रविवार सुबह 7:30 बजे से मंदिर में परिव्राजक और महिला मंडल की बहनों ने संगीत के साथ देव पूजन और देव आव्हान किया। इसके बाद पंचकुंडीय गायत्री महायज्ञ शुरू हुआ। यज्ञशाला में विश्व कल्याण की भावना के साथ गायत्री मंत्र के साथ आहुतियां प्रदान की गई। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के कई स्वरूपों, महालक्ष्मी और महामृत्युंजय मंत्रों के साथ विशेष आहुतियां दी जा रही हैं।
गायत्री शक्तिपीठ के प्रमुख ट्रस्टी जगदीश एग्रो ने बताया कि चैत्र नवरात्रि की सप्तमी 25 मार्च को पंचकुंडीय यज्ञ के साथ कई प्रकार के संस्कार निशुल्क संपन्न करवाए जाएंगे। इनमें पुंसवन, नामकरण, विद्यारंभ, यज्ञोपवीत और मुंडन जैसे संस्कार शामिल हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि 27 मार्च को नवमी के दिन सुबह 8 बजे से नौ कुंडीय गायत्री महायज्ञ संपन्न कर नौ दिनों से चल रहे आयोजन की महा पूर्णाहुति की जाएगी। इसी अवसर पर भगवान श्रीरामचंद्र जी का पूजन और जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इसके पश्चात मंचासीन कार्यक्रम और अमृतासन प्रसादी का वितरण होगा। ट्रस्ट मंडल और परिजन नगर की धर्मप्रेमी जनता से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने का आवाहन कर रहे हैं।
हिन्दू शास्त्रों के अनुसार चैत्र और अश्विन माह की नवरात्रि शक्ति संचय करने का सर्वोत्तम समय है। इस अवसर पर साधक 24 हजार गायत्री मंत्रों का जप करते हैं, जिसे “लघु अनुष्ठान” कहा जाता है। साधक प्रतिदिन 27 माला गायत्री मंत्र का जप सुबह 4 से 8 बजे या शाम 4 से सूर्यास्त तक कर रहे हैं। साधक और परिजन अपनी सामर्थ्य और इच्छा अनुसार व्रतों का पालन भी कर रहे हैं।
पंचकुंडीय यज्ञ में नगर सहित आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों से सैकड़ों श्रद्धालुजन आए और धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं। यह आयोजन न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करता है बल्कि नगर और आसपास के लोगों में सामूहिक भक्ति और श्रद्धा की भावना को भी प्रगाढ़ बनाता है।