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फिनटेक सेक्टर में नया ट्रेंड: शुरुआती कंपनियों में गिरावट, बड़े सौदों पर बढ़ा निवेश

नई दिल्ली।भारत के फिनटेक सेक्टर की कहानी इस साल की पहली तिमाही में एक दिलचस्प मोड़ पर पहुंची है। आंकड़ों के मुताबिक, 2026 की शुरुआत में इस सेक्टर में करीब 513 मिलियन डॉलर की फंडिंग दर्ज की गई, जो पिछले साल की तुलना में हल्की बढ़त दिखाती है। हालांकि यह बढ़ोतरी सिर्फ 2 प्रतिशत की रही, लेकिन असली बदलाव फंडिंग के तरीके में देखने को मिला।

पहले जहां दर्जनों छोटे-बड़े निवेश राउंड होते थे, वहीं अब तस्वीर बदल गई है। इस बार कुल 99 की जगह सिर्फ 45 फंडिंग डील्स हुईं। यानी निवेशक अब कम सौदों में ज्यादा पैसा लगाने की रणनीति अपना रहे हैं। औसतन निवेश राशि भी पहले से काफी बढ़ गई है, जिससे साफ है कि ध्यान अब मजबूत और स्थापित कंपनियों पर ज्यादा है।

इस बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण लेट-स्टेज कंपनियां हैं, जहां निवेश 273 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया—जो पिछली तिमाही से दोगुने से भी ज्यादा है। इसके उलट शुरुआती स्टार्टअप्स को मिलने वाली फंडिंग में गिरावट आई है, जो यह दिखाती है कि जोखिम लेने की बजाय अब निवेशक सुरक्षित विकल्प चुन रहे हैं।

दिलचस्प बात यह है कि पूरे निवेश का बड़ा हिस्सा सिर्फ एक ही क्षेत्र—ऑनलाइन लेंडिंग—को मिला, जो लगभग 60 प्रतिशत तक पहुंच गया। इसका मतलब है कि ऐसे मॉडल ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं जिनकी कमाई पहले से साबित हो चुकी है और जिनमें स्थिरता दिखती है।

अगर भौगोलिक बदलाव की बात करें तो इस बार मुंबई ने बड़ा उछाल दिखाया है। कुल फंडिंग का लगभग 61 प्रतिशत हिस्सा मुंबई की कंपनियों को मिला, जबकि बेंगलुरु का हिस्सा घटकर करीब 30 प्रतिशत रह गया। पहले तस्वीर इसके उलट थी, जहां बेंगलुरु आगे रहता था।

इस बदलाव की एक बड़ी वजह यह भी मानी जा रही है कि मुंबई में बैंकिंग, एनबीएफसी और बीमा कंपनियों का मजबूत नेटवर्क मौजूद है, जिससे फिनटेक कंपनियों को तेजी से स्केल करने में मदद मिल रही है।

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