MV होंडियस नाम के इस क्रूजशिप को फिलहाल अफ्रीकी देश केप वर्डे की राजधानी प्राया में रोका गया है। अभी यात्रियों को उतरने की अनुमति नहीं मिली है। यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि संक्रमण फैलने के खतरे को नियंत्रित किया जा सके।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, जहाज पर 6 लोगों में संक्रमण जैसे लक्षण मिले हैं। इनमें से एक मामले की पुष्टि लैब में हो चुकी है। एक मरीज दक्षिण अफ्रीका के अस्पताल में आईसीयू में भर्ती है, जबकि दो को जहाज से निकालने की तैयारी की जा रही है।
यह भी अभी पता नहीं है कि सभी बीमार लोग हंतावायरस से संक्रमित हैं या नहीं। यह बीमारी आखिर कैसे और कहां से फैली है, इसकी जांच चल रही है।
7 हफ्ते में कई देशों से गुजरा क्रूज
नीदरलैंड के झंडे वाला यह क्रूज शिप 20 मार्च को अर्जेंटीना के उशुआइया से रवाना हुआ था। इसके बाद यह दक्षिणी ध्रुव के आसपास के इलाकों में गया और फिर अटलांटिक पार करते हुए यूरोप की ओर बढ़ रहा था। इसे सबसे आखिर में स्पेन के कैनरी द्वीप तक पहुंचना था, जो अफ्रीका के पास अटलांटिक में स्थित एक प्रमुख पर्यटन क्षेत्र है।
जहाज में कुल 170 यात्री और 71 क्रू सदस्य मौजूद हैं। इनमें एक डॉक्टर भी शामिल है। पहला मृतक 70 साल का एक व्यक्ति था, जिसकी मौत जहाज पर ही हो गई थी। वह अपनी पत्नी के साथ इस यात्रा पर था। इसके बाद उसका शव दक्षिण अटलांटिक में स्थित सेंट हेलेना में उतारा गया।
उसकी पत्नी बाद में दक्षिण अफ्रीका पहुंचीं, जहां से उन्हें अपने देश नीदरलैंड लौटना था। लेकिन एयरपोर्ट पर ही उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई, वह बेहोश हो गईं और बाद में अस्पताल में उनकी मौत हो गई। क्रूज चलाने वाली कंपनी ओशनवाइड एक्सपेडिशंस ने बताया कि तीसरे मृतक का शव अभी भी जहाज पर केप वर्डे में मौजूद है।
संक्रमण कैसे फैला, इसकी जांच की जा रही
सबसे बड़ा सवाल यह है कि संक्रमण आया कहां से। अर्जेंटीना के जिस इलाके से जहाज रवाना हुआ, वहां हंतावायरस का कोई मामला दर्ज नहीं है। जहाज ऐसे क्षेत्रों में भी नहीं गया जहां यह वायरस आम है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि संक्रमण जहाज के अंदर हो सकता है।
चूहों के संपर्क में आने से फैलता है हंतावायरस
सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल के मुताबिक, हंतावायरस व्यक्ति के चूहे या गिलहरी के संपर्क में इंसान के आने से फैलता है। यह मुख्य रूप से चूहों में होता है। इसके कारण चूहों में कोई बीमारी नहीं होती, लेकिन इंसानों की मौत हो जाती है।
हंतावायरस का 1993 में पहली बार पता चला था। तब अमेरिका में एक कपल संक्रमित होने के कारण मर गया था। इसके बाद कुछ ही महीनों में इस बीमारी से 600 लोगों की मौत हो गई थी।
चूहे के यूरिन, मल और लार के संपर्क में आने पर इंसान संक्रमित हो जाते हैं। इसकी वजह से पल्मोनरी सिंड्रोम नाम की बीमारी होती है।
3 तरीके से फैलता है हंतावायरस
पहला: अगर वायरस का वाहक चूहा किसी इंसान को काट ले, हालांकि ऐसे मामले कम ही सामने आते हैं।
दूसरा : किसी जगह या चीज पर मौजूद चूहे का मल-मूत्र या लार के संपर्क में इंसान आता है और अपने नाक-मुंह को छूता है।
तीसरा : अगर इंसान ऐसी चीज खाता है जिस पर चूहे का मल-मूत्र या लार मौजूद हो।
हंतावायरस कोरोना से भी ज्यादा खतरनाक
वैज्ञानिकों के मुताबिक, हंतावायरस हवा के जरिए नहीं फैलता फिरभी कोरोना वायरस के मुकाबले ज्यादा खतरनाक है। इस बीमारी का कोई खास इलाज नहीं है, सिर्फ लक्षणों के आधार पर इलाज किया जाता है। गंभीर मरीजों को सांस लेने में मदद के लिए वेंटिलेटर की जरूरत पड़ सकती है।
इस बीमारी में करीब 38% मरीजों की मौत हो जाती है। अगर मरीज बुजुर्ग हो या पहले से कमजोर हो, तो खतरा और बढ़ जाता है। वैज्ञानिकों ने अब तक हंतावायरस के 5 स्ट्रेन खोजे हैं, इनमें से सबसे ज्यादा खतरनाक अराराक्वॉरा वायरस है जिसका इन्फेक्शन होने पर डेथ रेट 54% पाया गया है।
वही, एक दूसरा स्ट्रेन सिन नॉम्ब्रे वायरस है जिसके केस में डेथ रेट 40% है। तीसरा स्ट्रेन हंतान वायरस होता है। इसका डेथ रेट 5-10% के बीच है। इन तीनों में से किसी से इन्फेक्शन होने पर मौत का खतरा कोरोना की तुलना में कहीं ज्यादा हो सकता है।
अब तक इसकी वैक्सीन तैयार नहीं हो सकी है और न ही कोई तय इलाज है। ऐसे मरीजों को विशेष केयर की जरूरत होती है और ऑक्सीजन थैरेपी दी जाती है। जितनी जल्दी मामला पकड़ में आता है उतना ही बेहतर है। अगर बीमारी गंभीर हो जाए, तो करीब 7–10 दिनों के अंदर मरीज की मौत हो सकती है।
पिछले साल अमेरिकी अभिनेता की पत्नी की मौत हुई थी
यह बीमारी पिछले साल भी चर्चा में आई थी, जब अमेरिकी अभिनेता जीन हैकमैन की पत्नी बेट्सी अराकावा की इससे मौत हुई थी। दोनों 26 फरवरी को अपने घर सांता फे में मृत पाए गए थे। उनके घर के आसपास चूहों के निशान भी मिले थे।
बाद में पता चला कि 95 साल के हैकमैन की मौत 18 फरवरी को दिल की बीमारी से हुई थी। वहीं अराकावा का शव बाथरूम में मिला। अराकावा अपनी मौत से पहले लगातार इंटरनेट पर फ्लू जैसे लक्षण, सांस लेने के तरीके और कोविड जैसी बीमारियों के बारे में जानकारी खोज रही थीं।
अमेरिका में 1993 से लेकर 2023 तक सिर्फ 890 मामले सामने आए हैं। ज्यादातर केस न्यू मेक्सिको राज्य में मिले हैं, जहां जीन हैकमैन और उनकी पत्नी रहते थे।