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दीपिका संग दो साल के रिश्ते का दावा कर चर्चा में आए मुज्जमिल इब्राहिम बोले मैंने छोड़ा था रिश्ता अब वायरल हो रहा पुराना इंटरव्यू

नई दिल्ली । सोशल मीडिया पर इन दिनों अभिनेता मुज्जमिल इब्राहिम का एक पुराना इंटरव्यू तेजी से वायरल हो रहा है जिसने बॉलीवुड प्रेमियों के बीच नई बहस छेड़ दी है। इस इंटरव्यू में मुज्जमिल ने अभिनेत्री दीपिका पादुकोण को लेकर कई ऐसे दावे किए हैं जिनकी वजह से यह वीडियो फिर चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब वह और दीपिका करीब दो वर्षों तक रिलेशनशिप में रहे थे। उस वक्त दीपिका फिल्म इंडस्ट्री में स्थापित नाम नहीं थीं और मॉडलिंग की दुनिया में अपना करियर बना रही थीं जबकि वह खुद अभिनय के क्षेत्र में पहचान बना चुके थे। मुज्जमिल ने दावा किया कि मुंबई आने के बाद दीपिका सबसे पहले उन्हीं से मिली थीं और दोनों के बीच धीरे धीरे नजदीकियां बढ़ीं। उनके अनुसार दोनों का रिश्ता लगभग दो साल तक चला। उन्होंने यह भी कहा कि इस रिश्ते की शुरुआत दीपिका की ओर से हुई थी और प्रपोज भी उन्होंने ही किया था। हालांकि बाद में परिस्थितियां ऐसी बनीं कि रिश्ता आगे नहीं बढ़ सका और उन्होंने खुद इस संबंध को समाप्त करने का फैसला लिया। सबसे ज्यादा चर्चा उनके उस बयान की हो रही है जिसमें उन्होंने कहा कि उन्हें दीपिका से अलग होने का कभी अफसोस नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि जीवन में किसी भी रिश्ते को खत्म करने का पछतावा उन्हें नहीं है। उनका मानना है कि उस समय उन्होंने जो फैसला लिया वह सही था और आज भी वह उसी पर कायम हैं। इंटरव्यू में उन्होंने यह भी कहा कि उस दौर में वह अधिक लोकप्रिय थे जबकि दीपिका अभी अपने करियर की शुरुआती सीढ़ियां चढ़ रही थीं। बातचीत के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या ब्रेकअप के बाद भी दोनों के बीच संपर्क बना रहा तो उन्होंने बताया कि लंबे समय तक दोनों के बीच दोस्ताना रिश्ता कायम रहा। वह एक दूसरे की उपलब्धियों पर शुभकामनाएं देते थे और कभी कभी बातचीत भी हो जाती थी। उनके अनुसार रणवीर सिंह से दीपिका की शादी होने के बाद दोनों के बीच संपर्क पूरी तरह समाप्त हो गया। हालांकि इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि दीपिका पादुकोण ने कभी भी सार्वजनिक रूप से मुज्जमिल इब्राहिम के साथ किसी रिश्ते की पुष्टि नहीं की है। इसलिए उनके ये दावे पूरी तरह एकतरफा माने जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी कई लोग यही सवाल उठा रहे हैं कि इतने वर्षों बाद इस तरह के निजी दावों को सार्वजनिक करने की क्या जरूरत थी। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ यूजर्स का कहना है कि पुराने रिश्तों को लेकर इस तरह की बातें करना उचित नहीं है जबकि कई लोगों ने इसे केवल सुर्खियां बटोरने की कोशिश बताया। वहीं कुछ प्रशंसकों ने मजाकिया अंदाज में लिखा कि अच्छा हुआ दीपिका ने आगे बढ़कर अपनी जिंदगी में सही फैसला लिया। दूसरी ओर कुछ लोगों का मानना है कि यदि किसी रिश्ते की पुष्टि दोनों पक्षों ने नहीं की है तो ऐसे दावों को अंतिम सच नहीं माना जाना चाहिए। फिलहाल दीपिका पादुकोण अपनी निजी और पेशेवर जिंदगी में व्यस्त हैं। रणवीर सिंह के साथ उनकी जोड़ी बॉलीवुड की सबसे चर्चित जोड़ियों में गिनी जाती है। दूसरी ओर मुज्जमिल के पुराने इंटरव्यू का यह वीडियो एक बार फिर इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन गया है लेकिन इस पूरे विवाद पर दीपिका की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट छोड़िए ऐलोवेरा अपनाइए चेहरे पर आएगा प्राकृतिक निखार और त्वचा रहेगी लंबे समय तक स्वस्थ

