Balaghat Naxalite Surrender : बालाघाट। मध्य प्रदेश के नक्सल प्रभावित क्षेत्र बालाघाट में सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। पहली बार किसी महिला नक्सली ने आत्मसमर्पण किया है। 22 वर्षीय सुनीता आयाम ने हॉक फोर्स कैंप पहुंचकर सरेंडर किया। सुनीता पर एमपी, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में कुल 14 लाख रुपए का इनाम था। पुलिस ने इसे राज्य की बेस्ट सरेंडर पॉलिसी का बड़ा नतीजा बताया है।
सुनीता ने 1 नवंबर की सुबह लांजी थाना क्षेत्र के चौरिया कैंप में आत्मसमर्पण किया। उसके पास से इंसास रायफल, तीन मैगजीन और अन्य सामग्री बरामद हुई है। सुनीता हथियार चलाने में माहिर थी और कई नक्सली गतिविधियों में शामिल रही।
परिवार से मिला नक्सल का रास्ता
सुनीता छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के वीरमन इंड्रावती क्षेत्र की रहने वाली है। उसके पिता भी नक्सली थे। सुनीता ने 2022 में संगठन जॉइन किया। तीन साल में सीनियर कैडर बन गई। उसे मलाजखंड-दर्रेकसा एरिया कमेटी मेंबर बनाया गया था ।
शोषण और बदनामी से टूट गई सुनीता
पूछताछ में सुनीता ने खुलासा किया कि कमांडर रामदेर ने उसके चरित्र पर सवाल उठाकर बदनाम किया। संगठन में महिलाओं के सम्मान की जगह न होने से वह मानसिक रूप से टूट गई। इसके बाद आत्मसमर्पण का फैसला किया।
तड़के जंगल से निकली
1 नवंबर की सुबह चार बजे सुनीता नक्सली वर्दी, हथियार और सामग्री लेकर जंगल से निकली। हथियार गड्ढे में छिपाए और चौरिया कैंप पहुंचकर आत्मसमर्पण की इच्छा जताई। सूचना पर एसपी आदित्य मिश्रा और अन्य अफसर पहुंचे।
18 सितंबर की हत्या का खुलासा
पूछताछ में सुनीता ने बताया कि 18 सितंबर को चौरिया जंगल में देवेंद्र नाम के युवक की हत्या मुखबिरी के शक में की गई थी। इस वारदात में कई नक्सली शामिल थे। पुलिस को कई ठिकानों और नेटवर्क की जानकारी मिली है।
33 साल में पहली महिला नक्सली सरेंडर
आईजी संजय कुमार ने कहा कि सुनीता का आत्मसमर्पण राज्य में लागू बेस्ट ऑफ बेस्ट सरेंडर पॉलिसी का परिणाम है। 1992 के बाद यह पहली महिला नक्सली है जिसने हथियार डाले हैं। सुनीता को पुनर्वास योजना के तहत 2.5 लाख रुपए, ट्रेनिंग और नौकरी का मौका दिया जाएगा।
बालाघाट में नक्सलवाद का अंत करीब
बालाघाट पिछले 40 साल से नक्सल प्रभावित क्षेत्र रहा है, लेकिन अब नक्सली गतिविधियां सीमित हो चुकी हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पुलिस को बधाई दी।