निर्यात क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों के अनुसार अमेरिका अब भी मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य बना हुआ है, लेकिन उसकी हिस्सेदारी में कमी दर्ज की गई है। एक वर्ष पहले प्रदेश के कुल निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी 20.4 प्रतिशत थी, जो अब घटकर 19.4 प्रतिशत रह गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी आयात शुल्क और व्यापारिक नीतियों में बदलाव के कारण कई भारतीय निर्यातकों को चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
हालांकि प्रदेश के उद्योगों और निर्यातकों ने परिस्थितियों के अनुसार अपनी रणनीति बदली। उन्होंने चीन, जर्मनी, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में नए अवसर तलाशे और वहां बढ़ती मांग का लाभ उठाया। इन बाजारों में निर्यात बढ़ने से अमेरिका में आई गिरावट की भरपाई हो गई और कुल निर्यात वृद्धि का रास्ता खुला।
Federation of Indian Export Organisations (फीयो) की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के निर्यात में इंदौर संभाग की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही। कुल निर्यात में 50.5 प्रतिशत हिस्सेदारी अकेले इंदौर संभाग की रही। वित्तीय वर्ष 2025-26 में इंदौर से 34,654 करोड़ रुपए का निर्यात हुआ, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 32,580 करोड़ रुपए था। इस प्रकार इंदौर ने लगभग 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की।
प्रदेश में निर्यात के मामले में भोपाल दूसरे स्थान पर रहा, जहां से 13,807 करोड़ रुपए का निर्यात हुआ। वहीं उज्जैन संभाग 9,204 करोड़ रुपए के निर्यात के साथ तीसरे स्थान पर रहा। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि प्रदेश के विभिन्न औद्योगिक केंद्र वैश्विक बाजारों में अपनी उपस्थिति लगातार मजबूत कर रहे हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर भी मध्य प्रदेश ने अपनी स्थिति बनाए रखी है। देश के कुल वस्तु निर्यात में प्रदेश की हिस्सेदारी 1.8 प्रतिशत रही और राज्य लगातार दूसरे वर्ष भी देश के प्रमुख निर्यातक राज्यों की सूची में 13वें स्थान पर बना रहा।
फीयो के अतिरिक्त महानिदेशक सुविध शाह के अनुसार, वैश्विक व्यापारिक चुनौतियों और अमेरिकी टैरिफ के बावजूद मध्य प्रदेश का निर्यात बढ़ना सकारात्मक संकेत है। उन्होंने कहा कि फार्मास्यूटिकल्स, मशीनरी और कृषि आधारित उत्पादों की मांग में वृद्धि तथा नए बाजारों में प्रवेश से प्रदेश को बड़ा लाभ मिला है।
उद्योगवार आंकड़ों पर नजर डालें तो फार्मा सेक्टर प्रदेश का सबसे बड़ा निर्यात क्षेत्र बनकर उभरा है। कुल निर्यात में इसकी हिस्सेदारी 19.2 प्रतिशत रही। दवाइयों और स्वास्थ्य संबंधी उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय मांग बढ़ने का सीधा फायदा प्रदेश के फार्मा उद्योग को मिला। इसके बाद कॉटन यार्न और गारमेंट क्षेत्र का योगदान 10 प्रतिशत रहा, जबकि मशीनरी उत्पाद 6 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
इसके अलावा ऑयल मील, बासमती चावल, सामान्य चावल और एल्युमिनियम उत्पादों की भी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अच्छी मांग देखने को मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नए बाजारों में विस्तार की यह रणनीति जारी रहती है, तो आने वाले वर्षों में मध्य प्रदेश का निर्यात और तेजी से बढ़ सकता है।