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आस्था और तकनीक का बेजोड़ संगम: कहीं धड़कता है भगवान का दिल तो कहीं आता है साक्षात पसीना, जानें इन तीन रहस्यमयी मंदिरों की गाथा

नई दिल्ली । भारत के दक्षिणी राज्यों में स्थित प्राचीन मंदिर अपनी वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्ता के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं। लेकिन तमिलनाडु के तीन ऐसे विशिष्ट मंदिर भी हैं, जहाँ की मूर्तियां निर्जीव पत्थरों की होने के बावजूद इंसानों की तरह व्यवहार करती दिखाई देती हैं। इन विग्रहों में मानवीय धड़कन महसूस होने, भीषण गर्मी में साक्षात पसीना आने और चेहरे पर मूंछों के बाल प्राकृतिक रूप से बढ़ने के दावे किए जाते हैं। आधुनिक विज्ञान और शोधकर्ताओं के लिए यह चमत्कारी घटनाएं आज भी एक अबूझ पहेली बनी हुई हैं, जबकि श्रद्धालुओं के लिए यह ईश्वर की प्रत्यक्ष उपस्थिति का प्रमाण है। तमिलनाडु में स्थित चिदंबरम नटराज मंदिर भगवान शिव के सबसे पवित्र और प्रमुख धामों में से एक माना जाता है, जहाँ शिव जी नटराज स्वरूप में विराजमान हैं। इस मंदिर को लेकर वैज्ञानिक जगत और शोधकर्ताओं के बीच लंबे समय से अध्ययन जारी है। प्रामाणिक मान्यताओं के अनुसार यदि मंदिर की मुख्य विग्रह के हृदय वाले स्थान पर अत्यंत ध्यानपूर्वक महसूस किया जाए, तो वहाँ एक निरंतर धड़कन की ध्वनि सुनाई देती है। यह कंपन बिल्कुल किसी जीवित मनुष्य के हृदय की गति के समान प्रतीत होता है। विशेषज्ञों का एक वर्ग यह भी मानता है कि यह देवालय पृथ्वी के चुंबकीय केंद्र पर निर्मित है, जिससे यहाँ एक अत्यंत तीव्र और शक्तिशाली ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है। रहस्य की इस कड़ी में अगला नाम तिरुनेलवेली के थिरुमालीरुंचोलई मंदिर का आता है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है। इस पावन परिसर में ग्रीष्म ऋतु के दौरान एक अत्यंत विस्मयकारी दृश्य देखने को मिलता है। जब बाहरी वातावरण का तापमान अत्यधिक बढ़ जाता है, तब गर्भगृह के भीतर स्थापित भगवान विष्णु की पाषाण निर्मित मूर्ति को साक्षात पसीना आने लगता है। मूर्ति के मुखमंडल और शरीर पर स्वेद की छोटी-छोटी बूंदें स्पष्ट रूप से उभर आती हैं। इस अलौकिक दृश्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्रित होते हैं और मंदिर के सेवादार प्रतिदिन अत्यंत आदर भाव से सूती वस्त्र की सहायता से इस जल को पोंछते हैं। तीसरा चमत्कार कोयंबटूर के निकट स्थित पेरूर पट्टेश्वरर मंदिर से जुड़ा हुआ है, जो अपनी प्राचीन कलाकृति के साथ-साथ एक विशेष मूर्ति के लिए चर्चा में रहता है। मंदिर परिसर में स्थापित एक विशिष्ट विग्रह की मूंछों के बाल समय के साथ प्राकृतिक रूप से बड़े होते जाते हैं। स्थानीय परंपराओं और पीढ़ियों से सेवा कर रहे पुजारियों के अनुसार, एक निश्चित समयावधि के पश्चात इन बालों को तराशना पड़ता है। पाषाण खंड पर इस तरह से बालों का विकास होना विज्ञान के सभी स्थापित नियमों को चुनौती देता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण के अनुसार इन घटनाओं के पीछे पत्थरों की विशिष्ट प्रकृति, वातावरण की आर्द्रता, भौगोलिक स्थिति अथवा कोई अज्ञात भू-गर्भीय या रासायनिक प्रतिक्रिया उत्तरदायी हो सकती है। हालांकि, कड़े और नियंत्रित वातावरण के भीतर भी इन विसंगतियों का कोई ठोस वैज्ञानिक कारण अभी तक स्पष्ट नहीं किया जा सका है। हमारे पूर्वजों ने किस अदृश्य तकनीक और वैज्ञानिक चेतना के बल पर इन दिव्य संरचनाओं का निर्माण किया था, यह रहस्य आज भी इतिहास के गर्भ में छिपा हुआ है, लेकिन इन स्थलों के प्रति जनमानस की अगाध श्रद्धा निरंतर बनी हुई है।

भगवान भोलेनाथ की आराधना का विशेष दिन: प्रदोष व्रत और शिवरात्रि एक ही दिन होने से बना दुर्लभ संयोग, इन विशेष वस्तुओं के दान से चमकेगी किस्मत

