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कांग्रेस IT सेल वर्कर्स को लेकर विवाद: Bhopal में परिजनों ने लगाया अपहरण का आरोप, जांच की मांग


नई दिल्ली । राजधानी Bhopal में राजस्थान साइबर पुलिस की कार्रवाई ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। कांग्रेस आईटी सेल से जुड़े तीन कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने के बाद परिजनों ने गंभीर आरोप लगाते हुए इसे ‘अपहरण’ तक करार दिया है। मामला अब कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तर पर गरमा गया है, जबकि पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
परिजनों का आरोप: बिना सूचना ले गए, कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं अपनाई
शिकायतकर्ता मोहम्मद आमिर ने आरोप लगाया कि उनके भांजे बिलाल खान समेत तीन युवकों निखिल और इनाम को कुछ लोग खुद को राजस्थान पुलिस बताकर अपने साथ ले गए। परिवार का कहना है कि उन्हें यह कहकर गुमराह किया गया कि तीनों को कोर्ट में पेश किया जाएगा, लेकिन न तो उन्हें किसी स्थानीय अदालत में पेश किया गया और न ही मेडिकल कराया गया। परिजनों का आरोप है कि बिना आधिकारिक जानकारी के इस तरह ले जाना कानून के खिलाफ है।
वायरल पत्र से जुड़ा है पूरा विवाद
यह पूरा मामला राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री Vasundhara Raje के नाम से वायरल हुए एक कथित पत्र से जुड़ा बताया जा रहा है। सोशल मीडिया पर प्रसारित इस पत्र के तार भोपाल स्थित कांग्रेस आईटी सेल से जुड़े होने की आशंका जताई गई थी। इसी सिलसिले में राजस्थान साइबर पुलिस की टीम जांच के लिए भोपाल पहुंची थी।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
कांग्रेस नेता PC Sharma ने इस मामले को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जब परिवार ने शिकायत दर्ज करा दी है, तो संबंधित एजेंसियों को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना सूचना, बिना मेडिकल और बिना कोर्ट पेशी के कार्रवाई पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है। परिवार की मांग है कि तीनों युवकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जाए।
टाइमलाइन से बढ़ी शंका
घटना की टाइमलाइन भी कई सवाल खड़े करती है। 19 अप्रैल: तीनों कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर रोका गया। 21 अप्रैल दोपहर: परिजनों को जानकारी मिली कि उन्हें कलेक्टर कार्यालय के पास रखा गया है। उसी दिन दोपहर 3 बजे: एक कार से उन्हें कहीं ले जाया गया, परिजनों को जमानत की बात कहकर भेज दिया गया। शाम तक कोई जानकारी नहीं मिलने पर परिजनों ने थाना कोहेफिजा में शिकायत दर्ज कराई। इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस कार्रवाई की पारदर्शिता पर संदेह और गहरा कर दिया है।
हाईकोर्ट सख्त, 27 अप्रैल को पेश करने के आदेश
मामले ने जब कानूनी मोड़ लिया तो Madhya Pradesh High Court की जबलपुर बेंच ने हस्तक्षेप किया। अदालत ने राजस्थान पुलिस को 27 अप्रैल को तीनों कार्यकर्ताओं को पेश करने का निर्देश दिया है। साथ ही मध्य प्रदेश और राजस्थान पुलिस से पूरी कार्रवाई का विवरण मांगा गया है। कोर्ट ने 20-21 अप्रैल के सीसीटीवी फुटेज भी प्रस्तुत करने को कहा है।
गिरफ्तारी प्रक्रिया पर उठे बड़े सवाल
याचिका में गिरफ्तारी को गैरकानूनी बताते हुए न्याय की मांग की गई है। सवाल यह है कि यदि कार्रवाई नियमों के तहत हुई, तो परिजनों को अंधेरे में क्यों रखा गया? यही वजह है कि यह मामला अब सिर्फ एक पुलिस कार्रवाई नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही की बड़ी परीक्षा बन गया है।
सच्चाई सामने आना जरूरी
भोपाल में हुई इस घटना ने पुलिस की कार्यशैली, कानूनी प्रक्रिया और पारदर्शिता पर गंभीर बहस छेड़ दी है। अब सबकी नजर 27 अप्रैल पर टिकी है, जब अदालत में सच्चाई सामने आएगी और यह तय होगा कि कार्रवाई कानून के दायरे में थी या नहीं।

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