दोपहर के समय मुखर्जी नगर से भव्य शोभायात्रा की शुरुआत हुई। महिलाएं पारंपरिक परिधानों में सजीं, मंगल गीत गा रही थीं और नृत्य करते हुए यात्रा में शामिल हुईं। शोभायात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होकर मिश्र तालाब तक पहुंची। रास्ते में उपस्थित लोगों ने पुष्प वर्षा करके माता गणगौर का स्वागत किया।
शोभायात्रा में शामिल महिलाओं और श्रद्धालुओं ने पूरे मार्ग में उत्सव का माहौल बनाए रखा। इस दौरान समाज के सभी वर्गों के लोग उपस्थित थे और उन्होंने अपने-अपने ढंग से महापर्व में भाग लिया।
अंत में तालाब के घाट पर विधिपूर्वक गणगौर की प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में सामाजिक बंधु और श्रद्धालु मौजूद रहे। उन्होंने गणगौर पूजन और आरती में भाग लेकर पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन किया।
इस आयोजन से न केवल समाज में एकता और भाईचारे की भावना मजबूत हुई, बल्कि लोक संस्कृति और परंपराओं के प्रति सम्मान भी दिखाई दिया। महिलाएं उत्सव में प्रमुख रूप से शामिल रही और अखंड सौभाग्य की कामना करते हुए पूरे उत्सव को जीवंत और श्रद्धालु माहौल में बदल दिया।
गणगौर पर्व का यह आयोजन शहर में सामाजिक और धार्मिक जीवन में उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि महिलाओं की आस्था, समाजिक सहभागिता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी है।