नई दिल्ली । सनातन धर्म में आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी और चतुर्दशी तिथि का एक ही दिन पड़ना बेहद शुभ और फलदायी माना जा रहा है। इस वर्ष 12 जुलाई 2026 को भगवान शिव को समर्पित दो अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत, रवि प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि एक ही दिन पड़ रहे हैं। इस दुर्लभ संयोग के कारण शिव भक्तों में भारी उत्साह देखा जा रहा है और सुबह से ही देश भर के शिवालयों में पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। ज्योतिषविदों के अनुसार इस प्रकार के संयोग में की गई पूजा और दान का फल कई गुना बढ़कर प्राप्त होता है। धार्मिक गणना के अनुसार आषाढ़ कृष्ण त्रयोदशी तिथि के चलते प्रदोष व्रत का पालन किया जा रहा है। चूंकि आज रविवार का दिन है, इसलिए इसे रवि प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि रवि प्रदोष का व्रत रखने और प्रदोष काल में भगवान शिव व माता पार्वती की संयुक्त उपासना करने से जीवन के समस्त संकट दूर होते हैं और परिवार में सुख-शांति का वास होता है। आज प्रदोष काल में पूजा के लिए सबसे उत्तम समय शाम को 07:20 बजे से लेकर रात के 09:30 बजे तक निर्धारित किया गया है, जिसमें श्रद्धालु विशेष आरती और अर्घ्य आदि प्रदान कर सकते हैं। इसके साथ ही, संध्या काल के पश्चात चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ होने के कारण आज ही के दिन मासिक शिवरात्रि का व्रत भी रखा जा रहा है। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों में स्थित प्रमुख ज्योतिर्लिंगों और शिवालयों में इसके लिए विशेष तैयारियां की गई हैं। मासिक शिवरात्रि की मुख्य पूजा निशिता काल यानी मध्य रात्रि में संपन्न की जाती है। इस व्रत के लिए पूजा का शुभ मुहूर्त 13 जुलाई की रात को यानी आधी रात के समय 12:07 बजे से लेकर 12:47 बजे तक रहेगा, जहां शिव भक्त शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित कर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करेंगे। इस महासंयोग के अवसर पर दान-पुण्य करने का विशेष महत्व बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार आज के दिन अनाज जैसे चावल, गेहूं और दाल का दान करने से घर में कभी भी अन्न-धन की कमी नहीं होती है। भगवान भोलेनाथ को सफेद रंग अत्यधिक प्रिय है, इसलिए आज के दिन सफेद रंग की मिठाइयों का दान करने से आर्थिक उन्नति के मार्ग प्रशस्त होते हैं और इच्छित वरदान की प्राप्ति होती है। इसके अलावा सफेद वस्त्रों का दान करने से जातक को सौभाग्य की प्राप्ति होती है और स्वास्थ्य संबंधी सभी परेशानियां धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं। पर्यावरण और ग्रहों की शांति के दृष्टिकोण से आज के शुभ दिन पर पौधों का दान करना भी अत्यंत कल्याणकारी माना गया है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि रवि प्रदोष और मासिक शिवरात्रि के इस पावन अवसर पर छायादार या पूजनीय पौधों का दान करने से कुंडली के विभिन्न ग्रह दोष शांत होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस प्रकार श्रद्धापूर्वक व्रत रखने, उचित समय पर महादेव का अभिषेक करने और जरूरतमंदों को अपनी क्षमता के अनुसार दान देने से मनुष्य को मानसिक शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज पर नया विवाद गैरकानूनी स्क्रीनिंग्स के खिलाफ हाई कोर्ट पहुंचा मामला

नई दिल्ली । दिलजीत दोसांझ की बहुचर्चित फिल्म सतलुज एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। पहले ओटीटी प्लेटफॉर्म से फिल्म हटाए जाने को लेकर चर्चा हुई और अब इसकी कथित गैरकानूनी सार्वजनिक स्क्रीनिंग्स का मामला पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट तक पहुंच गया है। फिल्म को लेकर दायर नई याचिका ने पूरे घटनाक्रम को एक नया कानूनी मोड़ दे दिया है और अब सभी की नजर अदालत की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। फिल्म का नाम पहले पंजाब 95 था और लंबे समय तक विभिन्न कारणों से इसकी रिलीज टलती रही। आखिरकार यह फिल्म तीन जुलाई को ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर रिलीज हुई लेकिन महज दो दिन बाद ही इसे प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया। इसके बाद भी फिल्म की चर्चा थमी नहीं बल्कि कई स्थानों पर लोगों ने अपने स्तर पर इसकी सार्वजनिक स्क्रीनिंग शुरू कर दी। पंजाब के कई गांवों और शहरों में बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाकर सामूहिक रूप से फिल्म दिखाई जाने लगी। कुछ स्थानों पर गुरुद्वारों और खुले मैदानों में भी लोग एक साथ बैठकर फिल्म देखते नजर आए। राजस्थान से भी ऐसी स्क्रीनिंग्स की तस्वीरें सामने आईं जिनकी सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हुई। इसी बीच एडवोकेट विनीत जिंदल ने पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर कर इन सार्वजनिक स्क्रीनिंग्स पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि बिना वैध अनुमति फिल्म की स्क्रीनिंग कराना कानून का उल्लंघन है और इससे सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। उनका कहना है कि कुछ धार्मिक संगठनों और राजनीतिक समूहों की ओर से आयोजित की जा रही इन स्क्रीनिंग्स के कारण सामाजिक सौहार्द और कानून व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। याचिका में अदालत से मांग की गई है कि ऐसी सभी कथित गैरकानूनी स्क्रीनिंग्स पर तत्काल रोक लगाई जाए और आयोजन करने वाले लोगों तथा संस्थाओं के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। याचिकाकर्ता का तर्क है कि सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना फिल्म दिखाना उचित नहीं है और इससे भविष्य में गंभीर स्थिति भी पैदा हो सकती है। दूसरी ओर फिल्म के समर्थकों का कहना है कि ओटीटी से फिल्म हटाए जाने के बाद दर्शकों ने इसे देखने के लिए वैकल्पिक रास्ते तलाशे। कई जगह स्थानीय स्तर पर लोगों ने फिल्म डाउनलोड कर सामूहिक रूप से देखने की व्यवस्था की। इन आयोजनों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुईं और अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने भी इनमें से कुछ तस्वीरों को साझा किया था। फिल्म हटाए जाने के बाद दिलजीत दोसांझ का एक वीडियो भी सामने आया था जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें पहले से अंदेशा था कि फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटा दिया जाएगा। उनके अनुसार उन्हें उम्मीद थी कि फिल्म कुछ दिनों बाद हटेगी लेकिन यह अपेक्षा से पहले ही हटा दी गई। उन्होंने दर्शकों से फिल्म देखने की अपील भी की थी जिससे यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया। अब पूरा विवाद कानूनी दायरे में पहुंच चुका है। एक ओर फिल्म की सार्वजनिक स्क्रीनिंग्स को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और दर्शकों की पसंद से जोड़कर देखा जा रहा है तो दूसरी ओर बिना अनुमति सार्वजनिक प्रदर्शन को लेकर कानूनी सवाल उठाए जा रहे हैं। हाई कोर्ट में दायर इस याचिका पर आने वाला फैसला न केवल सतलुज बल्कि भविष्य में डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटाई गई फिल्मों की सार्वजनिक स्क्रीनिंग्स को लेकर भी महत्वपूर्ण मिसाल साबित हो सकता है।

