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लोकसभा सीटों में बड़ा बदलाव संभव, परिसीमन से राज्यों का समीकरण बदलेगा


नई दिल्ली। देश में एक बार फिर बड़े राजनीतिक बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। केंद्र सरकार द्वारा परिसीमन से जुड़े विधेयक पेश किए जाने के बाद साफ संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले समय में लोकसभा सीटों का पूरा गणित बदल सकता है। परिसीमन आयोग के गठन के बाद सीटों का नया बंटवारा होगा, जिससे राज्यों की राजनीतिक ताकत में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

क्या है परिसीमन और क्यों जरूरी है?
परिसीमन का मतलब चुनावी क्षेत्रों यानी लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या और सीमाएं तय करना होता है। यह प्रक्रिया जनसंख्या के आधार पर की जाती है, ताकि हर क्षेत्र को बराबर प्रतिनिधित्व मिल सके। भारत में आखिरी बार परिसीमन 2002 से 2008 के बीच हुआ था। इसके बाद से सीटों की संख्या स्थिर बनी हुई है, लेकिन अब बढ़ती आबादी को देखते हुए इसे फिर से लागू करने की तैयारी है।

कितनी बढ़ सकती हैं लोकसभा सीटें?
वर्तमान में देश में 543 लोकसभा सीटें हैं, जिन्हें बढ़ाकर करीब 800 से 850 तक किया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो संसद का आकार काफी बड़ा हो जाएगा और राज्यों को उनकी जनसंख्या के अनुसार ज्यादा प्रतिनिधित्व मिलेगा। हालांकि सरकार ने अभी राज्यवार अंतिम आंकड़े जारी नहीं किए हैं, लेकिन जनसंख्या के आधार पर संभावित अनुमान सामने आए हैं। अनुमान के मुताबिक उत्तर प्रदेश में सीटें 80 से बढ़कर 135 से 140 तक हो सकती हैं, जबकि बिहार में 40 से बढ़कर 65 से 75 सीटें होने की संभावना है। इसी तरह महाराष्ट्र में सीटें 48 से बढ़कर 70 से 80 तक जा सकती हैं और पश्चिम बंगाल में 42 से बढ़कर 60 से 65 सीटें होने का अनुमान है। इसके अलावा मध्य प्रदेश में 29 से बढ़कर 40 से 45, राजस्थान में 25 से बढ़कर 35 से 40, तमिलनाडु में 39 से बढ़कर 50 से 55 और कर्नाटक में 28 से बढ़कर 40 से 45 सीटें हो सकती हैं। गुजरात में सीटें 26 से बढ़कर 35 से 40, आंध्र प्रदेश में 25 से बढ़कर 30 से 35 और तेलंगाना में 17 से बढ़कर 20 से 25 तक पहुंच सकती हैं।

वहीं केरल में सीटों में मामूली बढ़ोतरी होकर 20 से 22 तक हो सकती है। ओडिशा में 21 से बढ़कर 25 से 30, झारखंड और असम में 14 से बढ़कर 18 से 22 सीटें हो सकती हैं। पंजाब में 13 से बढ़कर 15 से 18, हरियाणा में 10 से बढ़कर 12 से 15 और दिल्ली में 7 से बढ़कर 9 से 11 सीटें होने का अनुमान है। इन संभावित आंकड़ों से साफ है कि जिन राज्यों की आबादी ज्यादा है, वहां सीटों में सबसे ज्यादा इजाफा होगा। खासकर उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों की राजनीतिक ताकत काफी बढ़ सकती है, जिससे संसद में हिंदी बेल्ट का प्रभाव और मजबूत होगा। वहीं दक्षिण भारत के राज्यों में अपेक्षाकृत कम बढ़ोतरी होने की संभावना है, जिससे राजनीतिक संतुलन को लेकर बहस तेज हो सकती है।

महिलाओं को मिलेगा बड़ा मौका
इस पूरे बदलाव के साथ महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की दिशा में भी काम हो रहा है। फिलहाल लोकसभा में महिलाओं की भागीदारी करीब 13 से 14 प्रतिशत है, लेकिन नए प्रावधान लागू होने के बाद यह आंकड़ा काफी बढ़ सकता है। अनुमान है कि आने वाले समय में महिला सांसदों की संख्या 250 से 280 तक पहुंच सकती है, जो भारतीय राजनीति में एक बड़ा बदलाव साबित होगा। परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े इन विधेयकों पर राजनीति भी तेज हो गई है। जहां विपक्षी दलों ने कुछ मुद्दों पर सवाल उठाए हैं, वहीं सरकार ने सभी दलों से इस पर सहयोग करने की अपील की है। हालांकि अभी यह पूरी प्रक्रिया शुरुआती चरण में है। अंतिम फैसला तब होगा जब परिसीमन आयोग का गठन होगा, नई जनगणना के आंकड़े लागू होंगे और संसद से मंजूरी मिलेगी। , परिसीमन आयोग का गठन देश की राजनीति में एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। आने वाले समय में न सिर्फ लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि राज्यों के बीच शक्ति संतुलन भी पूरी तरह बदल सकता है।

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