Chambalkichugli.com

KEJRIWAL CONTROVERSY: Contempt of Court क्या है और कितनी मिलती है सजा? केजरीवाल से रवीश कुमार तक नोटिस के बाद बढ़ी चर्चा

KEJRIWAL CONTROVERSY: नई दिल्ली। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। कथित शराब घोटाले से जुड़े मामले में जहां उनकी रिक्यूजल याचिका खारिज हुई, वहीं अदालत की कार्यवाही से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए जाने के मामले ने नया विवाद खड़ा कर दिया है।

इसी मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई करते हुए केजरीवाल, आप नेता मनीष सिसोदिया और संजय सिंह के साथ-साथ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह और वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को संबंधित वीडियो हटाने का भी निर्देश दिया है।

क्या होता है Contempt of Court?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट यानी अदालत की अवमानना का मतलब है अदालत के आदेशों की जानबूझकर अवहेलना करना या न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा को नुकसान पहुंचाना। यह कानून Contempt of Courts Act, 1971 के तहत नियंत्रित होता है। संविधान के अनुच्छेद 215 और 129 के तहत हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट को यह अधिकार प्राप्त है कि वे अपनी अवमानना के मामलों में कार्रवाई कर सकें।

कितनी हो सकती है सजा?
कानूनी प्रावधानों के मुताबिक, अदालत की अवमानना दो प्रकार की होती है सिविल और क्रिमिनल कंटेम्प्ट।
सिविल कंटेम्प्ट: अदालत के आदेशों का पालन न करना या देरी करना
क्रिमिनल कंटेम्प्ट: अदालत की गरिमा को ठेस पहुंचाना या कार्यवाही में बाधा डालना

इसमें अधिकतम 6 महीने की जेल या जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान है। हालांकि, कई मामलों में अगर आरोपी अदालत से माफी मांग ले तो सजा से राहत भी मिल सकती है, लेकिन यह पूरी तरह अदालत के विवेक पर निर्भर करता है।

मामला क्यों उठा?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब अरविंद केजरीवाल ने कथित शराब घोटाले से जुड़े मामले में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से खुद को अलग करने की मांग करते हुए अदालत में जिरह की थी। 13 अप्रैल को उन्होंने करीब एक घंटे तक अपनी दलीलें रखीं, जिसकी वीडियो रिकॉर्डिंग बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।

आरोप है कि इस वीडियो को केजरीवाल और उनके कई सहयोगियों ने साझा किया, जिसके बाद अधिवक्ता वैभव सिंह ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर अवमानना की कार्रवाई की मांग की। अब मामला अदालत की निगरानी में है और सभी संबंधित पक्षों से जवाब मांगा गया है, जबकि प्लेटफॉर्म्स को वीडियो हटाने के निर्देश भी दिए गए हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular News