HIGHLIGHTS:
- टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों का प्रदर्शन
- 20-26 साल पुराने शिक्षकों को छूट की मांग
- 2 मार्च 2026 का आदेश रद्द करने की अपील
- 18 अप्रैल को भोपाल में बड़ा आंदोलन प्रस्तावित
- सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन की तैयारी

TET Cancellation protest : ग्वालियर। मध्यप्रदेश में शिक्षकों ने टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन किया। शिक्षक संयुक्त मोर्चा के बैनर तले सैकड़ों शिक्षक अलकापुरी तिराहे पर एकत्र हुए और रैली निकालते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा, जिसे एसडीएम नरेंद्र सिंह यादव ने प्राप्त किया। बता दें कि प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों में भारी नाराजगी देखने को मिली और उन्होंने अपनी मांगों को लेकर जोरदार नारेबाजी की।
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टीईटी अनिवार्यता पर उठे सवाल
प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य बनाए जाने का विरोध था। शिक्षक संघ के अरविन्द दीक्षित ने कहा कि जो शिक्षक शिक्षा का अधिकार कानून 2009 से पहले नियुक्त हुए हैं और 20 से 26 साल की सेवा दे चुके हैं, उनसे अब टीईटी पास करने की मांग करना अन्यायपूर्ण है। उन्होंने इसे अनुभव और सेवा का अपमान बताया।
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आदेश रद्द करने और सेवा गणना की मांग
शिक्षकों ने लोक शिक्षण संचालनालय, भोपाल द्वारा 2 मार्च 2026 को जारी आदेश को तुरंत रद्द करने की मांग की। साथ ही उन्होंने प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा अवधि की गणना करने और लंबित मांगों को जल्द पूरा करने की अपील भी की। शिक्षकों का कहना है कि इससे उनके प्रमोशन और अन्य लाभ प्रभावित हो रहे हैं।
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सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन की तैयारी
बताया जा रहा है कि मोर्चा ने यह भी मांग रखी है कि इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर की जाए। साथ ही उनका कहना है कि नीति में बदलाव करते समय लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों के हितों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
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आंदोलन तेज करने की चेतावनी
शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। 11 अप्रैल को ब्लॉक स्तर पर ज्ञापन सौंपे जाएंगे और 18 अप्रैल को भोपाल में बड़ा धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा, जिसमें एक लाख से अधिक शिक्षकों के शामिल होने की संभावना है।