इस संवेदनशील मामले का खुलासा तब हुआ जब 30 अक्टूबर 2023 को इंदौर की एक सामाजिक संस्था की प्रतिनिधि पीड़िता के घर पहुंचीं। संस्था के पास आरोपी की करतूतों का एक वीडियो साक्ष्य के रूप में मौजूद था, जिसे उन्होंने बच्ची की मां को दिखाया। वीडियो देखकर स्तब्ध रह गई मां ने जब अपनी बेटी को विश्वास में लेकर पूछताछ की, तब मासूम ने अपने साथ हुई भयावह दास्तां बयां की। पीड़िता ने बताया कि पड़ोस में रहने वाला बुजुर्ग प्रभाकर बापट उसके स्कूल आते-जाते समय लगातार पीछा करता था। वह उसे रास्ते में रोककर जबरन बात करने की कोशिश करता और बस स्टॉप तक उसके पीछे चला आता था। इस दौरान आरोपी कई बार बच्ची के बेहद करीब आने का प्रयास करता था, जिससे वह बुरी तरह असहज और भयभीत हो जाती थी।
मासूम ने अपनी मां को यह भी बताया कि आरोपी ने एक दिन उसे बहलाने-फुसलाने के लिए 10 रुपये देने की कोशिश भी की थी। आरोपी की हिम्मत इतनी बढ़ गई थी कि अक्टूबर 2023 में उसने बच्ची के घर के बाहर आकर भी अत्यंत आपत्तिजनक और अश्लील इशारे किए। इसके बाद भी उसकी हरकतें थमी नहीं और 27 अक्टूबर को उसने बस स्टॉप के पास बालिका के साथ फिर से अनुचित व्यवहार किया, जिसका बच्ची ने डटकर विरोध किया। लोकलाज और डर के कारण बच्ची ने शुरुआत में यह बात अपने परिवार से छिपाई थी, लेकिन सामाजिक संस्था की सतर्कता से सच सामने आ गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़िता की मां ने तत्काल थाना परदेशीपुरा में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (भादंवि) की धारा 354, 354-घ, 341, पॉक्सो अधिनियम की विभिन्न गंभीर धाराओं और अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया। जांच के दौरान पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया और घटनास्थल से जुड़े प्रत्यक्ष व परिस्थितिजन्य साक्ष्य जुटाए गए।
प्रभारी डिप्टी डायरेक्टर अभियोजन राजेंद्र सिंह भदौरिया के मार्गदर्शन में विशेष लोक अभियोजक वर्षा पाठक ने शासन की ओर से कोर्ट में दमदार पैरवी की। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष 9 महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज कराए और पुख्ता दस्तावेजी व डिजिटल साक्ष्य पेश किए। कोर्ट ने दोनों पक्षों की अंतिम दलीलें सुनने के बाद माना कि अभियोजन द्वारा प्रस्तुत किए गए साक्ष्य आरोपी को दोषी ठहराने के लिए पूरी तरह पर्याप्त और विश्वसनीय हैं। अदालत ने आरोपी की ढलती उम्र को दरकिनार करते हुए अपराध की गंभीरता के मद्देनजर उसे पॉक्सो एक्ट और एससी-एसटी एक्ट की धाराओं के तहत अधिकतम 5 साल की सश्रम कैद की सजा सुनाकर समाज में एक कड़ा संदेश दिया है।