विजिनजम पोर्ट की संकल्पना तीन दशक पहले अंतरराष्ट्रीय कार्गो के भार को व्यवस्थित करने और विदेशी बंदरगाहों पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से की गई थी। वर्ष दो हजार पंद्रह में इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ और वर्तमान में यह बंदरगाह रिकॉर्ड समय में दस लाख टीईयू का आंकड़ा पार कर चुका है। भारी दबाव के बावजूद इस पोर्ट की कार्यक्षमता उल्लेखनीय रही है और पिछले महीने ही यहां साठ से अधिक जहाजों का सफल संचालन किया गया जो अपने आप में एक नया कीर्तिमान है। डीपवॉटर ट्रांसशिपमेंट की सुविधा होने के कारण यहां बड़े जहाजों को आसानी से संभाला जा सकता है जिससे यह अंतरराष्ट्रीय कार्गो परिवहन के लिए एक अनिवार्य विकल्प बन गया है।
ट्रांसशिपमेंट सुविधा किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्ग के लिए रीढ़ की हड्डी के समान होती है जहां कंटेनरों को एक बड़े जहाज से दूसरे जहाजों में स्थानांतरित किया जाता है ताकि वे अपने अंतिम गंतव्य तक सुगमता से पहुंच सकें। भारत पारंपरिक रूप से इस कार्य के लिए पड़ोसी देशों के हब पर निर्भर रहा है लेकिन विजिनजम के उदय ने इस समीकरण को पूरी तरह बदल दिया है। वर्तमान विस्तार कार्यों के पूरा होने के बाद यहां एक साथ पांच बड़े मदरशिप्स को संभालने की क्षमता विकसित हो जाएगी। यह विस्तार न केवल भारत की समुद्री शक्ति को बढ़ाएगा बल्कि वैश्विक स्तर के बड़े समुद्री केंद्रों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में भी सक्षम बनाएगा।
समुद्री विशेषज्ञों का मानना है कि विजिनजम पोर्ट का विकास अब केवल एक राष्ट्रीय परियोजना तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि यह एक वैश्विक आवश्यकता बन चुका है। होर्मुज जलडमरूमध्य में चल रहे गतिरोध के बीच शिपिंग उद्योग को एक ऐसे केंद्र की तलाश थी जो सुरक्षित होने के साथ-साथ तकनीकी रूप से भी उन्नत हो। विजिनजम ने इन सभी मानकों पर खरा उतरकर खुद को एक भरोसेमंद समुद्री दिग्गज के रूप में स्थापित किया है। जैसे-जैसे इसके दूसरे चरण का काम गति पकड़ रहा है उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में यह बंदरगाह वैश्विक अर्थव्यवस्था की गति को बनाए रखने में भारत का सबसे महत्वपूर्ण योगदान साबित होगा।