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होर्मुज के पास आमने-सामने भारत-पाक नौसेना, बढ़ते तनाव के बीच 18 समुद्री मील की दूरी पर जहाज


नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास एक असामान्य स्थिति देखने को मिली, जब भारत और पाकिस्तान की नौसेनाएं बेहद कम दूरी पर सक्रिय नजर आईं। अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर के बावजूद इलाके में तनाव बरकरार है। अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों से जहाजों की आवाजाही पर रोक लगाई है, जबकि ईरान का दावा है कि होर्मुज पर उसका नियंत्रण कायम है।

ओमान तट के पास दिखा असामान्य सैन्य मूवमेंट

ओपन सोर्स इंटेलिजेंस एनालिस्ट डेमियन साइमन के अनुसार, ओमान के तट के पास भारत और पाकिस्तान के नौसैनिक जहाज एक-दूसरे से केवल 18 समुद्री मील की दूरी पर देखे गए। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि यह स्थिति इसलिए बनी क्योंकि दोनों देश पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच अपने-अपने व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा में जुटे हैं।

समुद्री मार्गों की सुरक्षा में जुटी भारतीय नौसेना

भारतीय नौसेना ने ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए अहम समुद्री रास्तों पर अपनी तैनाती बढ़ा दी है। इसका उद्देश्य भारत आने वाले एलपीजी, एलएनजी और कच्चे तेल के जहाजों को सुरक्षित रास्ता देना है। नौसेना के अनुसार, फारस की खाड़ी से लेकर होर्मुज और अरब सागर तक जहाजों को सुरक्षा प्रदान की जा रही है, ताकि वे बिना किसी बाधा के अपनी यात्रा पूरी कर सकें। बताया जा रहा है कि 10 से अधिक भारतीय जहाज फिलहाल होर्मुज क्षेत्र में फंसे हुए हैं, जिन्हें सुरक्षित निकालने के प्रयास जारी हैं।

अमेरिका-ईरान संबंधों में तनाव, बातचीत जारी
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अमेरिका जहां ईरान से उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर पीछे हटने की मांग कर रहा है, वहीं ईरान इस पर पूरी तरह सहमत नहीं है। हालांकि, दोनों देशों के बीच मतभेद कम करने और होर्मुज क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए बातचीत जारी है। ईरान ने संकेत दिया है कि वह ओमान की दिशा से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है, बशर्ते कोई ठोस समझौता हो।

समझौते की उम्मीद और ट्रंप का संकेत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ वार्ता में प्रगति हो रही है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि शांति समझौता होता है, तो वह हस्ताक्षर प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं। ट्रंप ने कहा कि अगर समझौता इस्लामाबाद में होता है, तो वे वहां जाने पर भी विचार कर सकते हैं।

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