नई दिल्ली। ऐलोवेरा को प्राकृतिक स्किन केयर का सबसे प्रभावी पौधा माना जाता है। सदियों से आयुर्वेद में इसका उपयोग त्वचा और बालों की देखभाल के लिए किया जाता रहा है। इसके अंदर मौजूद विटामिन ए विटामिन सी विटामिन ई एंटीऑक्सीडेंट और कई पोषक तत्व त्वचा को पोषण देने में सहायक माने जाते हैं। यही कारण है कि आज भी कई लोग महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट की बजाय ऐलोवेरा जेल का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं। यदि इसे सही तरीके और नियमित रूप से लगाया जाए तो त्वचा को प्राकृतिक निखार मिलने के साथ उसकी नमी भी लंबे समय तक बनी रह सकती है। ऐलोवेरा का सबसे बड़ा गुण यह माना जाता है कि यह त्वचा को गहराई से हाइड्रेट करने में मदद करता है। जिन लोगों की त्वचा रूखी रहती है उनके लिए यह एक प्राकृतिक मॉइस्चराइजर की तरह काम कर सकता है। वहीं तैलीय त्वचा वाले लोग भी इसका उपयोग कर सकते हैं क्योंकि यह त्वचा पर भारीपन महसूस नहीं होने देता। नियमित उपयोग से चेहरा ताजा और मुलायम दिखाई दे सकता है। गर्मियों के मौसम में धूप के कारण त्वचा पर जलन और टैनिंग की समस्या बढ़ जाती है। ऐसे समय में ऐलोवेरा जेल लगाने से ठंडक का एहसास मिलता है और त्वचा को आराम मिल सकता है। इसके अलावा मुंहासों से परेशान लोग भी ऐलोवेरा का उपयोग कर सकते हैं क्योंकि इसमें पाए जाने वाले कुछ प्राकृतिक गुण त्वचा को शांत रखने में सहायक माने जाते हैं। हालांकि यदि किसी को गंभीर त्वचा रोग या लगातार मुंहासों की समस्या हो तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना अधिक उचित रहता है। चेहरे पर ऐलोवेरा लगाने से पहले त्वचा को अच्छी तरह साफ कर लेना चाहिए। इसके बाद ताजा ऐलोवेरा जेल या विश्वसनीय उत्पाद का जेल हल्के हाथों से चेहरे पर लगाकर कुछ समय तक छोड़ दें। बाद में सामान्य पानी से चेहरा धो सकते हैं। कुछ लोग इसमें गुलाब जल या शहद मिलाकर भी फेस पैक तैयार करते हैं जिससे त्वचा को अतिरिक्त नमी और ताजगी मिल सकती है। यदि पहली बार ऐलोवेरा का उपयोग कर रहे हैं तो पहले त्वचा के एक छोटे हिस्से पर परीक्षण करना बेहतर माना जाता है ताकि किसी प्रकार की एलर्जी होने पर तुरंत पता चल सके। स्वस्थ और चमकदार त्वचा केवल बाहरी देखभाल से नहीं मिलती बल्कि संतुलित भोजन पर्याप्त पानी नियमित नींद और तनाव मुक्त जीवनशैली भी उतनी ही जरूरी होती है। ऐलोवेरा इन अच्छी आदतों के साथ त्वचा की देखभाल का एक उपयोगी हिस्सा बन सकता है। यदि इसे नियमित दिनचर्या में शामिल किया जाए और त्वचा की जरूरत के अनुसार इस्तेमाल किया जाए तो चेहरे की प्राकृतिक चमक को बनाए रखने में मदद मिल सकती है। ध्यान रखें कि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है इसलिए किसी भी घरेलू उपाय का असर सभी पर समान नहीं होता। यदि ऐलोवेरा लगाने के बाद जलन खुजली या लालिमा महसूस हो तो इसका उपयोग बंद कर देना चाहिए और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। सही देखभाल और संतुलित जीवनशैली के साथ ऐलोवेरा आपकी स्किन केयर रूटीन का एक प्रभावी और प्राकृतिक हिस्सा बन सकता है।

क्या अब स्पैम कॉल्स पर नहीं मिलेगी चेतावनी TRAI और Truecaller के विवाद से बदल सकता है कॉल पहचानने का तरीका

नई दिल्ली। देश में बढ़ती स्पैम कॉल्स और ऑनलाइन धोखाधड़ी को रोकने के लिए लगातार नए कदम उठाए जा रहे हैं लेकिन अब इसी मुद्दे पर दूरसंचार नियामक और कॉलर आईडी सेवा देने वाली कंपनियों के बीच बड़ा विवाद सामने आ गया है। मामला उन विशेष नंबर सीरीज का है जिनका इस्तेमाल बैंक कंपनियां और अन्य पंजीकृत संस्थाएं अपने ग्राहकों से संपर्क करने के लिए करती हैं। इस विवाद के केंद्र में यह सवाल है कि क्या कॉलर आईडी ऐप्स इन नंबरों को स्पैम बताकर यूजर्स को चेतावनी दे सकते हैं या नहीं। इस बहस का असर देश के करोड़ों मोबाइल उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। TRAI का मानना है कि 140 और 1600 सीरीज के नंबर आधिकारिक और पंजीकृत संस्थाओं के लिए निर्धारित किए गए हैं। 140 सीरीज का उपयोग मुख्य रूप से प्रमोशनल और टेलीमार्केटिंग कॉल्स के लिए किया जाता है जबकि 1600 सीरीज बैंकिंग ओटीपी ट्रांजैक्शन और अन्य आवश्यक सेवा संबंधी कॉल्स के लिए तय की गई है। नियामक का उद्देश्य यह है कि जब यूजर के पास इन सीरीज से कॉल आए तो वह आसानी से समझ सके कि कॉल किसी अधिकृत संस्था की ओर से की जा रही है। इसलिए इन नंबरों को सामान्य रूप से स्पैम की श्रेणी में दिखाना उचित नहीं माना जा रहा है। दूसरी ओर Truecaller और इसी तरह की अन्य कॉलर आईडी सेवाओं का तर्क अलग है। उनका कहना है कि यदि किसी नंबर को बड़ी संख्या में यूजर्स लगातार स्पैम के रूप में रिपोर्ट कर रहे हैं या उसे ब्लॉक कर रहे हैं तो उस जानकारी को छिपाना यूजर्स के हित में नहीं होगा। उनका दावा है कि करोड़ों लोग ऐसे ऐप्स पर इसलिए भरोसा करते हैं क्योंकि ये संभावित स्पैम और धोखाधड़ी वाली कॉल्स के बारे में पहले से चेतावनी देते हैं। यदि यह सुविधा सीमित कर दी गई तो साइबर ठग इसका फायदा उठाकर लोगों को आसानी से निशाना बना सकते हैं। दरअसल पिछले कुछ वर्षों में फर्जी बैंक अधिकारी बनकर कॉल करना ओटीपी मांगना निवेश के नाम पर ठगी करना और केवाईसी अपडेट कराने जैसे बहाने बनाकर साइबर अपराधियों ने लाखों लोगों को नुकसान पहुंचाया है। ऐसे में कॉलर आईडी ऐप्स की चेतावनी कई बार लोगों को सतर्क रहने में मदद करती है। वहीं TRAI का कहना है कि आधिकारिक नंबरों को स्पैम बताने से पंजीकृत संस्थाओं की वास्तविक सेवाओं पर भी असर पड़ सकता है और ग्राहकों तक जरूरी जानकारी समय पर नहीं पहुंच पाएगी। यदि भविष्य में कॉलर आईडी ऐप्स को 140 और 1600 सीरीज के नंबरों पर स्पैम चेतावनी दिखाने की अनुमति नहीं मिलती है तो यूजर्स को अधिक सतर्क रहने की जरूरत होगी। किसी भी कॉल पर व्यक्तिगत जानकारी बैंक विवरण ओटीपी या पासवर्ड साझा करने से पहले उसकी सत्यता की पुष्टि करना पहले से भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगा। विशेषज्ञ भी सलाह देते हैं कि केवल कॉल देखकर भरोसा करने के बजाय हमेशा संबंधित संस्था के आधिकारिक नंबर या वेबसाइट से जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए। फिलहाल इस पूरे मामले पर अंतिम निर्णय आना बाकी है लेकिन इतना तय है कि जो भी फैसला होगा उसका असर करोड़ों मोबाइल उपभोक्ताओं की सुरक्षा और स्पैम कॉल्स की पहचान करने के तरीके पर दिखाई देगा। ऐसे में यूजर्स को तकनीकी सुविधाओं के साथ अपनी सतर्कता भी बनाए रखनी होगी ताकि किसी भी तरह की साइबर ठगी से बचा जा सके।

