर आने वाली हर अनजान कॉल को स्पैम मानकर ब्लॉक कर देते हैं तो अब आपको थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत है। टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी TRAI ने 140 और 1600 सीरीज के नंबरों को लेकर महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। प्राधिकरण का कहना है कि इन नंबरों का इस्तेमाल अलग अलग उद्देश्यों के लिए किया जाता है और इन्हें बिना समझे स्पैम मान लेना कई बार आपके लिए परेशानी का कारण बन सकता है। TRAI के अनुसार 1600 सीरीज के नंबर विशेष रूप से बैंकों बीमा कंपनियों भारतीय रिजर्व बैंक SEBI IRDAI PFRDA और विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा उपयोग किए जाते हैं। इन नंबरों से ग्राहकों को बैंक ट्रांजैक्शन की जानकारी OTP KYC अपडेट खाते से जुड़े अलर्ट बीमा सेवाओं और सरकारी योजनाओं से संबंधित महत्वपूर्ण सूचनाएं भेजी जाती हैं। यदि कोई व्यक्ति इन नंबरों को ब्लॉक कर देता है तो वह कई जरूरी सूचनाओं से वंचित रह सकता है जिससे वित्तीय या प्रशासनिक परेशानी भी हो सकती है। वहीं 140 सीरीज के नंबरों का उपयोग प्रमोशनल और मार्केटिंग कॉल के लिए किया जाता है। हालांकि यह भी पूरी तरह अनियंत्रित नहीं होते। यदि किसी उपभोक्ता ने DND सेवा के तहत किसी विशेष श्रेणी की प्रमोशनल कॉल प्राप्त करने की अनुमति दी है तो उसी आधार पर 140 सीरीज से कॉल की जाती है। ऐसे में इन सभी नंबरों को एक साथ स्पैम घोषित करना उचित नहीं माना जा सकता। TRAI ने स्पष्ट किया है कि हाल के दिनों में सोशल मीडिया और विभिन्न प्लेटफॉर्म पर 140 और 1600 सीरीज के नंबरों को लेकर कई तरह की गलत जानकारियां फैल रही थीं। इसी भ्रम को दूर करने के लिए यह स्पष्टीकरण जारी किया गया है ताकि लोग जरूरी कॉल को गलती से ब्लॉक न करें और महत्वपूर्ण सेवाओं का लाभ समय पर मिलता रहे। इस पूरे मामले में कॉल मैनेजमेंट एप्स भी चर्चा में हैं। Truecaller Hiya और Whoscall जैसे कई एप्स कुछ मामलों में 140 और 1600 सीरीज के नंबरों को स्पैम के रूप में दिखा रहे हैं। TRAI का मानना है कि इस तरह की टैगिंग से लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। इसी वजह से TRAI ने सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत अधिकृत एजेंसी का दर्जा मांगा है ताकि जरूरत पड़ने पर ऐसे प्लेटफॉर्म को नोटिस जारी कर नियमों का पालन सुनिश्चित कराया जा सके। बताया जा रहा है कि इस प्रस्ताव को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की सैद्धांतिक सहमति भी मिल चुकी है। दूसरी ओर Truecaller ने भी अपना पक्ष रखा है। कंपनी का कहना है कि केवल 140 या 1600 सीरीज का नंबर होने भर से किसी कॉल को पूरी तरह भरोसेमंद नहीं माना जा सकता। कंपनी के आंकड़ों के अनुसार पिछले आठ महीनों में उपयोगकर्ताओं ने 140 सीरीज की लगभग 81 प्रतिशत और 1600 सीरीज की करीब 79 प्रतिशत कॉल का जवाब नहीं दिया। इससे साफ है कि लोग अनजान नंबरों को लेकर पहले से अधिक सतर्क हो गए हैं। ऐसे में विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी भी नंबर को ब्लॉक करने से पहले यह जरूर जांच लें कि वह बैंक सरकारी विभाग या किसी अधिकृत संस्था से जुड़ा तो नहीं है। थोड़ी सी सावधानी आपको जरूरी सूचना छूटने और संभावित नुकसान से बचा सकती है।

दिल्ली से भोपाल आ रही शताब्दी में एक्सपायरी ब्रेड परोसी गई छोटे बच्चों समेत दर्जनों यात्रियों को फूड पॉयजनिंग का डर शिकायत के बाद जांच शुरू

