MP SIR : MP SIR प्रक्रिया शुरू हो गई है। राज्य में मंगलवार से 65 हजार बूथ लेवल ऑफिसर घर-घर जाकर मतदाताओं का वेरिफिकेशन कर रहे हैं। इसी प्रक्रिया से तय होगा कि मतदाताओं का नाम नई वोटर लिस्ट में शामिल रहेगा या नहीं। अधिकारियों के अनुसार, प्रत्येक मतदाता को एक विशेष फॉर्म दिया जा रहा है, जिसे भरकर तय समय सीमा में वापस करना होगा।
कैसा होगा BLO फॉर्म
SIR अभियान के लिए प्रत्येक मतदाता का अलग फॉर्म जारी किया गया है। यह फॉर्म दो हिस्सों में विभाजित होगा। एक हिस्सा पहले से भरा हुआ रहेगा जिसमें मतदाता का नाम, पहचान संबंधी विवरण और फोटो शामिल होंगे। दूसरा हिस्सा खाली रहेगा जिसे मतदाता को स्वयं भरना होगा।
इस प्रक्रिया में BLO घर पर फॉर्म देंगे और निर्धारित समय के बाद दोबारा पहुंचकर भरी हुई जानकारी और सभी आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन करेंगे। इसके बाद विवरण को अंतिम सूची में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू होगी।
2003 की सूची होगी आधार
SIR प्रक्रिया में वर्ष 2003 की मतदाता सूची को प्राथमिक आधार माना जा रहा है। सत्यापन की कार्यप्रणाली इस प्रकार होगी। यदि किसी व्यक्ति का नाम 2003 की सूची में पहले से दर्ज है, तो वह सीधे 2025 की मतदाता सूची में शामिल माना जाएगा। साथ ही अगर व्यक्ति का नाम 2003 की सूची में मौजूद नहीं है, लेकिन उसके माता पिता या किसी संबंधी का नाम सूची में दर्ज मिलता है, तो उस कनेक्शन के आधार पर पात्रता का सत्यापन किया जाएगा ।
विवाहित महिलाओं के लिए नियम
SIR प्रक्रिया में विवाहित महिलाओं के लिए खास दिशा–निर्देश तय किए गए हैं। ऐसी महिलाएं जिनका विवाह 1 जनवरी 2003 के बाद हुआ है, उन्हें मतदान सूची में नाम दर्ज कराने के लिए मायके से अपना मतदाता क्रमांक और मतदान केंद्र क्रमांक की जानकारी जुटाकर BLO द्वारा दिए गए फॉर्म में भरनी होगी। सीईओ एमपी इलेक्शन ने स्पष्ट किया है कि सर्वे के दौरान BLO किसी मतदाता से दस्तावेज़ नहीं लेगा केवल जानकारी दर्ज की जाएगी।
सत्यापन में किन दस्तावेज़ों से मिलेगी मान्यता
यदि फॉर्म में दी गई जानकारी से सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को संदेह रहेगा और नोटिस जारी होगा, तो मतदाता को अपनी पात्रता साबित करने के लिए निर्धारित 11 दस्तावेज़ों में से कोई एक प्रस्तुत करना होगा। दस्तावेज़ देने के बाद जांच पूरी होने पर नाम सूची में दर्ज कर दिया जाएगा।
आपत्ति होने पर मिलेगा पूरा अवसर
अगर दस्तावेज़ देने के बाद भी ARO नाम जोड़ने से इंकार करता है, तो मतदाता जिला कलेक्टर के समक्ष अपील कर सकते हैं। कलेक्टर के निर्णय से असंतुष्टि होने पर मामला सीईओ निर्वाचन आयोग तक ले जाया जा सकता है। यानी प्रत्येक पात्र नागरिक को मतदाता सूची में नाम जोड़ने का पूरा अवसर दिया जाएगा।