PoK में बड़े विरोध प्रदर्शन से पहले पाकिस्तान अलर्ट, 4000 जवान और रेंजर्स की 7 विंग तैनात करने की तैयारी

नई दिल्ली। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में 15 जुलाई को प्रस्तावित बड़े विरोध प्रदर्शन और लॉन्ग मार्च से पहले पाकिस्तान समर्थित स्थानीय प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। संभावित अशांति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने केंद्र सरकार से अतिरिक्त सुरक्षा बलों की मांग की है। सीएनएन-न्यूज18 की रिपोर्ट के अनुसार, एक गोपनीय आधिकारिक दस्तावेज में PoK के गृह विभाग ने इस्लामाबाद से 4,000 अतिरिक्त जवानों और पाकिस्तान रेंजर्स की सात विंग्स की तत्काल तैनाती की मांग की है। यह मांग क्षेत्र में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों और तनावपूर्ण हालात को देखते हुए की गई है। यह कदम संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के प्रमुख नेता शौकत नवाज मीर और सैकड़ों अन्य कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के बाद बढ़े जन आक्रोश के बीच उठाया गया है। गोपनीय पत्र में सुरक्षा बलों की मांगरिपोर्ट के मुताबिक, PoK गृह विभाग की ओर से पाकिस्तान के गृह मंत्रालय के सचिव को 8 जुलाई को भेजे गए पत्र को ‘अति आवश्यक’ और ‘गोपनीय’ बताया गया है। इसमें कहा गया है कि JAAC की ओर से आयोजित लॉन्ग मार्च, विरोध प्रदर्शन और धरनों के कारण क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति गंभीर हो गई है। प्रशासन का कहना है कि मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था इस स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं है। अतिरिक्त बलों की तैनाती का उद्देश्य प्रदर्शनों के प्रभाव को नियंत्रित करना, प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखना और पहले से तैनात सुरक्षा कर्मियों पर दबाव कम करना बताया गया है। आधे जवान हथियारों से लैस, आधे को मिलेगा दंगा-रोधी उपकरणगोपनीय दस्तावेज के अनुसार, मांगी गई अतिरिक्त फोर्स PoK में पहले से मौजूद सुरक्षा बलों के अतिरिक्त होगी। प्रशासन ने मांग की है कि आने वाले सुरक्षा कर्मियों में 50 प्रतिशत जवान आधुनिक हथियारों और पर्याप्त गोला-बारूद से लैस हों, जबकि बाकी 50 प्रतिशत जवानों को दंगा-रोधी उपकरण उपलब्ध कराए जाएं। दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि यदि दंगा नियंत्रण उपकरणों की कमी हो तो तैनाती से पहले पाकिस्तान के केंद्रीय स्टॉक से इसकी व्यवस्था की जाए। JAAC पर लगाए गए हिंसा के आरोपPoK प्रशासन ने मौजूदा तनाव के लिए संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी को जिम्मेदार ठहराया है। प्रशासन का आरोप है कि पुंछ और रावलकोट में लगातार धरने और पड़ोसी जिलों में रैलियां आयोजित कर लोगों को उकसाया जा रहा है। प्रशासन ने यह दावा भी किया है कि प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े सशस्त्र लोग मुजफ्फराबाद और मीरपुर डिवीजनों में माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों और नागरिकों को निशाना बनाने तथा आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करने वाले ट्रकों को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं। PoK प्रशासन का दावा है कि हिंसा में अब तक चार सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई है और 174 अन्य घायल हुए हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। 15 जुलाई के मार्च से पहले बढ़ी चिंता15 जुलाई के प्रस्तावित बड़े मार्च से पहले इतनी बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की मांग को लेकर क्षेत्र में चिंता बढ़ गई है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने आशंका जताई है कि भारी सुरक्षा तैनाती के जरिए सरकार प्रदर्शनकारियों पर सख्त कार्रवाई कर सकती है। JAAC पिछले कुछ समय से PoK में जनता की मांगों और अधिकारों को लेकर सक्रिय संगठन के रूप में सामने आई है। समिति का आरोप है कि पाकिस्तान सरकार और स्थानीय प्रशासन बिजली की ऊंची कीमतों, आटे की कमी और बुनियादी अधिकारों से जुड़े मुद्दों का समाधान करने में विफल रहे हैं। संगठन का कहना है कि इन मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर बल प्रयोग किया जा रहा है।

