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डॉलर के आगे कमजोर पड़ा रुपया, पहली बार 94 के पार, जानिए क्‍या कहते हैं एक्‍सपर्ट ?


नई दिल्ली। भारतीय करेंसी में गिरावट का सिलसिला जारी है और शुक्रवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ। पहली बार रुपया 94 के पार पहुंच गया। कारोबार के दौरान यह 94.84 तक फिसल गया, जबकि दिन के अंत में 94.81 पर बंद हुआ।

विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर रुपये पर साफ दिखाई दे रहा है। आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में अब तक रुपया करीब 11 प्रतिशत कमजोर हो चुका है। यह गिरावट पिछले एक दशक में किसी भी वित्त वर्ष की तुलना में सबसे अधिक मानी जा रही है।

रुपये में गिरावट के प्रमुख कारण

विशेषज्ञों के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल रुपये पर दबाव बना रहा है। जानकारों का कहना है कि आने वाले हफ्तों में कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रह सकता है, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका है और इसका सीधा असर करेंसी पर पड़ रहा है।

विदेशी निवेशकों का भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकालना भी एक बड़ी वजह है। आंकड़ों के मुताबिक पिछले एक महीने में करीब 13 अरब डॉलर की निकासी की गई है, जिससे रुपये पर दबाव और बढ़ा है।

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने भी स्थिति को और कमजोर किया है। युद्ध शुरू होने के बाद से रुपया करीब 4 फीसदी तक गिर चुका है। इस अनिश्चित माहौल ने निवेशकों के भरोसे को भी प्रभावित किया है।

आगे क्या रह सकता है रुख?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जब तक ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव कम नहीं होता, तब तक रुपये में बड़ी मजबूती की संभावना कम है। हालांकि सरकार अपने स्तर पर स्थिति संभालने की कोशिश कर रही है।

पेट्रोल और डीजल की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती का फैसला लिया है, जिससे आम लोगों को कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि, इससे सरकारी राजस्व पर दबाव बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

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