गोल्डन दौर को किया याद हेमा मालिनी ने बताया क्यों नहीं कर रहीं फिल्मों में वापसी और क्या है इसकी सबसे बड़ी वजह

नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा की ड्रीम गर्ल के नाम से मशहूर हेमा मालिनी लंबे समय से बड़े पर्दे से दूर हैं। उनके प्रशंसक अक्सर यह सवाल करते रहे हैं कि आखिर वह नई फिल्मों में नजर क्यों नहीं आतीं। अब खुद हेमा मालिनी ने इस सवाल का जवाब देते हुए अपनी चुप्पी तोड़ी है और साफ कहा है कि आज की फिल्मों का स्वरूप उनके दौर से पूरी तरह बदल चुका है। यही सबसे बड़ी वजह है कि उन्होंने फिल्मों से दूरी बना रखी है। एक बातचीत के दौरान हेमा मालिनी ने अपने लंबे फिल्मी सफर को याद करते हुए कहा कि उन्हें उस दौर का हिस्सा बनने का सौभाग्य मिला जिसे हिंदी सिनेमा का स्वर्णिम काल कहा जाता है। उनके अनुसार उस समय बनने वाली फिल्मों में कहानी भावनाएं संगीत और अभिनय का अद्भुत संतुलन देखने को मिलता था। खास बात यह थी कि महिला प्रधान फिल्मों को भी बराबर महत्व दिया जाता था और अभिनेत्रियों को दमदार किरदार निभाने का अवसर मिलता था। उन्होंने बताया कि अपने करियर में उन्हें सीता और गीता सपनों का सौदागर खुशबू शोले ड्रीम गर्ल सत्ते पे सत्ता त्रिशूल क्रांति और बागबान जैसी यादगार फिल्मों में काम करने का अवसर मिला। पीछे मुड़कर देखने पर उन्हें एहसास होता है कि उन्होंने लगभग दो सौ फिल्मों में अभिनय किया और कई निर्माता निर्देशकों ने बार बार उन्हें अपनी फिल्मों का हिस्सा बनाया। उस दौर में फिल्मों के गीत भी सफलता की सबसे बड़ी पहचान होते थे और हर फिल्म में कई यादगार गाने दर्शकों के दिलों में बस जाते थे। हेमा मालिनी का कहना है कि समय के साथ फिल्म निर्माण की शैली पूरी तरह बदल गई है। आज की फिल्मों की सोच प्रस्तुति और कहानी कहने का तरीका पहले से काफी अलग हो चुका है। उन्होंने स्वीकार किया कि कई लोग उनसे पूछते हैं कि वह अब फिल्मों में काम क्यों नहीं करतीं लेकिन उन्हें लगता है कि वर्तमान दौर की फिल्मों में खुद को सहज रूप से ढाल पाना उनके लिए आसान नहीं है। यही कारण है कि उन्होंने नई फिल्मों से दूरी बनाए रखना बेहतर समझा। उन्होंने यह भी कहा कि हर दौर की अपनी अलग पहचान होती है और हर कलाकार उस दौर की जरूरतों के अनुसार काम करता है। उनका मानना है कि जिस तरह का सिनेमा उन्होंने अपने समय में किया वह आज भी दर्शकों के बीच पसंद किया जाता है और यही उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है। उनके अनुसार कलाकार के लिए यह संतोष की बात होती है कि वर्षों बाद भी उसके निभाए किरदार लोगों की यादों में जिंदा रहें। हेमा मालिनी ने अपने करियर की शुरुआत राज कपूर के साथ फिल्म सपनों का सौदागर से की थी। इसके बाद उन्होंने लगातार कई सफल फिल्मों में अभिनय कर खुद को हिंदी सिनेमा की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में शामिल कर लिया। अपनी खूबसूरती और अभिनय के दम पर उन्होंने करोड़ों दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई और ड्रीम गर्ल की पहचान हासिल की। उनकी आखिरी फिल्म शिमला मिर्ची थी जो वर्ष 2020 में रिलीज हुई थी। इसके बाद उन्होंने कोई नई फिल्म स्वीकार नहीं की। फिलहाल वह सक्रिय राजनीति में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रही हैं और सार्वजनिक जीवन के साथ परिवार को भी पूरा समय दे रही हैं। मुंबई में रहने के दौरान वह अपनी दोनों बेटियों और नाती नातिनों के साथ समय बिताना पसंद करती हैं। हालांकि फिल्मों से दूरी के बावजूद उनके प्रशंसकों के बीच उनका सम्मान और लोकप्रियता आज भी पहले जैसी ही बनी हुई है।

दीपिका संग दो साल के रिश्ते का दावा कर चर्चा में आए मुज्जमिल इब्राहिम बोले मैंने छोड़ा था रिश्ता अब वायरल हो रहा पुराना इंटरव्यू

