Chambalkichugli.com

पेट्रोल-डीजल को लेकर हड़कंप: एमपी में बढ़ी खपत, वितरण पर कड़ा नियंत्रण


मध्य प्रदेश । भोपाल समेत पूरे मध्य प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती खपत के बीच अब तेल कंपनियों ने अपने सिस्टम को और सख्त कर दिया है। नई व्यवस्था के तहत अब यदि किसी पेट्रोल पंप से एक बार में ₹5000 से अधिक का पेट्रोल या ₹10,000 से ज्यादा का डीजल दिया जाता है, तो उसकी पूरी जानकारी दर्ज करनी होगी कि ईंधन किसे और किस उद्देश्य से दिया गया है। इस कदम के बाद प्रदेश के पेट्रोल पंपों पर निगरानी और तेज हो गई है।

तेल कंपनियों का कहना है कि प्रदेश में किसी भी तरह की ईंधन की कमी नहीं है, बल्कि कुछ जगहों पर अचानक मांग बढ़ने के कारण पंप अस्थायी रूप से खाली हो रहे हैं। कंपनियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह स्थिति “शॉर्टेज” नहीं मानी जाएगी।

इस पूरे सिस्टम में अब इंडियन ऑयल और भारत पेट्रोलियम जैसी कंपनियां बड़े ट्रांजैक्शन पर खास नजर रख रही हैं। मप्र पेट्रोल पंप एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह के अनुसार इंडियन ऑयल ₹10,000 और बीपीसीएल ₹19,000 से अधिक के डीजल वितरण पर विशेष मॉनिटरिंग कर रही हैं। उनका कहना है कि कई भारी वाहनों और टैंकरों की क्षमता ज्यादा होती है, ऐसे में बड़ी मात्रा में ईंधन भरना सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन अब हर ट्रांजैक्शन पर पूछताछ हो रही है।

कंपनियों ने साफ निर्देश दिए हैं कि रिटेल पंपों से औद्योगिक उपयोग के लिए बल्क सप्लाई नहीं दी जाए। इसके साथ ही हर पंप से होने वाली बिक्री पर अब ऑनलाइन निगरानी रखी जा रही है, जिससे हर लेन-देन का रिकॉर्ड सीधे कंपनियों तक पहुंच रहा है।

वहीं दूसरी ओर पेट्रोल पंप संचालक इस व्यवस्था से नाराज हैं। उनका कहना है कि नियमों का बोझ केवल उन्हीं पर डाला जा रहा है, जबकि कंपनियां एक तरफ सप्लाई पर्याप्त होने का दावा करती हैं और दूसरी तरफ लिमिटेशन लागू कर रही हैं। संचालकों का आरोप है कि कई बार बड़े वाहन एक ही बार में ज्यादा ईंधन भरवाते हैं, जिससे ग्राहकों से विवाद की स्थिति बन जाती है।

पंप संचालकों ने यह भी बताया कि अब क्रेडिट सिस्टम पूरी तरह बंद कर दिया गया है। पहले तेल कंपनियां सप्लाई के लिए क्रेडिट देती थीं, लेकिन अब पहले भुगतान और इंडेंट दर्ज करना अनिवार्य कर दिया गया है। यदि शाम 5 बजे तक भुगतान नहीं होता, तो अगले दिन टैंकर नहीं भेजा जाता। इससे कई जगह सप्लाई प्रभावित हो रही है।

कई पंप संचालकों का यह भी कहना है कि समय पर टैंकर न मिलने की वजह से कुछ पंप अस्थायी रूप से ड्राय हो रहे हैं। हालांकि कंपनियों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि सप्लाई व्यवस्था पूरी तरह सामान्य है और किसी भी प्रकार की कमी नहीं है।

फिलहाल स्थिति यह है कि एक ओर कंपनियां निगरानी और नियंत्रण को जरूरी बता रही हैं, वहीं दूसरी ओर पंप संचालक इसे अतिरिक्त दबाव मान रहे हैं। बढ़ती मांग और सख्त नियमों के बीच सिस्टम की यह खींचतान अब प्रदेश में चर्चा का विषय बन गई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular News