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नर्मदा तट पर भक्ति की लहर गंगा सप्तमी पर हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी


अनूपपुर । अनूपपुर जिले के अमरकंटक में गंगा सप्तमी का पर्व गुरुवार को गहरी आस्था और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया गया जहां मां नर्मदा के उद्गम स्थल पर करीब 20 हजार श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान कर पूजा अर्चना की और दान पुण्य के माध्यम से अपने जीवन में सुख समृद्धि और शांति की कामना की सुबह से ही तीर्थ क्षेत्र में श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया था जो दिनभर जारी रहा

वैशाख शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर कोटितीर्थ घाट रामघाट पुष्कर बांध और आरंडी संगम जैसे प्रमुख तटों पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी जहां श्रद्धालुओं ने नर्मदा नदी में आस्था की डुबकी लगाकर खुद को पवित्र करने का प्रयास किया हर ओर भक्ति और श्रद्धा का वातावरण दिखाई दे रहा था लोग परिवार सहित पहुंचे और पूरे विधि विधान से पूजन कर अपने मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते नजर आए

मां नर्मदा उद्गम मंदिर में दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं श्रद्धालु धैर्य के साथ अपनी बारी का इंतजार करते दिखे और मंदिर पहुंचकर विधिवत पूजा अर्चना की पूजा के बाद दान देने की परंपरा भी निभाई गई जहां कई श्रद्धालुओं ने भिक्षुओं को अन्न वस्त्र और धन का दान किया इस दिन मुंडन संस्कार का विशेष महत्व होने के कारण कई परिवार अपने बच्चों को लेकर पहुंचे और पारंपरिक रीति रिवाजों के साथ यह संस्कार संपन्न कराया गया

नर्मदा स्नान का सिलसिला सुबह करीब पांच बजे से शुरू होकर शाम तक लगातार चलता रहा तेज धूप और बढ़ती गर्मी के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ और वे पूरे जोश और श्रद्धा के साथ धार्मिक गतिविधियों में शामिल होते रहे जगह जगह भजन कीर्तन की ध्वनि गूंजती रही जहां श्रद्धालु मंजीरा और अन्य वाद्य यंत्रों के साथ भक्ति में लीन नजर आए इस दौरान पूरा अमरकंटक क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर दिखाई दिया

इस पावन अवसर पर अनूपपुर शहडोल डिंडोरी गौरेला पेंड्रा मरवाही और बिलासपुर सहित आसपास के कई जिलों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे जिससे क्षेत्र में यातायात और भीड़ का दबाव भी बढ़ गया रामघाट पार्किंग क्षेत्र में वाहनों की लंबी कतारें देखी गई हालांकि इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के कारण कुछ व्यवस्थाएं प्रभावित भी नजर आई खासकर पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से कई लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा

इसके बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह में कोई कमी नहीं आई और पूरे दिन अमरकंटक में धार्मिक आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला गंगा सप्तमी का यह पर्व एक बार फिर यह संदेश दे गया कि भारतीय संस्कृति में नदियों के प्रति श्रद्धा और विश्वास कितना गहरा और अटूट है

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