आईईटी के निदेशक डॉ. प्रतोष बंसल के अनुसार मामले को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है। जांच समिति की अनुशंसा के आधार पर दोषी छात्रों का रिजल्ट फिलहाल रोक दिया गया है। जब तक छात्र निर्धारित जुर्माना राशि जमा नहीं करेंगे, तब तक उन्हें परीक्षा परिणाम उपलब्ध नहीं कराया जाएगा। अब तक केवल एक छात्र ने 25 हजार रुपए की पेनाल्टी जमा की है, जबकि बाकी छात्रों को भी यह राशि जमा करनी होगी।
मामले में शामिल 17 छात्रों की पहचान की जा चुकी है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी छात्रों के अभिभावकों को बुलाया है ताकि उन्हें पूरी घटना से अवगत कराया जा सके। अब तक पांच छात्रों के माता-पिता प्रशासन से मुलाकात कर चुके हैं। अधिकारियों का कहना है कि अभिभावकों को छात्रों के व्यवहार और विश्वविद्यालय की कार्रवाई दोनों के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रही है।
हंगामे के कारण फाइनल ईयर के कुछ छात्रों की परीक्षाएं भी प्रभावित हुई थीं। घटना के बाद उन्हें परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी गई थी। अब विश्वविद्यालय जून के मध्य, यानी 15 जून के आसपास इन छात्रों की शेष परीक्षाएं आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। परीक्षा कार्यक्रम को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
दरअसल, कुछ दिन पहले रामानुजन छात्रावास में रहने वाले फाइनल ईयर के छात्रों ने देर रात जमकर उत्पात मचाया था। छात्रों ने हॉस्टल परिसर में अर्धनग्न होकर डांस किया और कई जगह तोड़फोड़ की। इस दौरान हॉस्टल की टेबल-कुर्सियां, पानी की टंकियां और खिड़कियों के कांच तक तोड़ दिए गए। घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए थे, जिसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की काफी आलोचना हुई और तत्काल जांच के आदेश दिए गए।
जांच के दौरान वायरल वीडियो के आधार पर 17 छात्रों को चिन्हित किया गया। इसके बाद अनुशासन समिति ने आर्थिक दंड, रिजल्ट रोकने और परीक्षा से वंचित करने जैसी सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की। प्रशासन ने इन्हीं सिफारिशों के आधार पर कदम उठाए हैं।
हालांकि घटना के वीडियो वायरल होने के बाद हॉस्टल के कुछ छात्रों ने सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी थी और अपने व्यवहार पर खेद जताया था। इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि संस्थान की गरिमा और अनुशासन बनाए रखने के लिए कड़ी कार्रवाई जरूरी है।
विश्वविद्यालय के इस फैसले को अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रशासन का संदेश साफ है कि शिक्षा संस्थानों में अनुशासनहीनता और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाओं को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।