कार्यक्रम के दौरान योग, ध्यान और प्राणायाम की विभिन्न विधियों का अभ्यास किया गया, जिसमें आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों ने सक्रिय भागीदारी की। इस आयोजन में यह संदेश प्रमुखता से सामने आया कि योग केवल एक व्यायाम नहीं, बल्कि जीवनशैली का हिस्सा है जो संपूर्ण स्वास्थ्य और दीर्घायु को बढ़ावा देता है।
नीति आयोग ने अपने संदेश में कहा कि यह थीम इस बात को स्वीकार करती है कि योग आज के समय में वेलनेस और हेल्दी लाइफस्टाइल का एक महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। बढ़ती उम्र के साथ शरीर और मन दोनों को स्वस्थ बनाए रखने में योग की भूमिका अत्यंत प्रभावी मानी जा रही है।
कार्यक्रम में आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने भी ध्यान और योगाभ्यास में भाग लिया। उनके साथ आयोग के अन्य सदस्य जैसे राजीव गौबा, प्रो. के.वी. राजू, डॉ. एम. श्रीनिवास और डॉ. जोरम अनिया भी उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर योग के महत्व को रेखांकित किया और इसे दैनिक जीवन में अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
इस अवसर पर यह भी बताया गया कि योग न केवल शरीर की ताकत और लचीलापन बढ़ाता है, बल्कि मानसिक तनाव को भी कम करता है और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाता है। विशेष रूप से वृद्धावस्था में योग को अपनाने से व्यक्ति अधिक सक्रिय, संतुलित और स्वस्थ जीवन जी सकता है।
इसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलकाता में आयोजित राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम का नेतृत्व किया। उन्होंने देशभर के लोगों की उत्साहपूर्ण भागीदारी की सराहना की और योग को जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि योग स्वस्थ मन, स्वस्थ शरीर और दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए एक प्रभावी माध्यम है।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि नियमित योग अभ्यास से व्यक्ति उम्र बढ़ने के बावजूद अपनी शारीरिक और मानसिक क्षमता को बनाए रख सकता है। उन्होंने इसे आधुनिक जीवनशैली में संतुलन लाने का एक महत्वपूर्ण साधन बताया।
कुल मिलाकर इस वर्ष का योग दिवस कार्यक्रम न केवल एक औपचारिक आयोजन रहा, बल्कि यह एक व्यापक संदेश भी लेकर आया कि योग को अपनाकर समाज को अधिक स्वस्थ, सक्रिय और संतुलित बनाया जा सकता है।