Contempt Proceedings Against CBI: गुना जिले के देवा पारदी की पुलिस कस्टडी में हुई मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना याचिका को निरस्त कर दिया है। देवा की मां ने यह याचिका इसलिए दायर की थी क्योंकि अदालत के 15 मई 2025 के आदेशों का पालन समय पर नहीं किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि CBI और राज्य सरकार को आदेशों के पालन में हुई देरी के लिए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अतिरिक्त आरोप पत्र दायर करना होगा।
क्या था पूरा मामला
15 जुलाई 2024 को बीलाखेड़ी निवासी देवा पारदी (25) की बारात गुना शहर के गोकुल सिंह चक्क पर जाने वाली थी। इसके एक दिन पहले शाम को पुलिस ने चोरी के एक मामले में बरामदगी के लिए देवा और उसके चाचा गंगाराम को हिरासत में लिया था।
उसी रात परिवार को जिला अस्पताल से सूचना मिली कि देवा को पोस्टमॉर्टम रूम में लाया गया है। बाद में पता चला कि उसकी मौत पुलिस कस्टडी में हुई है।
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परिजनों और समुदाय का विरोध
म्याना थाने में देवा और उसके चाचा के साथ मारपीट का आरोप लगाते हुए पारदी समुदाय की महिलाओं ने अस्पताल में विरोध प्रदर्शन किया था। देवा की चाची और उसकी होने वाली दुल्हन ने खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगाने की कोशिश भी की, जिसे पुलिस ने रोक लिया।
घटना के बाद 7–8 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मारपीट और गैर इरादतन हत्या की धाराओं में FIR दर्ज की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप
देवा की मां ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिसके बाद 15 मई को अदालत ने एक महीने में आरोपी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी के निर्देश दिए थे।
हालांकि, गिरफ्तारी न होने पर कोर्ट ने सितंबर की सुनवाइयों में राज्य और CBI को फटकार लगाई और कहा कि अगला कदम अवमानना आरोप तय करना होगा।
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आरोपियों की गिरफ्तारी
अदालत की सख्त टिप्पणी के अगले ही दिन फरार SI उत्तम सिंह CBI कोर्ट में सरेंडर करने पहुंचे, जहां CBI ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद TI संजीत मावई को 5 अक्टूबर को शिवपुरी जिले के बदरवास क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया।
CBI ने 8 अक्टूबर की सुनवाई में कोर्ट को गिरफ्तारी की जानकारी दी, लेकिन कोर्ट ने देरी पर नाराजगी जताते हुए पूछा कि आदेश के बावजूद कार्रवाई समय पर क्यों नहीं हुई।
अवमानना याचिका निरस्त
12 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान CBI और राज्य सरकार ने हलफनामों के माध्यम से देरी का स्पष्टीकरण पेश किया। कोर्ट ने यह माना कि गिरफ्तारी केवल अदालत की कठोर टिप्पणियों के बाद हुई, न कि आदेश के तत्काल पालन में।
इसके बावजूद कोर्ट ने स्पष्टीकरण को स्वीकार करते हुए अवमानना याचिका को निरस्त कर दिया।
विभागीय कार्रवाई और आगे की प्रक्रिया
राज्य सरकार ने दोनों गिरफ्तार अधिकारियों ( संजीत सिंह मावई (तत्कालीन TI, म्याना) और उत्तम सिंह (तत्कालीन ASI/चौकी प्रभारी उमरी) के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि 15 मई के आदेश के गैर-पालन के संबंध में अतिरिक्त आरोप पत्र दायर किया जाएगा और मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
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