नई दिल्ली । सोशल मीडिया पर इन दिनों अभिनेता मुज्जमिल इब्राहिम का एक पुराना इंटरव्यू तेजी से वायरल हो रहा है जिसने बॉलीवुड प्रेमियों के बीच नई बहस छेड़ दी है। इस इंटरव्यू में मुज्जमिल ने अभिनेत्री दीपिका पादुकोण को लेकर कई ऐसे दावे किए हैं जिनकी वजह से यह वीडियो फिर चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब वह और दीपिका करीब दो वर्षों तक रिलेशनशिप में रहे थे। उस वक्त दीपिका फिल्म इंडस्ट्री में स्थापित नाम नहीं थीं और मॉडलिंग की दुनिया में अपना करियर बना रही थीं जबकि वह खुद अभिनय के क्षेत्र में पहचान बना चुके थे। मुज्जमिल ने दावा किया कि मुंबई आने के बाद दीपिका सबसे पहले उन्हीं से मिली थीं और दोनों के बीच धीरे धीरे नजदीकियां बढ़ीं। उनके अनुसार दोनों का रिश्ता लगभग दो साल तक चला। उन्होंने यह भी कहा कि इस रिश्ते की शुरुआत दीपिका की ओर से हुई थी और प्रपोज भी उन्होंने ही किया था। हालांकि बाद में परिस्थितियां ऐसी बनीं कि रिश्ता आगे नहीं बढ़ सका और उन्होंने खुद इस संबंध को समाप्त करने का फैसला लिया। सबसे ज्यादा चर्चा उनके उस बयान की हो रही है जिसमें उन्होंने कहा कि उन्हें दीपिका से अलग होने का कभी अफसोस नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि जीवन में किसी भी रिश्ते को खत्म करने का पछतावा उन्हें नहीं है। उनका मानना है कि उस समय उन्होंने जो फैसला लिया वह सही था और आज भी वह उसी पर कायम हैं। इंटरव्यू में उन्होंने यह भी कहा कि उस दौर में वह अधिक लोकप्रिय थे जबकि दीपिका अभी अपने करियर की शुरुआती सीढ़ियां चढ़ रही थीं। बातचीत के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या ब्रेकअप के बाद भी दोनों के बीच संपर्क बना रहा तो उन्होंने बताया कि लंबे समय तक दोनों के बीच दोस्ताना रिश्ता कायम रहा। वह एक दूसरे की उपलब्धियों पर शुभकामनाएं देते थे और कभी कभी बातचीत भी हो जाती थी। उनके अनुसार रणवीर सिंह से दीपिका की शादी होने के बाद दोनों के बीच संपर्क पूरी तरह समाप्त हो गया। हालांकि इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि दीपिका पादुकोण ने कभी भी सार्वजनिक रूप से मुज्जमिल इब्राहिम के साथ किसी रिश्ते की पुष्टि नहीं की है। इसलिए उनके ये दावे पूरी तरह एकतरफा माने जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी कई लोग यही सवाल उठा रहे हैं कि इतने वर्षों बाद इस तरह के निजी दावों को सार्वजनिक करने की क्या जरूरत थी। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ यूजर्स का कहना है कि पुराने रिश्तों को लेकर इस तरह की बातें करना उचित नहीं है जबकि कई लोगों ने इसे केवल सुर्खियां बटोरने की कोशिश बताया। वहीं कुछ प्रशंसकों ने मजाकिया अंदाज में लिखा कि अच्छा हुआ दीपिका ने आगे बढ़कर अपनी जिंदगी में सही फैसला लिया। दूसरी ओर कुछ लोगों का मानना है कि यदि किसी रिश्ते की पुष्टि दोनों पक्षों ने नहीं की है तो ऐसे दावों को अंतिम सच नहीं माना जाना चाहिए। फिलहाल दीपिका पादुकोण अपनी निजी और पेशेवर जिंदगी में व्यस्त हैं। रणवीर सिंह के साथ उनकी जोड़ी बॉलीवुड की सबसे चर्चित जोड़ियों में गिनी जाती है। दूसरी ओर मुज्जमिल के पुराने इंटरव्यू का यह वीडियो एक बार फिर इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन गया है लेकिन इस पूरे विवाद पर दीपिका की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट छोड़िए ऐलोवेरा अपनाइए चेहरे पर आएगा प्राकृतिक निखार और त्वचा रहेगी लंबे समय तक स्वस्थ

