दरअसल, रूस हर साल 9 मई को द्वितीय विश्व युद्ध में नाजी जर्मनी पर सोवियत संघ की जीत की याद में विक्ट्री डे परेड आयोजित करता है। इस बार भी रेड स्क्वायर पर हजारों सैनिकों ने मार्च किया, हालांकि पिछले वर्षों की तुलना में परेड में भारी हथियारों और बैलिस्टिक मिसाइलों की मौजूदगी काफी कम रही। कई वर्षों में पहली बार परेड में बड़े पैमाने पर टैंक और मिसाइल सिस्टम नजर नहीं आए।
अपने भाषण में पुतिन ने कहा कि रूस आज ऐसे आक्रामक गठबंधन का सामना कर रहा है, जिसे NATO का पूरा समर्थन हासिल है। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिमी देश लगातार यूक्रेन को हथियार और सैन्य सहायता देकर संघर्ष को बढ़ावा दे रहे हैं। पुतिन ने कहा कि रूस अपने सैनिकों और नागरिकों की ताकत के दम पर हर चुनौती का सामना करेगा।
रूसी राष्ट्रपति ने दूसरे विश्व युद्ध में सोवियत सैनिकों के बलिदान को याद करते हुए कहा कि वही जज्बा आज यूक्रेन में लड़ रहे रूसी सैनिकों को प्रेरित कर रहा है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा और भविष्य के लिए रूस हर मोर्चे पर मजबूती से खड़ा रहेगा।
इस बार की परेड इसलिए भी खास रही क्योंकि रूस और यूक्रेन के बीच तीन दिन के अस्थायी सीजफायर की घोषणा की गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि 9 से 11 मई तक दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम रहेगा और इस दौरान कैदियों की अदला-बदली भी की जाएगी। हालांकि युद्ध को लेकर तनाव अब भी बरकरार है।
विक्ट्री डे समारोह में बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको समेत कई देशों के नेता मौजूद रहे। सैन्य बैंड, तोपों की सलामी और सैनिकों की परेड के जरिए रूस ने दुनिया को साफ संदेश देने की कोशिश की कि यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी दबाव के बावजूद उसकी सैन्य शक्ति और रणनीतिक आक्रामकता कमजोर नहीं हुई है