महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने सदन में लिखित उत्तर देते हुए जानकारी दी कि योजना में कुल पंजीकृत बहनों की संख्या 1 करोड़ 31 लाख 6 हजार 525 से घटकर अब 1 करोड़ 25 लाख 29 हजार 51 रह गई है। इसका मतलब यह है कि 5 लाख 77 हजार 474 बहनों के नाम कट चुके हैं।
मंत्री ने नाम कटने के मुख्य कारण भी बताए। इनमें प्रमुख हैं: लाभार्थी की आयु 60 साल पूरी होना निधन और अन्य अपात्रताएं। उन्होंने कहा कि 60 साल पार करने पर 1.51 लाख से ज्यादा महिलाएं योजना की पात्रता खो चुकी हैं।
महेश परमार ने आरोप लगाया कि नाम कटने की प्रक्रिया लगातार जारी है और नए पंजीकरण बंद हैं। उन्होंने कहा कि 60 साल की उम्र पूरी होने पर योजना की राशि बंद हो जाती है और अन्य पेंशन में केवल 600 रुपये मिलते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बजट में राशि बढ़ाकर 3 000 रुपये करने का कोई प्रावधान नहीं किया गया।
इस हंगामे के बीच मंत्री निर्मला भूरिया ने विधानसभा में स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया नियमों के अनुसार की जा रही है और पात्रता समाप्त होने वाले लाभार्थियों को अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में लाभ दिया जाता है।
लाड़ली बहना योजना का उद्देश्य राज्य की महिलाओं को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है। हालांकि नाम कटने और नए पंजीकरण में खामी को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा। यह मामला राज्य की महिला कल्याण नीतियों और योजनाओं के क्रियान्वयन पर नए सिरे से बहस का विषय बन गया है।