पूरा विवाद वर्ष 2024 में जेल परिसर में हुई एक घटना से शुरू हुआ बताया जा रहा है, जब एक व्यक्ति बिना अनुमति मुलाकात कक्ष की ओर जाने लगा था। महिला प्रहरी द्वारा नियमों के अनुसार रोके जाने के बाद विवाद उत्पन्न हुआ, जिसके बाद से लगातार तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है।
महिला प्रहरी का आरोप है कि इसके बाद से उसे लगातार परेशान किया जा रहा है और धमकियां भी दी जा रही हैं। शिकायत में कहा गया है कि आरोपी द्वारा उसे कहा जाता है कि “तुम्हारी वर्दी उतरवा दूंगा।” साथ ही यह भी आरोप है कि उसके खिलाफ दबाव बनाने और समझौते के लिए मानसिक प्रताड़ना दी जा रही है।
जेल प्रशासन के अनुसार, महिला कर्मचारी 2018 से पदस्थ है और पहले स्थिति सामान्य थी, लेकिन 2024 के बाद से विवाद बढ़ा है। प्रशासन का कहना है कि मामले की जानकारी पुलिस और उच्च अधिकारियों सहित मानवाधिकार आयोग (NHRC) तक पहुंचाई गई है। इस संबंध में 17 जनवरी 2026 को एफआईआर भी दर्ज की गई, हालांकि पुलिस ने आरोपी को जमानत दे दी थी।
सब जेलर का कहना है कि महिला प्रहरी अकेले सरकारी आवास में रहती है और लगातार तनाव व दबाव से गुजर रही है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी ठीक से नहीं कर पा रही है।
वहीं, आरोपित पक्ष का कहना है कि उन पर लगाए गए सभी आरोप गलत हैं और वे स्वयं जेल में कथित अनियमितताओं की शिकायत कर चुके हैं। उनका दावा है कि उनके खिलाफ झूठी एफआईआर दर्ज कराई गई है और यदि किसी प्रकार के आरोप हैं तो उसके सबूत पेश किए जाएं।
जेल प्रशासन ने एक अन्य घटना का भी उल्लेख किया है, जिसमें एक बंदी द्वारा खुद को चोट पहुंचाने की घटना सामने आई थी। प्रशासन के अनुसार, जांच में यह स्पष्ट हुआ कि बंदी ने स्वयं को घायल किया था और बाद में इस मामले को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया।
फिलहाल, मामला पुलिस जांच और विभागीय स्तर पर समीक्षा में है। महिला प्रहरी ने सुरक्षा और मानसिक तनाव के चलते नौकरी छोड़ने तक का संकेत दिया है।