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चंद्रशेखर जयंती के विशेष संयोग ने इस राजनीतिक घटनाक्रम को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया..

नई दिल्ली:चंद्रशेखर जयंती पर हरिवंश नारायण सिंह का राज्यसभा उपसभापति के रूप में तीसरी बार चयन, प्रधानमंत्री ने अनुभव और संतुलन की भूमिका को बताया लोकतांत्रिक मजबूती का आधार
राज्यसभा में शुक्रवार का दिन संसदीय कार्यवाही के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा, जब हरिवंश नारायण सिंह को लगातार तीसरी बार उपसभापति के रूप में चुना गया। सदन में इस निर्णय को व्यापक समर्थन मिला और उनके चयन को अनुभव, संतुलन और संसदीय परंपराओं के प्रति भरोसे की निरंतरता के रूप में देखा गया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि केवल एक पद का दोहराव नहीं है, बल्कि सदन के प्रति उनके लंबे अनुभव और प्रभावी कार्यशैली की स्वीकृति है।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि हरिवंश नारायण सिंह ने बीते वर्षों में राज्यसभा की कार्यवाही को सुचारु और संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं के बीच संतुलन स्थापित करना और सदन की गरिमा को बनाए रखना एक कठिन कार्य है, जिसे उन्होंने अपने धैर्य और समझदारी से निभाया है। उनके अनुसार, उनकी कार्यशैली ने सदन में संवाद और अनुशासन दोनों को मजबूत किया है।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि हरिवंश नारायण सिंह का जीवन अनुभव और सामाजिक जुड़ाव सदन की कार्यवाही को अधिक समृद्ध बनाता है। उन्होंने ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर शिक्षा और पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य किया और बाद में संसदीय जिम्मेदारी संभालते हुए लोकतांत्रिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका अनुभव सदन की चर्चाओं को अधिक गहराई और संतुलन प्रदान करता है।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने एक विशेष संयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस दिन हरिवंश नारायण सिंह को तीसरी बार यह जिम्मेदारी मिली, उसी दिन देश के पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की जयंती भी है। उन्होंने बताया कि हरिवंश का चंद्रशेखर के साथ गहरा संबंध रहा है और वे उनके विचारों और कार्यों से जुड़े रहे हैं। यह संयोग इस अवसर को और भी महत्वपूर्ण बना देता है।

प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि हरिवंश नारायण सिंह का जीवन सामाजिक चेतना और जनसेवा से प्रेरित रहा है। शिक्षा के दौरान काशी में उनका अध्ययन उनके व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण रहा। ग्रामीण परिवेश से आने के कारण उन्होंने समाज की वास्तविकताओं को करीब से समझा, जिसका प्रभाव उनके सार्वजनिक जीवन में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पिछले कुछ वर्षों में हरिवंश ने देशभर के शैक्षणिक संस्थानों में संवाद कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी निभाई है। यह प्रयास युवाओं और नीति निर्माण की दुनिया के बीच एक सेतु का कार्य करता है और लोकतांत्रिक संवाद को और मजबूत बनाता है।

राज्यसभा में उनके पुनर्निर्वाचन को लेकर विभिन्न सदस्यों ने भी सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की। सदन में यह माना गया कि अनुभवी नेतृत्व संसदीय कार्यवाही को अधिक प्रभावी और संतुलित बनाता है। उनके चयन को निरंतरता और स्थिरता के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।

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