मध्य प्रदेश से राज्यसभा के तीन सदस्यों का कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो रहा है। इनमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह, जबकि भारतीय जनता पार्टी से केंद्रीय मंत्री George Kurian और डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी शामिल हैं। अब इन सीटों को भरने के लिए दोनों प्रमुख दलों में रणनीति बननी शुरू हो गई है।
कांग्रेस की ओर से इस बार कई बड़े नामों पर चर्चा चल रही है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव, कमलेश्वर पटेल और सज्जन सिंह वर्मा जैसे नेताओं के नाम रेस में बताए जा रहे हैं। हालांकि दिग्विजय सिंह इस बार चुनाव लड़ने से पीछे हट चुके हैं, जिससे समीकरण और भी रोचक हो गए हैं।
वहीं बीजेपी के लिए मौजूदा सांसद जॉर्ज कुरियन को दोबारा राज्यसभा भेजने की संभावना जताई जा रही है। कुरियन पार्टी के वरिष्ठ और विश्वसनीय नेताओं में गिने जाते हैं और केंद्र सरकार में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। उनके अनुभव और संगठनात्मक पकड़ को देखते हुए पार्टी उन्हें फिर से उच्च सदन भेज सकती है।
कांग्रेस के लिए इस बार संख्याबल सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आ रहा है। पार्टी के कुछ विधायकों की स्थिति अनिश्चित है, जिससे वोटिंग पैटर्न प्रभावित हो सकता है। खासकर कुछ निर्दलीय और झूलते विधायकों की भूमिका इस चुनाव में निर्णायक साबित हो सकती है।
दूसरी ओर बीजेपी अपने संगठित वोट बैंक और विधायकों के समर्थन के भरोसे मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है। पार्टी चाहती है कि वह अपने दोनों मौजूदा सीटों पर पकड़ बनाए रखे और एक सीट पर नए चेहरे को मौका दे या पुराने चेहरे को रिपीट करे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव सिर्फ सीटों का नहीं बल्कि मध्य प्रदेश की आगामी राजनीतिक दिशा का भी संकेत देगा। कांग्रेस जहां अपने दिग्गज नेताओं को संसद भेजने की कोशिश में है, वहीं बीजेपी संगठन और अनुभव के संतुलन के साथ आगे बढ़ना चाहती है।
18 जून का यह राज्यसभा चुनाव न केवल प्रदेश बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे कई बड़े नेताओं का भविष्य भी तय होगा।