नुवारा एलिया में उपराष्ट्रपति ने इंडियन हाउसिंग प्रोजेक्ट की विभिन्न साइट्स का निरीक्षण किया और वहां चल रहे निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। यह परियोजना खास तौर पर प्लांटेशन क्षेत्रों में रहने वाले भारतीय मूल के तमिल परिवारों को बेहतर आवास सुविधा उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई है। इसके तहत हजारों परिवारों को पक्के घर उपलब्ध कराए जा रहे हैं जिससे उनके जीवन में स्थायित्व और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
इससे पहले उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने कोलंबो में श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के साथ साथ सांस्कृतिक और विकासात्मक सहयोग को बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों यानी एमओयू पर भी हस्ताक्षर किए गए जो स्वास्थ्य शिक्षा और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देंगे।
इन समझौतों में मुल्लैतिवु में एक आधुनिक मेडिकल वार्ड कॉम्प्लेक्स का निर्माण शामिल है जिससे स्थानीय लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी। इसके अलावा पूर्वी प्रांत में महिला सशक्तीकरण के लिए प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने और विभिन्न अस्पतालों में विशेष यूनिट विकसित करने जैसे कदम भी उठाए जाएंगे। साथ ही कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग क्लस्टर और पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए आयुर्वेद गांव विकसित करने की योजना भी शामिल है।
भारत और श्रीलंका के बीच हुई घोषणाओं में भारतीय मूल के तमिल समुदाय के लिए ओसीआई सुविधा को छठी पीढ़ी तक बढ़ाने का फैसला भी अहम माना जा रहा है। इससे इस समुदाय के लोगों को भारत से जुड़े अधिकार और सुविधाएं प्राप्त करने में आसानी होगी। इसके अलावा इंडियन हाउसिंग प्रोजेक्ट के तीसरे चरण के पूरा होने की घोषणा भी की गई जिसमें हजारों घर बनाए गए हैं।
रेलवे और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भी सहयोग को बढ़ावा देते हुए नॉर्दर्न रेलवे लाइन पर ट्रेन सेवाओं को फिर से शुरू करने और विभिन्न प्रांतों में पुलों के निर्माण की घोषणा की गई है। वहीं छात्रों के लिए स्कॉलरशिप बढ़ाने और श्रीलंका के अंतरराष्ट्रीय बिग कैट अलायंस में शामिल होने की सहमति भी दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग को दर्शाती है।
यह दौरा स्पष्ट रूप से दिखाता है कि भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ केवल कूटनीतिक संबंध ही नहीं बल्कि विकास और मानवीय सहयोग को भी प्राथमिकता दे रहा है। आने वाले समय में इन परियोजनाओं का लाभ सीधे तौर पर श्रीलंका के तमिल समुदाय और अन्य स्थानीय नागरिकों को मिलेगा जिससे दोनों देशों के संबंध और अधिक मजबूत होंगे।