नई दिल्ली। दिल्ली से भोपाल आ रही नई दिल्ली रानी कमलापति शताब्दी एक्सप्रेस में शनिवार सुबह यात्रियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी बड़ी लापरवाही सामने आई। ट्रेन में नाश्ते के दौरान यात्रियों को ऐसी ब्रेड परोसी गई जिसकी उपयोग अवधि एक दिन पहले ही समाप्त हो चुकी थी। घटना का पता चलते ही पूरे कोच में हड़कंप मच गया और यात्रियों ने रेलवे की खानपान व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। जानकारी के अनुसार ट्रेन के सी फोर कोच में यात्रा कर रहे करीब चौहत्तर यात्रियों को नाश्ते के साथ ब्रेड दी गई थी। इनमें छोटे बच्चे भी शामिल थे। अधिकांश यात्रियों ने बिना पैकेट देखे ब्रेड खा ली। बाद में एक यात्री की नजर ब्रेड के पैकेट पर लिखी उपयोग अवधि पर पड़ी तो पता चला कि उसकी अंतिम तिथि दस जुलाई थी जबकि इसे ग्यारह जुलाई को यात्रियों को परोसा गया। इसके बाद यात्रियों में फूड पॉयजनिंग की आशंका को लेकर चिंता बढ़ गई। यात्रियों का कहना है कि यह मामला केवल एक कोच तक सीमित नहीं था। ट्रेन के अन्य हिस्सों में रखे गए कैटरिंग पैकेटों में भी उसी तारीख वाली ब्रेड मौजूद थी। इससे आशंका जताई जा रही है कि कई अन्य कोचों में भी यात्रियों को एक्सपायरी खाद्य सामग्री परोसी गई होगी। इस घटना ने रेलवे की कैटरिंग व्यवस्था की निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। दिल्ली से भोपाल यात्रा कर रहे एक यात्री ने बताया कि नाश्ता करने के बाद जब एक्सपायरी डेट का पता चला तो सभी यात्री हैरान रह गए। उन्होंने तुरंत रेल मदद ऐप के जरिए शिकायत दर्ज कराई ताकि मामले की तत्काल जांच हो सके। कई अन्य यात्रियों ने भी ऑनलाइन उपभोक्ता आयोग के पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। यात्रियों का कहना है कि यदि इस तरह की लापरवाही एक प्रीमियम ट्रेन में हो सकती है तो अन्य ट्रेनों की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। उनका मानना है कि यात्रियों की जान से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता और रेलवे को खाद्य सामग्री की गुणवत्ता जांच के लिए और अधिक सख्त व्यवस्था लागू करनी चाहिए। मामले में आईआरसीटीसी के क्षेत्रीय अधिकारी ने कहा कि संबंधित ट्रेन का संचालन नॉर्दर्न रेलवे के अधीन है और भोजन भी वहीं से लोड किया जाता है। हालांकि उन्होंने स्थानीय स्तर पर जांच या कार्रवाई को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी। इसके बाद यात्रियों में नाराजगी और बढ़ गई क्योंकि वे जिम्मेदारी तय कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले भी इसी शताब्दी एक्सप्रेस के भोजन की गुणवत्ता और मात्रा को लेकर शिकायत सामने आई थी। एक यात्री ने सोशल मीडिया पर रेल मंत्री और आईआरसीटीसी को टैग करते हुए भोजन की गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे। लगातार दो दिनों में सामने आई इन घटनाओं ने रेलवे की खानपान व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यात्रियों को उम्मीद है कि जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी और भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा देखने को नहीं मिलेगी।

Gwalior E Rickshaw Accident: ई-रिक्शा बना मासूम की मौत का कारण, खेलते हुए करंट की चपेट में आयी 6 साल की बच्ची

