परिषद के अध्यक्ष प्रोफेसर रणवीर नंदन ने बताया कि बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद के अधीन करीब 4,500 मंदिर और मठ आते हैं। अब तक इन सभी संस्थानों का वर्ष में एक बार ऑडिट कराया जाता था, लेकिन नई व्यवस्था के तहत त्रैमासिक स्तर पर भी खातों की समीक्षा की जाएगी, ताकि दान राशि के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
अब हर तिमाही होगी वित्तीय निगरानी
प्रो. रणवीर नंदन के अनुसार, वार्षिक ऑडिट में मंदिरों और मठों को प्राप्त दान, उसके उपयोग और खर्च का विस्तृत रिकॉर्ड जांचा जाता है। परिषद यह सुनिश्चित करती है कि दान की राशि का उपयोग केवल मंदिरों और मठों के रखरखाव, विकास और आवश्यक कार्यों पर ही किया जाए।
उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था के तहत हर तीन महीने में खातों का विवरण लेने से किसी भी संभावित वित्तीय अनियमितता की समय रहते पहचान की जा सकेगी और निगरानी व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक प्रभावी होगी।
प्रत्येक मंदिर की अपनी न्यास समिति
परिषद अध्यक्ष ने बताया कि परिषद के अधीन आने वाले प्रत्येक मंदिर और मठ की अपनी अलग न्यास समिति होती है। यही समिति स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार विकास कार्यों और खर्च से जुड़े निर्णय लेती है। बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद की भूमिका निर्माण और अन्य कार्यों के लिए आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी करने तथा प्रशासनिक निगरानी बनाए रखने की होती है।
पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में पहल
परिषद का मानना है कि नियमित वित्तीय समीक्षा से दान राशि के उपयोग में पारदर्शिता बढ़ेगी और श्रद्धालुओं का भरोसा भी मजबूत होगा। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम मंदिरों और मठों की वित्तीय व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और व्यवस्थित बनाने की दिशा में उठाया गया है।
अयोध्या मामले के बाद बढ़ी सतर्कता
अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में गबन का मामला इन दिनों जांच के दायरे में है। शिकायत के आधार पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) मामले की जांच कर रहा है। इस प्रकरण में अब तक आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि संबंधित ट्रस्ट के पिछले पांच वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।