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भिंडी-मटन की ‘रिश्वत’ देकर गवाया गया था मन्ना डे का यह अमर गीत, आज भी सुनते ही झूम उठते हैं संगीत प्रेमी


नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के महान पार्श्वगायकों में शुमार Manna Dey ने अपने लंबे और शानदार करियर में सैकड़ों यादगार गीत गाए। शास्त्रीय संगीत की मजबूत पकड़ और मधुर आवाज के कारण उन्हें हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के सबसे सम्मानित गायकों में गिना जाता है। उनके जीवन से जुड़े कई किस्से आज भी संगीत प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बने रहते हैं। ऐसा ही एक दिलचस्प किस्सा फिल्म देख कबीरा रोया के मशहूर गीत “कौन आया मेरे मन के द्वारे” से जुड़ा हुआ है।

साल 1957 में रिलीज हुई Dekh Kabira Roya का निर्देशन अमेय चक्रवर्ती ने किया था, जबकि फिल्म का संगीत दिग्गज संगीतकार Madan Mohan ने तैयार किया था। फिल्म का गीत “कौन आया मेरे मन के द्वारे” उस दौर के सबसे लोकप्रिय गीतों में गिना जाता है। यह गीत अभिनेता Anup Kumar पर फिल्माया गया था और आज भी रेडियो, संगीत कार्यक्रमों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर खूब सुना जाता है।

कहा जाता है कि इस गीत की धुन तैयार करते समय मदन मोहन के मन में केवल एक ही नाम था और वह था मन्ना डे। दरअसल, यह गीत शास्त्रीय संगीत के रंग में रंगा हुआ था। संगीत जगत में माना जाता था कि शास्त्रीय रागों पर आधारित गीतों को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत करने में मन्ना डे का कोई मुकाबला नहीं था। यही वजह थी कि मदन मोहन किसी अन्य गायक के बजाय मन्ना डे की आवाज में ही इस गीत को रिकॉर्ड करना चाहते थे।

हालांकि, मन्ना डे को मनाने के लिए मदन मोहन ने एक अनोखा तरीका अपनाया। चर्चित किस्सों के अनुसार, उन्होंने मन्ना डे से पूछा कि वे क्या कर रहे हैं। जब मन्ना डे ने बताया कि उनके पास फिलहाल कोई विशेष काम नहीं है, तब मदन मोहन ने उन्हें अपने घर आने का निमंत्रण दिया और कहा कि वे उन्हें उनकी पसंद का भिंडी-मटन खिलाएंगे।

मदन मोहन अपने बेहतरीन खानपान और मेहमाननवाजी के लिए भी जाने जाते थे। ऐसे में स्वादिष्ट भोजन का न्योता सुनकर मन्ना डे उनके घर पहुंच गए। वहां उनका शानदार स्वागत हुआ और उन्हें भिंडी-मटन परोसा गया। भोजन के बाद मदन मोहन ने बड़ी सहजता से उन्हें गीत की धुन सुनाई और कहा कि वे चाहते हैं कि यह गीत मन्ना डे ही गाएं।

बताया जाता है कि धुन सुनते ही मन्ना डे प्रभावित हो गए और उन्होंने तुरंत गीत गाने के लिए हामी भर दी। इसके बाद रिकॉर्ड हुआ “कौन आया मेरे मन के द्वारे” हिंदी फिल्म संगीत का एक कालजयी गीत बन गया। इसकी मधुरता, शास्त्रीयता और मन्ना डे की अद्भुत गायकी ने इसे अमर बना दिया। दशकों बाद भी यह गीत संगीत प्रेमियों की पसंदीदा सूची में शामिल है।

मन्ना डे की प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें अपने करियर में अनेक प्रतिष्ठित सम्मान मिले। उन्हें वर्ष 1971 में पद्म श्री, 2005 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार और 2012 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें तीन बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी प्राप्त हुआ। उनकी आवाज और संगीत साधना आज भी नई पीढ़ी के गायकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।

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