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GWALIOR HIGH COURT:  हाईकोर्ट सख्त: आदेश की अवहेलना पर सिविल जज के आचरण की जांच के निर्देश

HIGH COURT

HIGHLIGHTS:

  • हाईकोर्ट ने आदेश की अवहेलना पर सिविल जज के आचरण की जांच के निर्देश दिए

  • विवादित संपत्ति पर यथास्थिति आदेश के बावजूद निर्माण का आरोप

  • ट्रायल कोर्ट ने गवाहों के बयान दर्ज किए बिना PWD से रिपोर्ट मंगाई

  • रिपोर्ट भेजने में निर्धारित न्यायिक प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ

  • मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को होगी

GWALIOR HIGH COURT: ग्वालियर। हाईकोर्ट की एकलपीठ ने अपने आदेश की अवहेलना और न्यायिक प्रक्रिया में लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए एक सिविल जज के आचरण की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। बता दें कि अदालत ने यह मामला किसी अन्य सिविल जज को सौंपते हुए चार माह के भीतर पूरी जांच कर रिपोर्ट पेश करने को कहा है।

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यथास्थिति आदेश के बावजूद शुरू हुआ निर्माण

मामला अशोक कुमार एवं अन्य बनाम मीरा देवी से जुड़ा है। वर्ष 2013 में विवादित संपत्ति को लेकर अदालत ने यथास्थिति बनाए रखने का अंतरिम आदेश जारी किया था। इसके बावजूद प्रतिवादी पक्ष द्वारा कथित रूप से विवादित जमीन पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। इसके बाद याचिकाकर्ता अशोक कुमार ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की।

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ट्रायल कोर्ट से मांगी गई थी जांच रिपोर्ट

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने 4 अप्रैल 2024 को ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया था कि वह जांच कर यह स्पष्ट करे कि क्या अदालत के अंतरिम आदेश का उल्लंघन करते हुए निर्माण किया गया है। ट्रायल कोर्ट को चार माह के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने और 24 अप्रैल 2024 को पक्षकारों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित करने के निर्देश भी दिए गए थे।

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जांच प्रक्रिया में बरती गई लापरवाही

हालांकि लंबे समय तक रिपोर्ट पेश नहीं की गई। बाद में ट्रायल कोर्ट ने विधिवत जांच प्रक्रिया अपनाने के बजाय लोक निर्माण विभाग (PWD) के कार्यपालन यंत्री से स्थल निरीक्षण रिपोर्ट मंगाकर सीधे हाईकोर्ट को भेज दी। कोर्ट ने पाया कि यह रिपोर्ट पक्षकारों की अनुपस्थिति में तैयार की गई प्रतीत होती है और निर्धारित प्रक्रिया का भी पालन नहीं किया गया।

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अगली सुनवाई 20 अगस्त को

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इस रिपोर्ट पर भरोसा नहीं किया जा सकता और मामले की विधिवत जांच आवश्यक है। अदालत ने मामले की जांच किसी अन्य सिविल जज से कराने के निर्देश दिए हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को निर्धारित की गई है।

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