यह लाभांश सरकार के लिए ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब वैश्विक अनिश्चितताओं और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उतार-चढ़ाव के कारण आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। इस संभावित आय से सरकार को बजट प्रबंधन और विकास योजनाओं को संतुलित रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।
पिछले वित्त वर्ष में भी RBI ने सरकार को रिकॉर्ड स्तर का लाभांश दिया था, जिसने सरकारी खजाने को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई थी। इस बार भी अनुमान लगाया जा रहा है कि राशि पिछले आंकड़ों को पार कर सकती है, जिससे गैर-कर राजस्व में उल्लेखनीय बढ़ोतरी संभव है।
आरबीआई की ओर से लाभांश का निर्धारण उसके केंद्रीय निदेशक मंडल द्वारा तय आर्थिक पूंजी ढांचे के आधार पर किया जाता है, जिसमें जोखिम प्रावधानों और वित्तीय स्थिरता को ध्यान में रखा जाता है। इसी प्रक्रिया के तहत हर साल सरकार को अधिशेष राशि हस्तांतरित की जाती है।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रदर्शन में सुधार भी इस संभावित वृद्धि का एक बड़ा कारण माना जा रहा है। बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता, बढ़ता ऋण विस्तार और मजबूत आय के चलते बैंकिंग क्षेत्र के मुनाफे में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है, जिसका सकारात्मक असर समग्र वित्तीय प्रणाली पर पड़ा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, आने वाले वित्त वर्ष में गैर-कर राजस्व में भी स्थिरता या हल्की बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है, जबकि कर संग्रह में भी वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। इससे सरकार को अपने राजकोषीय लक्ष्यों को पूरा करने में मदद मिल सकती है।