बरसात में बालों की देखभाल के ये आसान उपाय बनाएंगे हेयर को मजबूत जानिए कैसे रोकें हेयर फॉल डैंड्रफ और स्कैल्प इंफेक्शन

नई दिल्ली। बरसात का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है वहीं यह बालों की सेहत के लिए कई नई चुनौतियां भी लेकर आता है। हवा में बढ़ी हुई नमी गंदा बारिश का पानी और पसीना मिलकर स्कैल्प को प्रभावित कर सकते हैं जिससे बाल झड़ने डैंड्रफ खुजली और फंगल संक्रमण जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। ऐसे मौसम में केवल शैंपू करना ही पर्याप्त नहीं होता बल्कि बालों की सही देखभाल और संतुलित दिनचर्या अपनाना भी जरूरी होता है। यदि समय रहते सही हेयर केयर रूटीन अपनाया जाए तो मानसून में भी बालों को स्वस्थ मजबूत और चमकदार बनाए रखा जा सकता है। बारिश में भीगने के बाद सबसे पहले बालों को साफ पानी से धोना चाहिए क्योंकि वर्षा के पानी में मौजूद धूल प्रदूषक तत्व और अन्य अशुद्धियां बालों और स्कैल्प को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसके बाद हल्के और सौम्य शैंपू से बालों की सफाई करें ताकि स्कैल्प पर जमा गंदगी पूरी तरह निकल जाए। गीले बालों को लंबे समय तक बांधकर रखना भी उचित नहीं माना जाता क्योंकि इससे फंगल संक्रमण और बदबू की समस्या बढ़ सकती है। बालों को प्राकृतिक रूप से सूखने दें या हल्के तौलिए से सुखाएं। बरसात के मौसम में बहुत अधिक तेल लगाने से भी बचना चाहिए क्योंकि नमी के कारण स्कैल्प पहले से ही चिपचिपा रहता है। यदि तेल लगाना हो तो हल्के हाथों से कम मात्रा में लगाएं और कुछ समय बाद बाल धो लें। सप्ताह में एक या दो बार नारियल तेल बादाम तेल या अन्य हल्के तेल से मसाज करने से बालों की जड़ों को पोषण मिल सकता है और रक्त संचार बेहतर होने में मदद मिलती है। मानसून के दौरान हेयर ड्रायर स्ट्रेटनर और अन्य हीट स्टाइलिंग उपकरणों का अधिक उपयोग करने से बाल रूखे और कमजोर हो सकते हैं। इसलिए जहां तक संभव हो बालों को प्राकृतिक तरीके से सूखने दें। इसके साथ ही गीले बालों में कंघी करने से बचें क्योंकि इस समय बाल अधिक कमजोर होते हैं और आसानी से टूट सकते हैं। चौड़े दांत वाली कंघी का इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है। स्वस्थ बालों के लिए केवल बाहरी देखभाल ही नहीं बल्कि संतुलित आहार भी बेहद महत्वपूर्ण है। भोजन में प्रोटीन आयरन जिंक बायोटिन और विटामिन से भरपूर चीजों को शामिल करें। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है ताकि शरीर और स्कैल्प दोनों हाइड्रेट रहें। ताजे फल हरी सब्जियां सूखे मेवे और अंकुरित अनाज बालों की मजबूती बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं। यदि डैंड्रफ खुजली अत्यधिक बाल झड़ना या स्कैल्प पर लालिमा जैसी समस्या लंबे समय तक बनी रहे तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय त्वचा या बालों के विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होता है। हर व्यक्ति के बालों की प्रकृति अलग होती है इसलिए किसी भी नए हेयर प्रोडक्ट का उपयोग करने से पहले उसकी उपयुक्तता पर ध्यान देना चाहिए। बरसात का मौसम बालों की अतिरिक्त देखभाल की मांग करता है। साफ सफाई सही खानपान नियमित हेयर वॉश और संतुलित हेयर केयर रूटीन अपनाकर आप मानसून में भी अपने बालों को मजबूत चमकदार और स्वस्थ बनाए रख सकते हैं। छोटी छोटी सावधानियां भविष्य में होने वाले बड़े हेयर डैमेज से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। English Tags:Monsoon Hair CareHair Care TipsHair Fall ControlHealthy HairScalp Careबरसात का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है वहीं यह बालों की सेहत के लिए कई नई चुनौतियां भी लेकर आता है। हवा में बढ़ी हुई नमी गंदा बारिश का पानी और पसीना मिलकर स्कैल्प को प्रभावित कर सकते हैं जिससे बाल झड़ने डैंड्रफ खुजली और फंगल संक्रमण जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। ऐसे मौसम में केवल शैंपू करना ही पर्याप्त नहीं होता बल्कि बालों की सही देखभाल और संतुलित दिनचर्या अपनाना भी जरूरी होता है। यदि समय रहते सही हेयर केयर रूटीन अपनाया जाए तो मानसून में भी बालों को स्वस्थ मजबूत और चमकदार बनाए रखा जा सकता है। बारिश में भीगने के बाद सबसे पहले बालों को साफ पानी से धोना चाहिए क्योंकि वर्षा के पानी में मौजूद धूल प्रदूषक तत्व और अन्य अशुद्धियां बालों और स्कैल्प को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसके बाद हल्के और सौम्य शैंपू से बालों की सफाई करें ताकि स्कैल्प पर जमा गंदगी पूरी तरह निकल जाए। गीले बालों को लंबे समय तक बांधकर रखना भी उचित नहीं माना जाता क्योंकि इससे फंगल संक्रमण और बदबू की समस्या बढ़ सकती है। बालों को प्राकृतिक रूप से सूखने दें या हल्के तौलिए से सुखाएं। बरसात के मौसम में बहुत अधिक तेल लगाने से भी बचना चाहिए क्योंकि नमी के कारण स्कैल्प पहले से ही चिपचिपा रहता है। यदि तेल लगाना हो तो हल्के हाथों से कम मात्रा में लगाएं और कुछ समय बाद बाल धो लें। सप्ताह में एक या दो बार नारियल तेल बादाम तेल या अन्य हल्के तेल से मसाज करने से बालों की जड़ों को पोषण मिल सकता है और रक्त संचार बेहतर होने में मदद मिलती है। मानसून के दौरान हेयर ड्रायर स्ट्रेटनर और अन्य हीट स्टाइलिंग उपकरणों का अधिक उपयोग करने से बाल रूखे और कमजोर हो सकते हैं। इसलिए जहां तक संभव हो बालों को प्राकृतिक तरीके से सूखने दें। इसके साथ ही गीले बालों में कंघी करने से बचें क्योंकि इस समय बाल अधिक कमजोर होते हैं और आसानी से टूट सकते हैं। चौड़े दांत वाली कंघी का इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है। स्वस्थ बालों के लिए केवल बाहरी देखभाल ही नहीं बल्कि संतुलित आहार भी बेहद महत्वपूर्ण है। भोजन में प्रोटीन आयरन जिंक बायोटिन और विटामिन से भरपूर चीजों को शामिल करें। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है ताकि शरीर और स्कैल्प दोनों हाइड्रेट रहें। ताजे फल हरी सब्जियां सूखे मेवे और अंकुरित अनाज बालों की मजबूती बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं। यदि डैंड्रफ खुजली अत्यधिक बाल झड़ना या स्कैल्प पर लालिमा जैसी समस्या लंबे समय तक बनी रहे तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय त्वचा या बालों के विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होता है। हर व्यक्ति के बालों की प्रकृति अलग होती है इसलिए किसी भी नए हेयर प्रोडक्ट का उपयोग करने से पहले उसकी उपयुक्तता पर ध्यान देना चाहिए। बरसात का मौसम