E Rickshaw Accident

Gwalior E Rickshaw Accident: ग्वालियर। मुरार के निबुआपुरा इलाके से एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। जहां 6 साल की बच्ची की करंट लगने से मौत गयी। बताया जा रहा है की बच्ची बाहर खेल रही थी जिस वक्त उसके साथ ये हादसा हुआ। खेलते-खेलते ई-रिक्शा के पास पहुंची रिया राणा अपने घर के बाहर खेल रही थी। उसी दौरान पास में एक ई-रिक्शा चार्जिंग पर लगा हुआ था। बताया जा रहा है कि ई-रिक्शा चालक वाहन को चार्जिंग पर छोड़कर वहां से चला गया था। खेलते-खेलते रिया ई-रिक्शा के पास पहुंची और जैसे ही उसने उसे छुआ, उसे तेज करंट का झटका लगा। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, तकनीकी खराबी के कारण ई-रिक्शा की लोहे की बॉडी में करंट आ गया था, जिससे बच्ची उसकी चपेट में आ गई। Gwalior boyfriend blackmailed: गर्लफ्रेंड को ब्लैकमेल हर हड़पे 21 लाख रूपए, लगातार देता था धमकी लोगों ने बचाने की कोशिश, लेकिन नहीं बच सकी जान बच्ची को करंट से तड़पता देख आसपास के लोगों ने तुरंत बिजली की सप्लाई बंद कराई और उसे ई-रिक्शा से अलग किया। इसके बाद परिजन उसे तुरंत अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शुरू की जांच घटना की सूचना मिलते ही मुरार थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि ई-रिक्शा किसका था, उसे किस तरह चार्ज किया जा रहा था और बिजली का कनेक्शन वैध था या अवैध। साथ ही वाहन की तकनीकी जांच भी कराई जा रही है। New Drug Rules: अब डॉक्टर की पर्ची के बिना नहीं मिलेगी 12% से अधिक अल्कोहल वाली दवाएं… लापरवाही मिली तो होगी कार्रवाई मुरार थाना प्रभारी मैना पटेल ने बताया कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। यदि जांच में वाहन मालिक या किसी अन्य व्यक्ति की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़ा उलटफेर नरोत्तम को झटका शिवराज की कसम टूटी और अफसरों का हुआ शुगर टेस्ट

मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश की राजनीति इन दिनों लगातार ऐसे घटनाक्रमों की गवाह बन रही है जिन्होंने सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। सबसे बड़ी चर्चा दतिया विधानसभा उपचुनाव को लेकर रही जहां पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को टिकट मिलने की पूरी उम्मीद थी लेकिन पार्टी ने अंतिम समय में आशुतोष तिवारी पर भरोसा जताकर सभी को चौंका दिया। लंबे समय से चुनावी तैयारियों में जुटे नरोत्तम मिश्रा लगातार क्षेत्र में सक्रिय थे और जनता के बीच पहुंचकर समर्थन जुटा रहे थे। टिकट की घोषणा के बाद उनके समर्थकों में मायूसी साफ दिखाई दी और राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। भारतीय जनता पार्टी के फैसले ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि संगठन में अंतिम निर्णय नेतृत्व का होता है और आखिरी समय तक किसी भी नाम पर मुहर लगना तय नहीं माना जा सकता। यही कारण है कि दतिया का चुनाव अब नए समीकरणों के साथ आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। राजनीतिक हलकों में दूसरी बड़ी चर्चा कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए राकेश यादव को लेकर रही। दिलचस्प बात यह रही कि एक दिन पहले तक जिन राकेश यादव को मंत्री कैलाश विजयवर्गीय पहचानने से इनकार कर रहे थे अगले ही दिन वही भाजपा में शामिल हुए और उन्हें प्रदेश प्रवक्ता की जिम्मेदारी भी सौंप दी गई। इस घटनाक्रम ने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक नई बहस छेड़ दी और विपक्ष को भी भाजपा पर तंज कसने का मौका मिल गया। उधर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी एक बार फिर चर्चा में रहे। गंजबासौदा दौरे के दौरान समर्थकों ने उनका फूल मालाओं से भव्य स्वागत किया। खास बात यह रही कि शिवराज पहले कई बार सार्वजनिक मंचों से नेताओं के अत्यधिक स्वागत और मालाओं से परहेज की अपील कर चुके हैं। ऐसे में उनका मालाओं से लदा हुआ वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक चर्चाओं का दौर तेज हो गया। हालांकि समर्थकों का कहना है कि यह जनता का स्नेह है जिसे ठुकराना संभव नहीं होता। प्रशासनिक स्तर पर रीवा संभाग के कमिश्नर शीलेंद्र सिंह की पहल भी सुर्खियों में रही। समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने देखा कि कई अधिकारी और कर्मचारी बार बार बाहर जा रहे हैं। पूछताछ में स्वास्थ्य संबंधी जानकारी मिलने के बाद उन्होंने मौके पर ही मेडिकल टीम बुलाकर सभी की शुगर जांच कराई। जांच में कई कर्मचारियों का शुगर स्तर सामान्य से अधिक मिला। इस पहल को स्वास्थ्य जागरूकता और नियमित जांच अभियान से जोड़कर देखा जा रहा है। इधर राजधानी भोपाल के मंत्रालय का पांचवें फ्लोर का एक कमरा भी चर्चाओं में बना हुआ है। बताया जा रहा है कि पिछले ढाई वर्षों में वहां बैठने वाले कई अधिकारियों का लगातार तबादला हो चुका है। इसी वजह से अब यह कमरा लंबे समय से खाली पड़ा है। कुछ लोग इसे महज संयोग मान रहे हैं जबकि कुछ इसे वास्तु से जोड़कर चर्चा कर रहे हैं। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर इस तरह की बातों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है लेकिन सियासी और प्रशासनिक गलियारों में यह विषय लोगों की दिलचस्पी का केंद्र बना हुआ है।