नई दिल्ली। ऐलोवेरा को प्राकृतिक स्किन केयर का सबसे प्रभावी पौधा माना जाता है। सदियों से आयुर्वेद में इसका उपयोग त्वचा और बालों की देखभाल के लिए किया जाता रहा है। इसके अंदर मौजूद विटामिन ए विटामिन सी विटामिन ई एंटीऑक्सीडेंट और कई पोषक तत्व त्वचा को पोषण देने में सहायक माने जाते हैं। यही कारण है कि आज भी कई लोग महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट की बजाय ऐलोवेरा जेल का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं। यदि इसे सही तरीके और नियमित रूप से लगाया जाए तो त्वचा को प्राकृतिक निखार मिलने के साथ उसकी नमी भी लंबे समय तक बनी रह सकती है। ऐलोवेरा का सबसे बड़ा गुण यह माना जाता है कि यह त्वचा को गहराई से हाइड्रेट करने में मदद करता है। जिन लोगों की त्वचा रूखी रहती है उनके लिए यह एक प्राकृतिक मॉइस्चराइजर की तरह काम कर सकता है। वहीं तैलीय त्वचा वाले लोग भी इसका उपयोग कर सकते हैं क्योंकि यह त्वचा पर भारीपन महसूस नहीं होने देता। नियमित उपयोग से चेहरा ताजा और मुलायम दिखाई दे सकता है। गर्मियों के मौसम में धूप के कारण त्वचा पर जलन और टैनिंग की समस्या बढ़ जाती है। ऐसे समय में ऐलोवेरा जेल लगाने से ठंडक का एहसास मिलता है और त्वचा को आराम मिल सकता है। इसके अलावा मुंहासों से परेशान लोग भी ऐलोवेरा का उपयोग कर सकते हैं क्योंकि इसमें पाए जाने वाले कुछ प्राकृतिक गुण त्वचा को शांत रखने में सहायक माने जाते हैं। हालांकि यदि किसी को गंभीर त्वचा रोग या लगातार मुंहासों की समस्या हो तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना अधिक उचित रहता है। चेहरे पर ऐलोवेरा लगाने से पहले त्वचा को अच्छी तरह साफ कर लेना चाहिए। इसके बाद ताजा ऐलोवेरा जेल या विश्वसनीय उत्पाद का जेल हल्के हाथों से चेहरे पर लगाकर कुछ समय तक छोड़ दें। बाद में सामान्य पानी से चेहरा धो सकते हैं। कुछ लोग इसमें गुलाब जल या शहद मिलाकर भी फेस पैक तैयार करते हैं जिससे त्वचा को अतिरिक्त नमी और ताजगी मिल सकती है। यदि पहली बार ऐलोवेरा का उपयोग कर रहे हैं तो पहले त्वचा के एक छोटे हिस्से पर परीक्षण करना बेहतर माना जाता है ताकि किसी प्रकार की एलर्जी होने पर तुरंत पता चल सके। स्वस्थ और चमकदार त्वचा केवल बाहरी देखभाल से नहीं मिलती बल्कि संतुलित भोजन पर्याप्त पानी नियमित नींद और तनाव मुक्त जीवनशैली भी उतनी ही जरूरी होती है। ऐलोवेरा इन अच्छी आदतों के साथ त्वचा की देखभाल का एक उपयोगी हिस्सा बन सकता है। यदि इसे नियमित दिनचर्या में शामिल किया जाए और त्वचा की जरूरत के अनुसार इस्तेमाल किया जाए तो चेहरे की प्राकृतिक चमक को बनाए रखने में मदद मिल सकती है। ध्यान रखें कि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है इसलिए किसी भी घरेलू उपाय का असर सभी पर समान नहीं होता। यदि ऐलोवेरा लगाने के बाद जलन खुजली या लालिमा महसूस हो तो इसका उपयोग बंद कर देना चाहिए और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। सही देखभाल और संतुलित जीवनशैली के साथ ऐलोवेरा आपकी स्किन केयर रूटीन का एक प्रभावी और प्राकृतिक हिस्सा बन सकता है।

क्या अब स्पैम कॉल्स पर नहीं मिलेगी चेतावनी TRAI और Truecaller के विवाद से बदल सकता है कॉल पहचानने का तरीका

नई दिल्ली। देश में बढ़ती स्पैम कॉल्स और ऑनलाइन धोखाधड़ी को रोकने के लिए लगातार नए कदम उठाए जा रहे हैं लेकिन अब इसी मुद्दे पर दूरसंचार नियामक और कॉलर आईडी सेवा देने वाली कंपनियों के बीच बड़ा विवाद सामने आ गया है। मामला उन विशेष नंबर सीरीज का है जिनका इस्तेमाल बैंक कंपनियां और अन्य पंजीकृत संस्थाएं अपने ग्राहकों से संपर्क करने के लिए करती हैं। इस विवाद के केंद्र में यह सवाल है कि क्या कॉलर आईडी ऐप्स इन नंबरों को स्पैम बताकर यूजर्स को चेतावनी दे सकते हैं या नहीं। इस बहस का असर देश के करोड़ों मोबाइल उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। TRAI का मानना है कि 140 और 1600 सीरीज के नंबर आधिकारिक और पंजीकृत संस्थाओं के लिए निर्धारित किए गए हैं। 140 सीरीज का उपयोग मुख्य रूप से प्रमोशनल और टेलीमार्केटिंग कॉल्स के लिए किया जाता है जबकि 1600 सीरीज बैंकिंग ओटीपी ट्रांजैक्शन और अन्य आवश्यक सेवा संबंधी कॉल्स के लिए तय की गई है। नियामक का उद्देश्य यह है कि जब यूजर के पास इन सीरीज से कॉल आए तो वह आसानी से समझ सके कि कॉल किसी अधिकृत संस्था की ओर से की जा रही है। इसलिए इन नंबरों को सामान्य रूप से स्पैम की श्रेणी में दिखाना उचित नहीं माना जा रहा है। दूसरी ओर Truecaller और इसी तरह की अन्य कॉलर आईडी सेवाओं का तर्क अलग है। उनका कहना है कि यदि किसी नंबर को बड़ी संख्या में यूजर्स लगातार स्पैम के रूप में रिपोर्ट कर रहे हैं या उसे ब्लॉक कर रहे हैं तो उस जानकारी को छिपाना यूजर्स के हित में नहीं होगा। उनका दावा है कि करोड़ों लोग ऐसे ऐप्स पर इसलिए भरोसा करते हैं क्योंकि ये संभावित स्पैम और धोखाधड़ी वाली कॉल्स के बारे में पहले से चेतावनी देते हैं। यदि यह सुविधा सीमित कर दी गई तो साइबर ठग इसका फायदा उठाकर लोगों को आसानी से निशाना बना सकते हैं। दरअसल पिछले कुछ वर्षों में फर्जी बैंक अधिकारी बनकर कॉल करना ओटीपी मांगना निवेश के नाम पर ठगी करना और केवाईसी अपडेट कराने जैसे बहाने बनाकर साइबर अपराधियों ने लाखों लोगों को नुकसान पहुंचाया है। ऐसे में कॉलर आईडी ऐप्स की चेतावनी कई बार लोगों को सतर्क रहने में मदद करती है। वहीं TRAI का कहना है कि आधिकारिक नंबरों को स्पैम बताने से पंजीकृत संस्थाओं की वास्तविक सेवाओं पर भी असर पड़ सकता है और ग्राहकों तक जरूरी जानकारी समय पर नहीं पहुंच पाएगी। यदि भविष्य में कॉलर आईडी ऐप्स को 140 और 1600 सीरीज के नंबरों पर स्पैम चेतावनी दिखाने की अनुमति नहीं मिलती है तो यूजर्स को अधिक सतर्क रहने की जरूरत होगी। किसी भी कॉल पर व्यक्तिगत जानकारी बैंक विवरण ओटीपी या पासवर्ड साझा करने से पहले उसकी सत्यता की पुष्टि करना पहले से भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगा। विशेषज्ञ भी सलाह देते हैं कि केवल कॉल देखकर भरोसा करने के बजाय हमेशा संबंधित संस्था के आधिकारिक नंबर या वेबसाइट से जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए। फिलहाल इस पूरे मामले पर अंतिम निर्णय आना बाकी है लेकिन इतना तय है कि जो भी फैसला होगा उसका असर करोड़ों मोबाइल उपभोक्ताओं की सुरक्षा और स्पैम कॉल्स की पहचान करने के तरीके पर दिखाई देगा। ऐसे में यूजर्स को तकनीकी सुविधाओं के साथ अपनी सतर्कता भी बनाए रखनी होगी ताकि किसी भी तरह की साइबर ठगी से बचा जा सके।

