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Kailash Mansarovar Yatra 2026: कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर बड़ा अपडेट, 1,000 श्रद्धालुओं का चयन पूरा

 
 Kailash Mansarovar Yatra 2026: नई दिल्ली विदेश मंत्रालय ने बताया कि कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 का आयोजन जून से अगस्त के बीच किया जाएगा। चयनित यात्रियों को 20 अलग-अलग बैचों में भेजा जाएगा और हर बैच में 50 श्रद्धालु शामिल होंगे। यात्रा दो प्रमुख मार्गों  Lipulekh Pass और Nathu La Pass  से कराई जाएगी। दोनों रास्तों को अब पूरी तरह मोटरेबल बना दिया गया है, जिससे यात्रियों को पहले की तुलना में काफी कम ट्रैकिंग करनी पड़ेगी।

विदेश मंत्रालय के अनुसार चयनित यात्रियों को एसएमएस और ईमेल के जरिए सूचना भेज दी गई है। यात्री आधिकारिक पोर्टल पर लॉगिन करके अपना चयन स्टेटस देख सकते हैं। इसके अलावा हेल्पलाइन नंबर 011-23088214 भी जारी किया गया है, जहां यात्रा से जुड़ी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

गौरतलब है कि भारत और चीन के बीच 2020 में हुए Galwan Valley clash के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा को रोक दिया गया था। लगभग पांच साल तक बंद रहने के बाद 2025 में दोनों देशों के बीच रिश्तों में नरमी आने पर यात्रा दोबारा शुरू की गई थी। पिछले वर्ष सीमित संख्या में श्रद्धालुओं को यात्रा की अनुमति दी गई थी, जिसमें उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे और सिक्किम के नाथू ला मार्ग से यात्राएं कराई गई थीं।

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इस बीच यात्रा मार्ग को लेकर नेपाल ने भी आपत्ति दर्ज कराई है। नेपाल सरकार का कहना है कि भारत और चीन के बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए इस्तेमाल किया जा रहा लिपुलेख क्षेत्र विवादित है और इसका उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि भारत ने इस दावे को खारिज करते हुए अपना रुख साफ कर दिया है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने हाल ही में कहा था कि लिपुलेख दर्रा 1954 से कैलाश मानसरोवर यात्रा का पारंपरिक मार्ग रहा है और दशकों से इसी रास्ते से यात्रा होती आ रही है। उन्होंने कहा कि भारत ऐतिहासिक तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर अपने दावे पर कायम है और एकतरफा तरीके से विवाद बढ़ाना उचित नहीं है।

धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक महत्व के कारण कैलाश मानसरोवर यात्रा को हिंदू, बौद्ध और जैन समुदायों के लिए बेहद पवित्र माना जाता है। हर साल हजारों श्रद्धालु इस कठिन लेकिन दिव्य यात्रा में शामिल होने की इच्छा जताते हैं। 2026 में यात्रा का दायरा बढ़ाकर 1000 यात्रियों तक करना भारत-चीन संबंधों में सुधार और यात्रा सुविधाओं के विस्तार का संकेत माना जा रहा है।

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