HIGHLIGHTS:
- दो बार रिटायर किया, हाईकोर्ट ने लौटाई नौकरी
- कागजों में बूढ़ा बना दिया, कोर्ट ने दिया इंसाफ
- वन विभाग की मनमानी पर हाईकोर्ट सख्त
- मेडिकल रिपोर्ट ठुकराना पड़ा भारी
- चौकीदार को 2029 तक नौकरी का अधिकार

MP HIGH COURT ACTION: मध्यप्रदेश। ग्वालियर हाई कोर्ट ने वन विभाग के एक फैसले को गलत बताते हुए कार्रवाई उसपर की है। बता दें कि दतिया वन विभाग के चौकीदार साहब सिंह ठाकुर को विभाग ने बूढ़ा बता कर कागजों में दो बार रिटायर कर दिया। पहले 2017 में और फिर 2018 में उन्हें सेवानिवृत्त करने के आदेश जारी किए गए। जिसके बाद मामला ग्वालियर हाईकोर्ट पहुंचा, जहां अदालत ने दोनों आदेशों को निरस्त कर दिया।
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मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट नहीं मानी
सूचना कि मने तो साहब सिंह की उम्र का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं था। ऐसे में वर्ष 2017 में जिला मेडिकल बोर्ड से उनका आयु परीक्षण कराया गया। मेडिकल बोर्ड ने उनकी उम्र 50 वर्ष निर्धारित की, जिसके अनुसार उनकी सेवानिवृत्ति वर्ष 2029 में होनी चाहिए थी। लेकिन इसके बावजूद भी विभाग ने उनकी उम्र ज्यादा मानकर रिटायरमेंट का आदेश जारी कर दिया।
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हाईकोर्ट ने लगाई फटकार
पूरे मामले को लेकर हाईकोर्ट ने कहा कि जब विभाग ने खुद मेडिकल बोर्ड से जांच कराई थी तो उसकी रिपोर्ट को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने विभाग के दोनों आदेश रद्द करते हुए साहब सिंह को अप्रैल 2029 तक नौकरी पर बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।
साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि कर्मचारी को सभी लंबित वेतन, एरियर और अन्य सेवा लाभ दिए जाएं। इस फैसले को विभागीय मनमानी पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी माना जा रहा है।