PoK में बड़े विरोध प्रदर्शन से पहले पाकिस्तान अलर्ट, 4000 जवान और रेंजर्स की 7 विंग तैनात करने की तैयारी

नई दिल्ली। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में 15 जुलाई को प्रस्तावित बड़े विरोध प्रदर्शन और लॉन्ग मार्च से पहले पाकिस्तान समर्थित स्थानीय प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। संभावित अशांति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने केंद्र सरकार से अतिरिक्त सुरक्षा बलों की मांग की है। सीएनएन-न्यूज18 की रिपोर्ट के अनुसार, एक गोपनीय आधिकारिक दस्तावेज में PoK के गृह विभाग ने इस्लामाबाद से 4,000 अतिरिक्त जवानों और पाकिस्तान रेंजर्स की सात विंग्स की तत्काल तैनाती की मांग की है। यह मांग क्षेत्र में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों और तनावपूर्ण हालात को देखते हुए की गई है। यह कदम संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के प्रमुख नेता शौकत नवाज मीर और सैकड़ों अन्य कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के बाद बढ़े जन आक्रोश के बीच उठाया गया है। गोपनीय पत्र में सुरक्षा बलों की मांगरिपोर्ट के मुताबिक, PoK गृह विभाग की ओर से पाकिस्तान के गृह मंत्रालय के सचिव को 8 जुलाई को भेजे गए पत्र को ‘अति आवश्यक’ और ‘गोपनीय’ बताया गया है। इसमें कहा गया है कि JAAC की ओर से आयोजित लॉन्ग मार्च, विरोध प्रदर्शन और धरनों के कारण क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति गंभीर हो गई है। प्रशासन का कहना है कि मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था इस स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं है। अतिरिक्त बलों की तैनाती का उद्देश्य प्रदर्शनों के प्रभाव को नियंत्रित करना, प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखना और पहले से तैनात सुरक्षा कर्मियों पर दबाव कम करना बताया गया है। आधे जवान हथियारों से लैस, आधे को मिलेगा दंगा-रोधी उपकरणगोपनीय दस्तावेज के अनुसार, मांगी गई अतिरिक्त फोर्स PoK में पहले से मौजूद सुरक्षा बलों के अतिरिक्त होगी। प्रशासन ने मांग की है कि आने वाले सुरक्षा कर्मियों में 50 प्रतिशत जवान आधुनिक हथियारों और पर्याप्त गोला-बारूद से लैस हों, जबकि बाकी 50 प्रतिशत जवानों को दंगा-रोधी उपकरण उपलब्ध कराए जाएं। दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि यदि दंगा नियंत्रण उपकरणों की कमी हो तो तैनाती से पहले पाकिस्तान के केंद्रीय स्टॉक से इसकी व्यवस्था की जाए। JAAC पर लगाए गए हिंसा के आरोपPoK प्रशासन ने मौजूदा तनाव के लिए संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी को जिम्मेदार ठहराया है। प्रशासन का आरोप है कि पुंछ और रावलकोट में लगातार धरने और पड़ोसी जिलों में रैलियां आयोजित कर लोगों को उकसाया जा रहा है। प्रशासन ने यह दावा भी किया है कि प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े सशस्त्र लोग मुजफ्फराबाद और मीरपुर डिवीजनों में माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों और नागरिकों को निशाना बनाने तथा आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करने वाले ट्रकों को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं। PoK प्रशासन का दावा है कि हिंसा में अब तक चार सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई है और 174 अन्य घायल हुए हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। 15 जुलाई के मार्च से पहले बढ़ी चिंता15 जुलाई के प्रस्तावित बड़े मार्च से पहले इतनी बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की मांग को लेकर क्षेत्र में चिंता बढ़ गई है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने आशंका जताई है कि भारी सुरक्षा तैनाती के जरिए सरकार प्रदर्शनकारियों पर सख्त कार्रवाई कर सकती है। JAAC पिछले कुछ समय से PoK में जनता की मांगों और अधिकारों को लेकर सक्रिय संगठन के रूप में सामने आई है। समिति का आरोप है कि पाकिस्तान सरकार और स्थानीय प्रशासन बिजली की ऊंची कीमतों, आटे की कमी और बुनियादी अधिकारों से जुड़े मुद्दों का समाधान करने में विफल रहे हैं। संगठन का कहना है कि इन मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर बल प्रयोग किया जा रहा है।

