मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि जनगणना केवल आंकड़ों को इकट्ठा करने की प्रक्रिया नहीं है बल्कि यह देश के भविष्य को दिशा देने वाला एक महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने कहा कि किसी भी योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसके पीछे उपलब्ध आंकड़े कितने सटीक और व्यापक हैं। ऐसे में जनगणना देश की रीढ़ के समान है जो विकास की पूरी संरचना को मजबूती प्रदान करती है।
प्रदेश में 16 अप्रैल से 30 अप्रैल तक ऑनलाइन स्व गणना का कार्य किया जाएगा जिसमें नागरिक स्वयं अपनी जानकारी डिजिटल माध्यम से दर्ज कर सकेंगे। इसके बाद 1 मई से 30 मई तक मकान सूचीकरण की प्रक्रिया चलेगी जो पूरी तरह आधुनिक तकनीक के माध्यम से संचालित होगी। इस बार की जनगणना को विशेष रूप से डिजिटल और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया है ताकि आंकड़ों की शुद्धता और विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि यह जनगणना आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित और बेहतर बनाने का आधार बनेगी। इसके जरिए यह समझा जा सकेगा कि विकास की योजनाएं समाज के अंतिम व्यक्ति तक कितनी प्रभावी तरीके से पहुंच रही हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे इस प्रक्रिया में पूरी ईमानदारी और सटीकता के साथ अपनी जानकारी दर्ज करें ताकि सही आंकड़ों के आधार पर योजनाएं तैयार की जा सकें।
उन्होंने जनगणना कार्य में लगे अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि वे राष्ट्र निर्माण का एक पवित्र दायित्व निभा रहे हैं। उनका परिश्रम और सटीक कार्य देश के विकास को नई दिशा देगा। कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति भी रही जिन्होंने इस अभियान को सफल बनाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता जताई।
डिजिटल तकनीक के इस व्यापक उपयोग के साथ मध्यप्रदेश में जनगणना की यह प्रक्रिया न केवल प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाएगी बल्कि नागरिकों की भागीदारी को भी आसान बनाएगी। अब यह देखना अहम होगा कि प्रदेश के लोग इस पहल में कितनी सक्रियता से हिस्सा लेते हैं और इसे कितना सफल बनाते हैं।