World Day Against Child Labour 2026: भोपाल। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों से बाल श्रम मुक्त समाज बनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों के माथे पर बोझ अच्छा नहीं लगता, उनके हाथों में कलम और किताब ही शोभा देती है।
उन्होंने कहा कि खुशहाल बचपन और शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है और राज्य सरकार बच्चों के हितों एवं उनकी शिक्षा के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
बाल श्रम के खिलाफ जागरूकता की जरूरत
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संदेश में कहा कि बाल श्रम केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि बच्चों के बचपन और उनके भविष्य से जुड़ा गंभीर सामाजिक मुद्दा है।
उन्होंने समाज के सभी वर्गों से अपील की कि बच्चों को शिक्षा से जोड़ने और बाल श्रम को जड़ से खत्म करने के लिए मिलकर प्रयास करें।
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भारत में अब भी बड़ी चुनौती
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार भारत में 5 से 14 साल के करीब 1.01 करोड़ बच्चे काम करते थे। हालांकि पिछले कुछ सालों में बाल श्रम के मामलों में कमी आई है, लेकिन यह समस्या अब भी चिंता का विषय बनी हुई है।
वहीं, अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की 2026 रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में अब भी 13.8 करोड़ बच्चे बाल श्रम में लगे हुए हैं, जिनमें से लगभग 5.4 करोड़ बच्चे खतरनाक परिस्थितियों में काम कर रहे हैं।
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बच्चों का बचपन बचाने का संकल्प
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हर बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा और सम्मानपूर्ण जीवन का अधिकार है। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस हमें यह संकल्प लेने का अवसर देता है कि कोई भी बच्चा मजदूरी के लिए मजबूर न हो और उसे अपने सपनों को पूरा करने का पूरा अवसर मिले।
बच्चों के माथे पर बोझ अच्छा नहीं लगता है। खुशहाल बचपन और शिक्षा उनका अधिकार है।
‘विश्व बालश्रम निषेध दिवस’ पर संकल्प लें कि बच्चों के हाथों में कलम-किताब ही देंगे और बाल श्रम से मुक्त समाज बनाएंगे।
हमारी सरकार बच्चों के हितों और शिक्षा के लिए निरंतर कार्य कर रही है। pic.twitter.com/yL1jb88I7E
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) June 12, 2026