बरसात में बालों की देखभाल के ये आसान उपाय बनाएंगे हेयर को मजबूत जानिए कैसे रोकें हेयर फॉल डैंड्रफ और स्कैल्प इंफेक्शन

नई दिल्ली। बरसात का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है वहीं यह बालों की सेहत के लिए कई नई चुनौतियां भी लेकर आता है। हवा में बढ़ी हुई नमी गंदा बारिश का पानी और पसीना मिलकर स्कैल्प को प्रभावित कर सकते हैं जिससे बाल झड़ने डैंड्रफ खुजली और फंगल संक्रमण जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। ऐसे मौसम में केवल शैंपू करना ही पर्याप्त नहीं होता बल्कि बालों की सही देखभाल और संतुलित दिनचर्या अपनाना भी जरूरी होता है। यदि समय रहते सही हेयर केयर रूटीन अपनाया जाए तो मानसून में भी बालों को स्वस्थ मजबूत और चमकदार बनाए रखा जा सकता है। बारिश में भीगने के बाद सबसे पहले बालों को साफ पानी से धोना चाहिए क्योंकि वर्षा के पानी में मौजूद धूल प्रदूषक तत्व और अन्य अशुद्धियां बालों और स्कैल्प को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसके बाद हल्के और सौम्य शैंपू से बालों की सफाई करें ताकि स्कैल्प पर जमा गंदगी पूरी तरह निकल जाए। गीले बालों को लंबे समय तक बांधकर रखना भी उचित नहीं माना जाता क्योंकि इससे फंगल संक्रमण और बदबू की समस्या बढ़ सकती है। बालों को प्राकृतिक रूप से सूखने दें या हल्के तौलिए से सुखाएं। बरसात के मौसम में बहुत अधिक तेल लगाने से भी बचना चाहिए क्योंकि नमी के कारण स्कैल्प पहले से ही चिपचिपा रहता है। यदि तेल लगाना हो तो हल्के हाथों से कम मात्रा में लगाएं और कुछ समय बाद बाल धो लें। सप्ताह में एक या दो बार नारियल तेल बादाम तेल या अन्य हल्के तेल से मसाज करने से बालों की जड़ों को पोषण मिल सकता है और रक्त संचार बेहतर होने में मदद मिलती है। मानसून के दौरान हेयर ड्रायर स्ट्रेटनर और अन्य हीट स्टाइलिंग उपकरणों का अधिक उपयोग करने से बाल रूखे और कमजोर हो सकते हैं। इसलिए जहां तक संभव हो बालों को प्राकृतिक तरीके से सूखने दें। इसके साथ ही गीले बालों में कंघी करने से बचें क्योंकि इस समय बाल अधिक कमजोर होते हैं और आसानी से टूट सकते हैं। चौड़े दांत वाली कंघी का इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है। स्वस्थ बालों के लिए केवल बाहरी देखभाल ही नहीं बल्कि संतुलित आहार भी बेहद महत्वपूर्ण है। भोजन में प्रोटीन आयरन जिंक बायोटिन और विटामिन से भरपूर चीजों को शामिल करें। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है ताकि शरीर और स्कैल्प दोनों हाइड्रेट रहें। ताजे फल हरी सब्जियां सूखे मेवे और अंकुरित अनाज बालों की मजबूती बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं। यदि डैंड्रफ खुजली अत्यधिक बाल झड़ना या स्कैल्प पर लालिमा जैसी समस्या लंबे समय तक बनी रहे तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय त्वचा या बालों के विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होता है। हर व्यक्ति के बालों की प्रकृति अलग होती है इसलिए किसी भी नए हेयर प्रोडक्ट का उपयोग करने से पहले उसकी उपयुक्तता पर ध्यान देना चाहिए। बरसात का मौसम बालों की अतिरिक्त देखभाल की मांग करता है। साफ सफाई सही खानपान नियमित हेयर वॉश और संतुलित हेयर केयर रूटीन अपनाकर आप मानसून में भी अपने बालों को मजबूत चमकदार और स्वस्थ बनाए रख सकते हैं। छोटी छोटी सावधानियां भविष्य में होने वाले बड़े हेयर डैमेज से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। English Tags:Monsoon Hair CareHair Care TipsHair Fall ControlHealthy HairScalp Careबरसात का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है वहीं यह बालों की सेहत के लिए कई नई चुनौतियां भी लेकर आता है। हवा में बढ़ी हुई नमी गंदा बारिश का पानी और पसीना मिलकर स्कैल्प को प्रभावित कर सकते हैं जिससे बाल झड़ने डैंड्रफ खुजली और फंगल संक्रमण जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। ऐसे मौसम में केवल शैंपू करना ही पर्याप्त नहीं होता बल्कि बालों की सही देखभाल और संतुलित दिनचर्या अपनाना भी जरूरी होता है। यदि समय रहते सही हेयर केयर रूटीन अपनाया जाए तो मानसून में भी बालों को स्वस्थ मजबूत और चमकदार बनाए रखा जा सकता है। बारिश में भीगने के बाद सबसे पहले बालों को साफ पानी से धोना चाहिए क्योंकि वर्षा के पानी में मौजूद धूल प्रदूषक तत्व और अन्य अशुद्धियां बालों और स्कैल्प को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसके बाद हल्के और सौम्य शैंपू से बालों की सफाई करें ताकि स्कैल्प पर जमा गंदगी पूरी तरह निकल जाए। गीले बालों को लंबे समय तक बांधकर रखना भी उचित नहीं माना जाता क्योंकि इससे फंगल संक्रमण और बदबू की समस्या बढ़ सकती है। बालों को प्राकृतिक रूप से सूखने दें या हल्के तौलिए से सुखाएं। बरसात के मौसम में बहुत अधिक तेल लगाने से भी बचना चाहिए क्योंकि नमी के कारण स्कैल्प पहले से ही चिपचिपा रहता है। यदि तेल लगाना हो तो हल्के हाथों से कम मात्रा में लगाएं और कुछ समय बाद बाल धो लें। सप्ताह में एक या दो बार नारियल तेल बादाम तेल या अन्य हल्के तेल से मसाज करने से बालों की जड़ों को पोषण मिल सकता है और रक्त संचार बेहतर होने में मदद मिलती है। मानसून के दौरान हेयर ड्रायर स्ट्रेटनर और अन्य हीट स्टाइलिंग उपकरणों का अधिक उपयोग करने से बाल रूखे और कमजोर हो सकते हैं। इसलिए जहां तक संभव हो बालों को प्राकृतिक तरीके से सूखने दें। इसके साथ ही गीले बालों में कंघी करने से बचें क्योंकि इस समय बाल अधिक कमजोर होते हैं और आसानी से टूट सकते हैं। चौड़े दांत वाली कंघी का इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है। स्वस्थ बालों के लिए केवल बाहरी देखभाल ही नहीं बल्कि संतुलित आहार भी बेहद महत्वपूर्ण है। भोजन में प्रोटीन आयरन जिंक बायोटिन और विटामिन से भरपूर चीजों को शामिल करें। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है ताकि शरीर और स्कैल्प दोनों हाइड्रेट रहें। ताजे फल हरी सब्जियां सूखे मेवे और अंकुरित अनाज बालों की मजबूती बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं। यदि डैंड्रफ खुजली अत्यधिक बाल झड़ना या स्कैल्प पर लालिमा जैसी समस्या लंबे समय तक बनी रहे तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय त्वचा या बालों के विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होता है। हर व्यक्ति के बालों की प्रकृति अलग होती है इसलिए किसी भी नए हेयर प्रोडक्ट का उपयोग करने से पहले उसकी उपयुक्तता पर ध्यान देना चाहिए। बरसात का मौसम