रविवार को इन वास्तु नियमों का करें पालन सूर्यदेव की कृपा से दूर होंगे वास्तु दोष और खुलेंगे तरक्की के नए रास्ते

नई दिल्ली। रविवार का दिन भगवान सूर्यदेव को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं और वास्तु शास्त्र के अनुसार इस दिन किए गए कुछ विशेष उपाय घर में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा और वास्तु दोष को कम करने में सहायक माने जाते हैं। सूर्यदेव को ऊर्जा प्रकाश और जीवन का आधार माना गया है इसलिए उनकी कृपा प्राप्त होने पर व्यक्ति के जीवन में आत्मविश्वास सम्मान स्वास्थ्य और सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है। यदि घर में लगातार आर्थिक तंगी पारिवारिक कलह मानसिक तनाव या कार्यों में बाधाएं आ रही हों तो रविवार के दिन कुछ सरल वास्तु उपाय अपनाना शुभ माना जाता है। रविवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद सबसे पहले भगवान सूर्य को तांबे के पात्र से जल अर्पित करें। जल में लाल पुष्प अक्षत और थोड़ा सा लाल चंदन डालना शुभ माना जाता है। सूर्य को अर्घ्य देने के बाद घर के मुख्य द्वार और आंगन की अच्छी तरह सफाई करें क्योंकि वास्तु शास्त्र के अनुसार स्वच्छता सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती है और नकारात्मक प्रभाव को दूर करती है। घर के मुख्य प्रवेश द्वार पर गंदगी या टूटे फूटे सामान का होना शुभ नहीं माना जाता इसलिए रविवार के दिन ऐसी वस्तुओं को हटाना लाभकारी माना जाता है। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार घर की पूर्व दिशा का विशेष महत्व होता है क्योंकि यह दिशा सूर्यदेव से जुड़ी मानी जाती है। इस दिशा को हमेशा साफ सुथरा और खुला रखना चाहिए। यदि यहां भारी सामान या कबाड़ रखा हो तो उसे हटाने का प्रयास करें। पूर्व दिशा में सुबह की धूप आने देना भी शुभ माना जाता है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और परिवार के सदस्यों का मन प्रसन्न रहता है। रविवार के दिन घर में गुड़ और गेहूं का दान करना भी शुभ माना गया है। जरूरतमंद लोगों को लाल वस्त्र या तांबे की वस्तु दान करने से सूर्यदेव की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है। इसके साथ ही घर में घी का दीपक जलाकर सूर्य मंत्र का जाप करने से मानसिक शांति और आत्मबल में वृद्धि होती है। यदि संभव हो तो रविवार के दिन आदित्य हृदय स्तोत्र या ॐ घृणि सूर्याय नमः मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इससे ग्रह दोषों का प्रभाव भी कम होता है। वास्तु शास्त्र यह भी कहता है कि घर में टूटी हुई घड़ी बंद इलेक्ट्रॉनिक सामान फटे हुए चित्र या बेकार वस्तुओं को लंबे समय तक नहीं रखना चाहिए क्योंकि ये नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ा सकते हैं। रविवार का दिन ऐसे अनुपयोगी सामान को हटाने के लिए भी उपयुक्त माना जाता है। इसके अलावा घर में प्राकृतिक रोशनी और ताजी हवा का प्रवेश बनाए रखना सकारात्मक वातावरण के लिए आवश्यक माना गया है। ध्यान रहे कि वास्तु उपाय धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित होते हैं। इनका उद्देश्य घर में स्वच्छता अनुशासन सकारात्मक सोच और संतुलित वातावरण बनाए रखने की प्रेरणा देना है। जब व्यक्ति नियमित रूप से सूर्यदेव की आराधना करता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने का प्रयास करता है तब जीवन में नई उम्मीद आत्मविश्वास और खुशहाली का अनुभव होने लगता है। इसलिए रविवार के दिन इन सरल उपायों को अपनाकर घर के वातावरण को अधिक सुखद और ऊर्जावान बनाया जा सकता है।

