प्रदेश में स्वैच्छिक तबादलों के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस को अनिवार्य शर्त बनाया है। इस फैसले का प्रदेश के करीब सवा चार लाख शिक्षकों द्वारा विरोध किया जा रहा था। विशेष रूप से महिला शिक्षकों का कहना था कि संतान पालन अवकाश के दौरान उनकी अनुपस्थिति को ई-अटेंडेंस में गैरहाजिरी माना जा रहा है, जिससे वे तबादला प्रक्रिया में पात्रता खो सकती हैं।
इसी स्थिति को देखते हुए लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर स्पष्ट किया है कि स्वीकृत संतान पालन अवकाश की अवधि को कार्य दिवसों में उपस्थिति के रूप में जोड़ा जाएगा। इससे महिला शिक्षकों की ई-अटेंडेंस प्रतिशतता प्रभावित नहीं होगी और वे तबादले के लिए निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा कर सकेंगी।
लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह द्वारा जारी आदेश के अनुसार, जिन महिला शिक्षकों को संतान पालन अवकाश स्वीकृत है, वे अपने प्रकरण से संबंधित आवेदन राज्य स्तरीय अभ्यावेदन निराकरण समिति को भेज सकती हैं। विभाग ने इसके लिए विशेष ई-मेल व्यवस्था भी उपलब्ध कराई है। समिति प्रत्येक मामले की जांच करेगी और पात्र पाए जाने पर अवकाश अवधि को ई-अटेंडेंस में उपस्थिति के रूप में दर्ज करने की कार्रवाई की जाएगी।
स्कूल शिक्षा विभाग ने जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने जिलों में ऐसे सभी मामलों का संकलन कर उन्हें शीघ्र राज्य स्तरीय समिति को भेजें। इस आदेश की प्रतियां मंत्रालय, कलेक्टरों, संभागीय संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को भी भेज दी गई हैं, ताकि निर्णय का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।
शिक्षा विभाग का यह कदम ऐसे समय आया है जब ई-अटेंडेंस की शर्त को लेकर शिक्षकों में असंतोष बढ़ रहा था। कई शिक्षक संगठनों ने इसे अव्यावहारिक बताते हुए सरकार से नियमों में संशोधन की मांग की थी। महिला शिक्षकों को मिली यह राहत विभाग की ओर से संतुलित समाधान की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से न केवल महिला शिक्षकों की समस्याओं का समाधान होगा, बल्कि तबादला प्रक्रिया को अधिक संवेदनशील और न्यायसंगत बनाने में भी मदद मिलेगी। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि राज्य स्तरीय समिति इन मामलों का निराकरण कितनी तेजी से करती है और अन्य वर्गों के शिक्षकों की मांगों पर विभाग क्या रुख अपनाता है।