रविवार को इन वास्तु नियमों का करें पालन सूर्यदेव की कृपा से दूर होंगे वास्तु दोष और खुलेंगे तरक्की के नए रास्ते

नई दिल्ली। रविवार का दिन भगवान सूर्यदेव को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं और वास्तु शास्त्र के अनुसार इस दिन किए गए कुछ विशेष उपाय घर में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा और वास्तु दोष को कम करने में सहायक माने जाते हैं। सूर्यदेव को ऊर्जा प्रकाश और जीवन का आधार माना गया है इसलिए उनकी कृपा प्राप्त होने पर व्यक्ति के जीवन में आत्मविश्वास सम्मान स्वास्थ्य और सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है। यदि घर में लगातार आर्थिक तंगी पारिवारिक कलह मानसिक तनाव या कार्यों में बाधाएं आ रही हों तो रविवार के दिन कुछ सरल वास्तु उपाय अपनाना शुभ माना जाता है। रविवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद सबसे पहले भगवान सूर्य को तांबे के पात्र से जल अर्पित करें। जल में लाल पुष्प अक्षत और थोड़ा सा लाल चंदन डालना शुभ माना जाता है। सूर्य को अर्घ्य देने के बाद घर के मुख्य द्वार और आंगन की अच्छी तरह सफाई करें क्योंकि वास्तु शास्त्र के अनुसार स्वच्छता सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती है और नकारात्मक प्रभाव को दूर करती है। घर के मुख्य प्रवेश द्वार पर गंदगी या टूटे फूटे सामान का होना शुभ नहीं माना जाता इसलिए रविवार के दिन ऐसी वस्तुओं को हटाना लाभकारी माना जाता है। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार घर की पूर्व दिशा का विशेष महत्व होता है क्योंकि यह दिशा सूर्यदेव से जुड़ी मानी जाती है। इस दिशा को हमेशा साफ सुथरा और खुला रखना चाहिए। यदि यहां भारी सामान या कबाड़ रखा हो तो उसे हटाने का प्रयास करें। पूर्व दिशा में सुबह की धूप आने देना भी शुभ माना जाता है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और परिवार के सदस्यों का मन प्रसन्न रहता है। रविवार के दिन घर में गुड़ और गेहूं का दान करना भी शुभ माना गया है। जरूरतमंद लोगों को लाल वस्त्र या तांबे की वस्तु दान करने से सूर्यदेव की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है। इसके साथ ही घर में घी का दीपक जलाकर सूर्य मंत्र का जाप करने से मानसिक शांति और आत्मबल में वृद्धि होती है। यदि संभव हो तो रविवार के दिन आदित्य हृदय स्तोत्र या ॐ घृणि सूर्याय नमः मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इससे ग्रह दोषों का प्रभाव भी कम होता है। वास्तु शास्त्र यह भी कहता है कि घर में टूटी हुई घड़ी बंद इलेक्ट्रॉनिक सामान फटे हुए चित्र या बेकार वस्तुओं को लंबे समय तक नहीं रखना चाहिए क्योंकि ये नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ा सकते हैं। रविवार का दिन ऐसे अनुपयोगी सामान को हटाने के लिए भी उपयुक्त माना जाता है। इसके अलावा घर में प्राकृतिक रोशनी और ताजी हवा का प्रवेश बनाए रखना सकारात्मक वातावरण के लिए आवश्यक माना गया है। ध्यान रहे कि वास्तु उपाय धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित होते हैं। इनका उद्देश्य घर में स्वच्छता अनुशासन सकारात्मक सोच और संतुलित वातावरण बनाए रखने की प्रेरणा देना है। जब व्यक्ति नियमित रूप से सूर्यदेव की आराधना करता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने का प्रयास करता है तब जीवन में नई उम्मीद आत्मविश्वास और खुशहाली का अनुभव होने लगता है। इसलिए रविवार के दिन इन सरल उपायों को अपनाकर घर के वातावरण को अधिक सुखद और ऊर्जावान बनाया जा सकता है।