बारिश के मौसम में बढ़ जाता है पेट की बीमारियों का खतरा, इन आसान उपायों से रखें डाइजेशन बेहतर और शरीर फिट

नई दिल्ली । मानसून का मौसम गर्मी से राहत तो देता है, लेकिन इसके साथ पाचन तंत्र से जुड़ी कई स्वास्थ्य चुनौतियां भी लेकर आता है। वातावरण में बढ़ी नमी के कारण बैक्टीरिया और वायरस तेजी से पनप सकते हैं, जिससे फूड पॉइजनिंग, गैस, अपच, दस्त, पेट दर्द और एसिडिटी जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे समय में खानपान और व्यक्तिगत स्वच्छता पर विशेष ध्यान देकर इन जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश के मौसम में हमेशा ताजा और गर्म भोजन को प्राथमिकता देनी चाहिए। लंबे समय तक खुले में रखा हुआ या बासी भोजन बैक्टीरिया की वृद्धि का कारण बन सकता है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। बाहर मिलने वाले खुले खाद्य पदार्थ, पहले से कटे फल और बिना ढके रखे भोजन से बचना बेहतर माना जाता है। घर पर ताजा तैयार किया गया भोजन पाचन तंत्र के लिए अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित होता है। मानसून में सुरक्षित पेयजल का सेवन भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। दूषित पानी पेट संबंधी संक्रमण का प्रमुख कारण बन सकता है। इसलिए फिल्टर किया हुआ या अच्छी तरह उबाला गया पानी पीने की सलाह दी जाती है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर हाइड्रेट रहता है और पाचन प्रक्रिया सामान्य रूप से काम करती है। यदि घर से बाहर जा रहे हों, तो अपने साथ साफ पानी की बोतल रखना एक अच्छी आदत हो सकती है। पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखने के लिए प्रोबायोटिक खाद्य पदार्थों को भी आहार में शामिल किया जा सकता है। दही और छाछ जैसे खाद्य पदार्थ आंतों में लाभकारी बैक्टीरिया के संतुलन को बनाए रखने में सहायक माने जाते हैं। इसके साथ ही खिचड़ी, दलिया, सूप, उबली सब्जियां और अन्य हल्के भोजन का सेवन पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव नहीं डालता और भोजन आसानी से पचने में मदद करता है। स्वच्छता का पालन मानसून में बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी उपायों में से एक है। भोजन करने से पहले और शौचालय के उपयोग के बाद साबुन से हाथ धोना, फल और सब्जियों को अच्छी तरह साफ करना तथा रसोई और बर्तनों की नियमित सफाई बनाए रखना संक्रमण के खतरे को कम कर सकता है। छोटी-छोटी स्वच्छता संबंधी आदतें भी स्वास्थ्य की दृष्टि से बड़ा अंतर पैदा कर सकती हैं। बारिश के मौसम में तली-भुनी और अत्यधिक मसालेदार चीजें खाने की इच्छा बढ़ जाती है, लेकिन इनका अधिक सेवन पाचन संबंधी समस्याओं को बढ़ा सकता है। अधिक तेल और मसाले वाला भोजन एसिडिटी, गैस और अपच जैसी परेशानियों का कारण बन सकता है। इसलिए संतुलित, पौष्टिक और हल्का भोजन चुनना अधिक लाभदायक माना जाता है। यदि लगातार पेट दर्द, दस्त, उल्टी, तेज बुखार या निर्जलीकरण जैसे लक्षण दिखाई दें, तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है। समय पर उपचार गंभीर जटिलताओं से बचाने में मदद कर सकता है। संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, स्वच्छता और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर मानसून के मौसम में पाचन तंत्र को बेहतर स्थिति में रखा जा सकता है और पूरे मौसम का आनंद स्वस्थ रहकर लिया जा सकता है।

इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू के बेटे ने बदला नाम, वजह को लेकर उठे सवाल

