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पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हलचल बढ़ी, BJP सांसद का दावा- हरी झंडी मिलते ही TMC में बड़ा टूट संभव

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़े राजनीतिक बदलाव की अटकलों ने सियासी माहौल को गर्म कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी के सांसद सौमित्र खान के एक बयान ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने दावा किया है कि तृणमूल कांग्रेस के लगभग 20 सांसद और 50 विधायक भाजपा के संपर्क में हैं और पार्टी नेतृत्व की अनुमति मिलते ही वे पाला बदल सकते हैं। इस बयान के सामने आने के बाद राज्य की राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं और विपक्षी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है।

लगातार तीसरी बार लोकसभा पहुंचे सौमित्र खान ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि तृणमूल कांग्रेस के कई जनप्रतिनिधि अपनी ही पार्टी की कार्यप्रणाली और नेतृत्व से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर लंबे समय से असंतोष का माहौल बना हुआ है और कई नेता राजनीतिक भविष्य को लेकर नई संभावनाओं की तलाश में हैं। खान ने कहा कि यदि भाजपा नेतृत्व चाहे तो आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा परिवर्तन देखने को मिल सकता है। हालांकि उन्होंने उन नेताओं के नाम सार्वजनिक नहीं किए जो कथित तौर पर भाजपा के संपर्क में बताए जा रहे हैं।

इस दावे के बाद राजनीतिक गलियारों में दल-बदल विरोधी कानून को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल की 42 लोकसभा सीटों में से फिलहाल तृणमूल कांग्रेस के पास 29 सांसद हैं, जबकि भाजपा के पास 12 और कांग्रेस के पास एक सीट है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि किसी दल के दो-तिहाई सांसद एक साथ पार्टी बदलते हैं तो दल-बदल विरोधी कानून के तहत उनकी सदस्यता पर खतरा नहीं रहता। ऐसे में 29 सांसदों वाली पार्टी के लिए यह आंकड़ा लगभग 19 से 20 सांसदों का बनता है, जो सौमित्र खान के दावे के काफी करीब माना जा रहा है।

दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा सांसद के बयान को पूरी तरह निराधार बताया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि भाजपा जानबूझकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है और ऐसा कोई राजनीतिक संकट तृणमूल कांग्रेस में मौजूद नहीं है। पार्टी नेताओं का कहना है कि भाजपा राज्य में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए इस तरह के दावे कर रही है, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। तृणमूल कांग्रेस ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी पूरी तरह एकजुट है और नेतृत्व के खिलाफ किसी तरह की नाराजगी जैसी बातें केवल राजनीतिक प्रचार का हिस्सा हैं।

पश्चिम बंगाल में दलबदल की राजनीति कोई नई बात नहीं है। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले भी तृणमूल कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने भाजपा का दामन थामा था। हालांकि चुनाव के बाद राजनीतिक परिस्थितियां बदलीं और कई नेता फिर से अपनी पुरानी पार्टी में लौट गए। लेकिन इस बार राज्य की राजनीति पहले से अलग नजर आ रही है। बीते कुछ समय में तृणमूल कांग्रेस के कुछ नेताओं द्वारा सार्वजनिक मंचों पर असंतोष जाहिर किए जाने की घटनाओं ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दी है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए पश्चिम बंगाल में सियासी समीकरण तेजी से बदल सकते हैं। भाजपा लगातार राज्य में अपने संगठन को मजबूत करने में जुटी है, जबकि तृणमूल कांग्रेस अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए सक्रिय रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में सौमित्र खान का यह बयान आने वाले समय में बंगाल की राजनीति को और अधिक दिलचस्प बना सकता है।

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