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सोना-चांदी धड़ाम! कीमतों में बड़ी गिरावट, 14,500 रुपये तक सस्ता हुआ गोल्ड


नई दिल्ली। सोने और चांदी के जिले में सोमवार को आंशिक ढलान वाला दृश्य मिला, जिसने अवशोषण को चौंका दिया। घरेलू बाजार बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोना और चांदी दोनों में तेजी से बिकवाली दर्ज की गई। सोने का दाम 1.37 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे चला गया है, जबकि चांदी का दाम भी 2.13 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर से नीचे चला गया है। यह गिरावट हाल के समय की सबसे बड़ी गिरावट में से एक पैसा जा रही है।

MCX पर सोने- पानी के भाव में भारी गिरावट

2 अप्रैल 2026 को फॉक्सवैगन्स की कीमत 7,619 रुपए पर पहुंच गई। कारोबार के दौरान सोना 1,36,403 रुपये के रु. तक पहुंच गया, जबकि ऊपरी स्तर 1,40,158 रुपये रहा। वहीं चांदी के 5 मई 2026 के दशक में और भी तेज गिरावट देखने को मिली। चांदी का भाव 14,495 रुपये पर 6.39 प्रतिशत टूटकर 2,12,277 रुपये पर आ गया। इंट्रा-डे में चांदी 2,11,086 रुपये तक।

अंतर्राष्ट्रीय इस्टेट का दिखावा भी असरदार

वैश्विक संस्था में भी मंदी का रुख देखने को मिला। COMEX (कॉमेक्स) पर सोना 5.50 प्रतिशत टूटकर 4,359 डॉलर प्रति शेयर पर पहुंच गया, जबकि सिल्वर 6.65 प्रतिशत टूटकर 65.08 डॉलर प्रति शेयर पर पहुंच गया। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इस गिरावट का सीधा असर भारतीय उद्योग पर भी डाला गया है।

इतनी बड़ी गिरावट क्यों?

विशेषज्ञ के अनुसार, इस गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं। मोती लाल ओसवाल के कमोडिटी पसन्द मानव मोदी का कहना है कि अमीर भाई-बहनों ने सोने की मांग को कमजोर कर दिया है। इसके अलावा संयुक्त राज्य अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच जारी तनाव ने बाजार में अनिश्चितता पैदा कर दी है।

राजनीतिक तनाव और असहमति की रणनीति

हालांकि आम तौर पर ग्लोबल टेंशन के समय सोना सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन इस बार की तस्वीर अलग नजर आती है। भीष्म रुचि की आशा और डॉलर की रेस्तरां के विद्यार्थियों ने सोने से दूरी बना ली। वहीं मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के संकट ने ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है, जिसका असर कमोडिटी बाजार पर भी पड़ा है।

आगे क्या रहेगा रुख?

विशेषज्ञों का मानना ​​है कि आने वाले सोने और चांदी के सिक्कों में दिन जारी कर सकते हैं। संस्था की नजरें अब सांख्यिकी के आंकड़े, मध्याह्न के बिंदु और वैश्विक राजनीतिक संकट पर रहेंगे। यदि हितधारकों के पास स्वामित्व है, तो सोने में दबाव बनाया जा सकता है।

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