नई दिल्ली। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बड़े बेटे यायर नेतन्याहू को लेकर नया विवाद सामने आया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यायर नेतन्याहू ने अपना नाम बदलकर ‘योनातन हुन’ कर लिया है। लीक हुए डेटा के आधार पर दावा किया जा रहा है कि यह बदलाव पिछले दो वर्षों के दौरान किया गया। जानकारी के मुताबिक, 2024 में टैक्स फाइलिंग के दौरान उन्होंने अपने जन्म नाम यायर नेतन्याहू का ही इस्तेमाल किया था, जबकि 2026 में टैक्स संबंधी दस्तावेजों में उनका नाम ‘योनातन हुन’ दर्ज किया गया। हालांकि, नाम बदलने के पीछे की वास्तविक वजह को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इजरायली मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नेतन्याहू परिवार पहले से ही टैक्स और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को लेकर चर्चा में रहा है। ऐसे में यायर नेतन्याहू के नाम परिवर्तन को लेकर भी कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उन्होंने यह बदलाव किस उद्देश्य से किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, नाम में यह परिवर्तन उनके मौजूदा नेशनल आइडेंटिफिकेशन नंबर के तहत किए गए रेगुलेटरी अपडेट का हिस्सा है। दस्तावेजों में उनका रेसिडेंशियल एड्रेस ‘बाल्फोर 0’ दर्ज किया गया है, जिसे इजरायल के प्रधानमंत्री आवास से जोड़कर देखा जा रहा है। नाम बदलने के उद्देश्य को लेकर बहस तेजइजरायल में प्रधानमंत्री के बेटे के नाम बदलने के फैसले को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे टैक्स से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ इसे सैन्य सेवा से संबंधित विवादों के संदर्भ में देख रहे हैं। दरअसल, 2023 से योनातन हुन के फ्लोरिडा में रहने को लेकर भी आलोचना होती रही है। युद्ध के दौरान जब इजरायल ने रिजर्व सैनिकों को बुलाया, तब विदेश में रहने को लेकर कई लोगों ने सवाल उठाए थे। कुछ आलोचकों का कहना है कि नाम बदलने का संबंध युद्ध से बचने की कोशिश से हो सकता है, जबकि कुछ इसे टैक्स संबंधी कारणों से जोड़ रहे हैं। ‘योनातन हुन’ नाम के पीछे ऐतिहासिक कनेक्शनइजरायली मीडिया के अनुसार, ‘योनातन’ नाम का संबंध नेतन्याहू परिवार के एक ऐतिहासिक व्यक्ति से है। यह नाम बेंजामिन नेतन्याहू के भाई योनी नेतन्याहू को श्रद्धांजलि के तौर पर देखा जा रहा है, जो 1976 में युगांडा में एक मिशन के दौरान मारे गए थे। उन्हें इजरायल में एक राष्ट्रीय नायक के रूप में देखा जाता है। वहीं, ‘हुन’ उपनाम को नेतन्याहू परिवार की पुरानी पारिवारिक जड़ों से जोड़कर देखा जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, परिवार के बुजुर्ग बेन आर्टजी जब इजरायल आए थे, तब उनका नाम सैमुअल हुन था और बाद में उन्होंने अपना नाम बदला था। इसी पारिवारिक इतिहास से प्रेरित होकर यायर ने अपने नए नाम में ‘हुन’ शब्द शामिल किया है। हालांकि, इससे पहले भी यायर नेतन्याहू अपने एक पॉडकास्ट में ‘यायर हुन’ नाम का इस्तेमाल कर चुके हैं, लेकिन सरकारी दस्तावेजों में शामिल होने के बाद यह नाम आधिकारिक रूप से दर्ज हो गया है। फिलहाल प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, उनके बेटे यायर नेतन्याहू या प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से नाम बदलने के कारणों को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

राम मंदिर में 40 दिन में 70 बार हुई चढ़ावे की चोरी, 50 बार अविनाश ने उड़ाई नकदी, अनुकल्प-लवकुश करते थे प्लानिंग

लखनऊ। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों के अनुसार, पूरे गिरोह में चोरी की मुख्य जिम्मेदारी अविनाश शुक्ला को सौंपी गई थी। सीसीटीवी फुटेज में वह सबसे अधिक बार चढ़ावे की रकम निकालते हुए दिखाई दिया, जबकि अन्य आरोपी उसे कवर देने के लिए आसपास मौजूद रहते थे। एसआईटी की जांच में सामने आया था कि 40 दिनों के दौरान चढ़ावे की रकम करीब 70 बार चोरी की गई। इनमें लगभग 50 बार अविनाश शुक्ला को नकदी निकालते हुए कैमरों में देखा गया। पुलिस ने भी अपनी विवेचना में सीसीटीवी फुटेज को अहम साक्ष्य के रूप में शामिल किया है। फुटेज के विश्लेषण में एसआईटी की रिपोर्ट की पुष्टि हुई कि अधिकांश मामलों में रकम अविनाश ने ही पार की। पुलिस रिमांड के दौरान पूछताछ में अविनाश शुक्ला ने स्वीकार किया था कि अधिकतर मौकों पर चोरी की जिम्मेदारी उसी को दी जाती थी। हालांकि एसआईटी की विस्तृत जांच अंतिम चरण में है, जबकि पुलिस की विवेचना अभी जारी रहेगी। अनुकल्प और लवकुश बनाते थे पूरी रणनीतिजांच में यह भी सामने आया कि टिन्नू यादव और गणनाकर्मी सुभाष श्रीवास्तव की मिलीभगत से यह पूरा खेल चलता था। दोनों का काम यह सुनिश्चित करना था कि किसी अन्य कर्मचारी या व्यक्ति की नजर आरोपियों की गतिविधियों पर न पड़े। कब और किस तरह रकम निकालनी है, इसकी पूरी योजना अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा तैयार करते थे। योजना के अनुसार सबसे पहले अविनाश शुक्ला रकम निकालता था, जबकि कई मौकों पर मनीष और रमाशंकर ने भी नकदी चोरी की। बाद में सभी आरोपियों के बीच रकम का बंटवारा कर दिया जाता था। लगभग हर दिन दो बार की जाती थी चोरीसीसीटीवी फुटेज और पूछताछ से यह भी स्पष्ट हुआ है कि आरोपी लगभग हर दिन दो बार चढ़ावे की रकम पार करते थे। रिमांड के दौरान अविनाश, अनुकल्प और लवकुश ने बताया था कि अधिकांश दिनों में दो बार चोरी की जाती थी, जबकि अवसर मिलने पर तीन बार भी नकदी निकाल ली जाती थी। कभी-कभी परिस्थितियां अनुकूल नहीं होने पर चोरी करना संभव नहीं हो पाता था। जांच के अनुसार, यह पूरा खेल आरोपियों के काम पर लगाए जाने के समय से ही लगातार चल रहा था।

पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व विवाद जारी, बघेल-चन्नी की बैठक बेनतीजा, राजा वड़िंग को हटाने की मांग फिर उठी

चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को लेकर चल रहा नेतृत्व विवाद फिलहाल सुलझता नजर नहीं आ रहा है। शनिवार को कांग्रेस के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल ने पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थक नेताओं के साथ करीब दो घंटे तक बंद कमरे में बैठक की, लेकिन किसी ठोस नतीजे पर सहमति नहीं बन सकी। बैठक में कई वरिष्ठ नेताओं ने एक बार फिर राजा वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने की मांग दोहराई। सूत्रों के अनुसार, बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा समेत कई नेताओं ने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के लिए मजबूत नेतृत्व जरूरी है। नेताओं ने अपनी आपत्तियां कांग्रेस हाईकमान तक पहुंचाने का आग्रह करते हुए प्रदेश अध्यक्ष बदलने की मांग रखी। हालांकि बैठक के बाद भूपेश बघेल ने विवाद को ज्यादा तूल देने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि पिछले कई दिनों से वह अलग-अलग नेताओं से लगातार चर्चा कर रहे हैं। उनके अनुसार, कोई भी नेता हाईकमान के फैसले का विरोध नहीं कर रहा है, लेकिन कुछ आशंकाएं और संगठन से जुड़े मुद्दे हैं, जिन्हें पार्टी नेतृत्व के सामने रखा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सभी नेताओं के हितों का ध्यान रखते हुए उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा। वहीं, जब उनसे पूछा गया कि क्या बैठक में राजा वड़िंग को हटाने की मांग उठी, तो उन्होंने इससे इनकार किया। चन्नी और वड़िंग को साथ नहीं ला सके बघेलपंजाब में पिछले छह दिनों से संगठनात्मक विवाद सुलझाने की कोशिश कर रहे भूपेश बघेल शनिवार दोपहर छत्तीसगढ़ रवाना हो गए। इस दौरान वह चरणजीत सिंह चन्नी और अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को एक मंच पर लाने में भी सफल नहीं हो सके। बैठक के बाद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि सभी मांगें भूपेश बघेल के सामने रख दी गई हैं। उनका कहना था कि पार्टी की प्राथमिकता 2027 में पंजाब में कांग्रेस की सरकार बनाना है और इसके लिए मजबूत नेतृत्व की आवश्यकता है, न कि समझौता करने वाले नेता की। रंधावा ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि प्रदेश कांग्रेस का नेतृत्व ऐसा होना चाहिए जो मुख्यमंत्री भगवंत मान की राजनीतिक चुनौतियों का मजबूती से सामना कर सके। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक दल समय-समय पर अपने फैसलों में बदलाव करते हैं और कांग्रेस भी ऐसा कर सकती है। गौरतलब है कि कांग्रेस हाईकमान ने हाल ही में पंजाब संगठन की नई सूची जारी करते हुए अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को दोबारा प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखने का फैसला किया था। इसके बाद से पार्टी के भीतर दो स्पष्ट खेमे दिखाई दे रहे हैं और चन्नी समर्थक नेता लगातार इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। बैठक में कई वरिष्ठ नेता रहे मौजूदभूपेश बघेल के साथ हुई बैठक में चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा, ओपी सोनी, नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा, विधायक परगट सिंह, पूर्व मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, भारत भूषण आशु, पूर्व सांसद शेर सिंह घुबाया, पूर्व युवा कांग्रेस अध्यक्ष बरिंदर ढिल्लों सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। रंधावा के बयान पर राजा वड़िंग का पलटवारसुखजिंदर सिंह रंधावा के “समझौता करने वाला नेता नहीं चाहिए” वाले बयान पर अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि किसी का नाम नहीं लिया गया, तो इशारा उनकी ओर क्यों किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी में स्लीपर सेल या समझौता करने वाले नेताओं के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। राजा वड़िंग ने कहा कि वह और रंधावा करीब साढ़े चार साल तक साथ काम कर चुके हैं। यदि वह समझौता करने वाले नेता होते तो रंधावा उनके साथ काम नहीं करते। वहीं, भाजपा नेता सुनील जाखड़ के बयान पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि जाखड़ लंबे समय तक कांग्रेस में रहे और बाद में यह कहते हुए पार्टी छोड़ दी कि यहां हिंदुओं की नहीं सुनी जाती। उन्होंने कहा कि “असली गद्दार तो वही हैं।”