इस विवाह की सबसे चर्चित और आकर्षक कड़ी यहाँ की विशेष ‘जोझोड़े’ परंपरा रही। जहाँ आमतौर पर दूल्हा बारात लेकर वधू के घर जाता है, वहीं इस पारंपरिक रिवाज के अनुसार पांचों दुल्हनें स्वयं गाजे-बाजे और बारातियों के साथ दूल्हों के घर पहुंचीं। नरेंद्र, प्रदीप, प्रीतम, अमित और राहुल नामक पांचों भाइयों ने अपनी जीवनसंगिनियों के साथ देवभूमि की पावन परंपराओं के बीच सात फेरे लिए। जौनसार-बावर क्षेत्र की यह अनूठी प्रथा न केवल महिलाओं के सम्मान को दर्शाती है, बल्कि यह संयुक्त परिवार के भीतर अनुशासन और आपसी तालमेल का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी पेश करती है।
आयोजन की सादगी और भव्यता का संगम देखकर हर कोई दंग रह गया। गाँव के बुजुर्गों और मेहमानों का मानना है कि सामूहिक विवाह की यह पहल समाज के लिए प्रेरणादायक है। जहाँ एक ओर यह फिजूलखर्ची को रोकता है, वहीं दूसरी ओर यह रिश्तों की मिठास और सामूहिक आनंद को कई गुना बढ़ा देता है। इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने के लिए दूर-दराज के इलाकों से लोग जमा हुए थे। भाइयों की शादी के इस उत्सव के ठीक अगले दिन परिवार की बेटी का विवाह भी निर्धारित है, जिससे पूरा घर और गाँव खुशियों के दोहरे उल्लास में सराबोर नजर आ रहा है।
सोशल मीडिया पर इस ‘यूनिक वेडिंग’ की तस्वीरें और वीडियो खूब पसंद किए जा रहे हैं। लोग इसे जौनसारी संस्कृति और लोक-परंपराओं के संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम बता रहे हैं।