नोरंजन जगत का काला सच: 'समझौते' से इनकार पर संदीपा विर्क को फिल्म से निकाला, आधी रात को कमरे में घुसा था डायरेक्टर

नई दिल्ली । मनोरंजन जगत की चकाचौंध के पीछे छिपा एक बेहद कड़वा और स्याह सच एक बार फिर सामने आया है। मशहूर अभिनेत्री और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर संदीपा विर्क ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में फिल्म उद्योग के भीतर व्याप्त कास्टिंग काउच और यौन उत्पीड़न की गंभीर समस्याओं पर खुलकर बात की है। अभिनेत्री ने अपने करियर के दौरान झेले गए अपमानजनक अनुभवों का खुलासा करते हुए बताया कि किस तरह काम के बदले उनसे अनुचित मांगें की गईं और इनकार करने पर उन्हें फिल्मों से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। संदीपा विर्क पिछले कुछ समय से एक कथित वित्तीय विवाद के चलते कानूनी मुश्किलों का सामना कर रही थीं। छह करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उन्हें देश की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली तिहाड़ जेल में साढ़े चार महीने का समय बिताना पड़ा था। वर्तमान में अदालत से जमानत मिलने के बाद वे सलाखों से बाहर हैं। जेल से रिहा होने के बाद ‘द शेरोज टीवी’ (TheSheroesTV) पॉडकास्ट के साथ विशेष बातचीत में अभिनेत्री का दर्द छलक पड़ा, जहां उन्होंने जेल के भीतर कटे अपने भयावह दिनों और फिल्म उद्योग की विसंगतियों को बेबाकी से उजागर किया। जेल के दिनों को याद करते हुए संदीपा ने भावुक होकर बताया कि तिहाड़ जेल के भीतर गुजारा गया हर एक दिन और हर एक सेकंड उनके लिए अत्यधिक मानसिक और शारीरिक स्ट्रगल से भरा था। उन्होंने कहा कि वहां की परिस्थितियां इतनी कठिन थीं कि वे हर दिन ईश्वर से केवल मौत की दुआ मांगती थीं। हालांकि, अब वह समय बीत चुका है, लेकिन उस दौर ने उनकी मानसिक स्थिति पर गहरा असर डाला है। जेल की इन यादों के अलावा उन्होंने अपने फिल्मी करियर के दौरान झेले गए शोषण पर भी विस्तार से बात की। फिल्म इंडस्ट्री में काम के बदले होने वाले शारीरिक और मानसिक शोषण यानी कास्टिंग काउच पर बात करते हुए संदीपा ने कहा कि इस उद्योग में सीधा अपराध या जबरदस्ती भले ही न दिखती हो, लेकिन परोक्ष रूप से दबाव बनाने की प्रथा बेहद आम है। उनके अनुसार, अलग-अलग फिल्म उद्योगों में अभिनेत्रियों को अप्रोच करने और उनसे अनुचित मांगें रखने का तरीका अलग होता है। जहां बॉलीवुड में ‘डिनर’ या ‘कॉफी’ के बहाने अनौपचारिक तौर पर बात शुरू की जाती है, जो देखने में सामान्य लगती है, वहीं क्षेत्रीय सिनेमा में यह दबाव अधिक सीधा और आक्रामक होता है। अपने साथ घटी एक अत्यंत विचलित करने वाली घटना का जिक्र करते हुए अभिनेत्री ने बताया कि एक पंजाबी फिल्म की सात दिनों की शूटिंग पूरी होने के बाद, फिल्म के निर्देशक आधी रात को जबरन उनके होटल के कमरे के भीतर दाखिल हो गए। निर्देशक ने उनके सामने सीधे तौर पर शारीरिक समझौता (कॉम्प्रोमाइज) करने की शर्त रख दी और कहा कि वे आगे की शूटिंग तभी करेंगे जब संदीपा उनकी मांग मान लेंगी। जब संदीपा ने पूरी दृढ़ता के साथ इस अनैतिक मांग को ठुकरा दिया, तो उन्हें तुरंत उस फिल्म से निष्कासित कर दिया गया। इस घटना के बाद भी संदीपा की मुश्किलें कम नहीं हुईं। उन्होंने बताया कि एक अन्य पंजाबी फिल्म की शूटिंग के दौरान फिल्म के मुख्य अभिनेता (हीरो) ने उनके साथ बेहद अभद्र व्यवहार किया। उस अभिनेता की यह अनुचित मांग थी कि संदीपा होटल में उसके बगल वाले कमरे में ही ठहरें, अन्यथा वह शूटिंग शुरू नहीं करेगा। इन लगातार हो रहे खराब अनुभवों और गरिमा से समझौता न करने की अपनी जिद के कारण संदीपा ने दोनों ही फिल्में बीच में ही छोड़ दी थीं। अपने इस पूरे अनुभव को साझा करते हुए संदीपा विर्क ने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह की विसंगतियां केवल फिल्म उद्योग तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि लगभग हर कार्यक्षेत्र और प्रोफेशन में महिलाओं को इस तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कास्टिंग काउच एक कड़वी हकीकत है, लेकिन अंततः यह हर महिला का अपना व्यक्तिगत फैसला होता है कि वह इसके आगे झुकती है या नहीं। उन्होंने इस व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाते हुए कहा कि योग्यता और काम को ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए, न कि काम के बदले किसी से अनुचित मांगें की जानी चाहिए।

शेयर बाजार आउटलुक 11 जुलाई जानिए किन फैक्टर्स से तय होगी अगले सप्ताह बाजार की दिशा

नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में कारोबार नहीं होगा क्योंकि बीएसई और एनएसई दोनों एक्सचेंज साप्ताहिक अवकाश के चलते बंद रहेंगे। हालांकि निवेशकों के लिए यह दिन अगले सप्ताह की रणनीति तैयार करने का अच्छा अवसर हो सकता है। बाजार भले ही बंद रहे लेकिन वैश्विक बाजारों की गतिविधियां कच्चे तेल की कीमतें डॉलर इंडेक्स विदेशी निवेशकों की खरीद बिक्री और कंपनियों के तिमाही नतीजे आने वाले कारोबारी सत्र की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। बीते कुछ कारोबारी सत्रों में भारतीय बाजार में उतार चढ़ाव देखने को मिला है। एक ओर घरेलू अर्थव्यवस्था के मजबूत संकेत निवेशकों का भरोसा बढ़ा रहे हैं तो दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम बाजार की चाल पर असर डाल रहे हैं। ऐसे में अगले सप्ताह निवेशकों की नजर सबसे पहले वैश्विक बाजारों से मिलने वाले संकेतों पर रहेगी। यदि अमेरिका और एशियाई बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं तो भारतीय बाजार में भी अच्छी शुरुआत देखने को मिल सकती है। आईटी बैंकिंग ऑटो और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों पर विशेष नजर बनी रहेगी। इन सेक्टरों की कई बड़ी कंपनियां तिमाही नतीजे जारी करने वाली हैं। यदि कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहते हैं तो संबंधित शेयरों में खरीदारी बढ़ सकती है। वहीं कमजोर नतीजों की स्थिति में मुनाफावसूली भी देखने को मिल सकती है। विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगी। यदि विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो बाजार को मजबूती मिल सकती है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में तेजी या गिरावट का असर भी भारतीय बाजार पर देखने को मिलेगा क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर काफी निर्भर है। विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े निवेश से बचना चाहिए और केवल मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों पर ही ध्यान देना चाहिए। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए बाजार में आने वाली गिरावट अच्छे शेयरों में निवेश का अवसर बन सकती है। वहीं छोटे निवेशकों को किसी भी अफवाह के आधार पर निवेश करने से बचना चाहिए और अपने पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखनी चाहिए। अगले कारोबारी सप्ताह में वैश्विक आर्थिक आंकड़े केंद्रीय बैंकों से जुड़े संकेत और कॉरपोरेट नतीजे बाजार की दिशा तय करेंगे। ऐसे में निवेशकों को धैर्य के साथ बाजार पर नजर रखने और सोच समझकर निवेश का फैसला लेने की सलाह दी जा रही है। सही रणनीति और मजबूत कंपनियों का चयन लंबे समय में बेहतर रिटर्न दिलाने में मददगार साबित हो सकता है।