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बूंद-बूंद से बनी मिसाल: गोचा नदी स्टॉप डैम में लौटी जलधारा, ग्रामीणों ने रचा इतिहास


भोपाल । मध्यप्रदेश में जल संरक्षण की दिशा में चल रहा जल गंगा संवर्धन अभियान अब एक जनआंदोलन का रूप लेता नजर आ रहा है। Mohan Yadav के नेतृत्व में 19 मार्च से 30 जून 2026 तक संचालित इस अभियान ने प्रदेश के गांवों में जल संरचनाओं के पुनर्जीवन को नई दिशा दी है। इसी कड़ी में Guna जिले के राघौगढ़ जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत मोररवास में एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है, जहां जनसहभागिता ने असंभव को संभव कर दिखाया।

मोररवास गांव के पास बहने वाली गोचा नदी पर बना स्टॉप डैम लंबे समय से अपनी उपयोगिता खो चुका था। वर्षा का पानी यहां रुकने के बजाय बहकर निकल जाता था, जिससे आसपास के ग्रामीणों और पशुधन को पानी का लाभ नहीं मिल पाता था। जल संकट धीरे-धीरे गंभीर होता जा रहा था और यह डैम केवल एक सूखी संरचना बनकर रह गया था। लेकिन ग्रामीणों ने हार नहीं मानी और सामूहिक प्रयासों से इस स्थिति को बदलने का संकल्प लिया।

स्थानीय ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से महज 50 हजार रुपये की जनसहयोग राशि एकत्रित की गई। 6 से 11 अप्रैल के बीच बोरी बंधान का कार्य पूरा किया गया। यह छोटा सा प्रयास बड़ा बदलाव लेकर आया। अब स्टॉप डैम में पानी का ठहराव बढ़ गया है और जल संग्रहण की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। जहां पहले सूखा नजर आता था, वहीं अब पानी की सतह स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगी है।

इस पूरे अभियान की सबसे खास बात रही ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी। गांव के लोगों ने श्रमदान कर न केवल इस कार्य को पूरा किया, बल्कि जल संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी निभाई। यह पहल केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि जागरूकता और सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक बन गई है। हर व्यक्ति ने इसमें अपनी भूमिका निभाई और जल की हर बूंद को बचाने का संदेश दिया।

इस प्रयास का सीधा लाभ अब पशुधन और वन्य जीवों को भी मिल रहा है। पहले जहां पानी के अभाव में मवेशियों को दूर-दूर तक भटकना पड़ता था, वहीं अब उन्हें स्थानीय स्तर पर ही पर्याप्त पानी उपलब्ध हो रहा है। इससे न केवल ग्रामीण जीवन आसान हुआ है, बल्कि पर्यावरण संतुलन को भी मजबूती मिली है।

गोचा नदी स्टॉप डैम का यह सफल पुनर्जीवन पूरे प्रदेश के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बनकर उभरा है। यह उदाहरण बताता है कि यदि जनसहभागिता, सकारात्मक सोच और सामूहिक प्रयास हों, तो जल संकट जैसी बड़ी चुनौती का भी समाधान संभव है। जल गंगा संवर्धन अभियान के माध्यम से यह संदेश साफ है कि जब समाज और शासन मिलकर काम करते हैं, तो बदलाव निश्चित होता है।

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