परिजनों के अनुसार परिवार एक जुलाई को इंदौर से 22 सदस्यों के साथ नैनीताल घूमने गया था। सभी लोग मल्लीताल क्षेत्र के एक होटल में ठहरे हुए थे। रविवार सुबह गौरांश कमरे में खेल रहा था। इसी दौरान कुछ क्षण के लिए परिजनों का ध्यान उससे हट गया और वह होटल की तीसरी मंजिल की खिड़की से नीचे गिर पड़ा। करीब 20 फीट की ऊंचाई से गिरने के कारण उसके सिर और गर्दन में गंभीर चोटें आईं।
हादसे के तुरंत बाद होटल में अफरा-तफरी मच गई। परिजनों और होटल कर्मचारियों ने बिना देर किए बच्चे को बीडी पांडे जिला चिकित्सालय पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे हल्द्वानी के हायर सेंटर रेफर कर दिया। जांच में पता चला कि उसके सिर की हड्डियां टूट गई थीं और गर्दन में भी गंभीर चोट लगी थी।
बच्चे की हालत लगातार नाजुक बनी रहने पर डॉक्टरों ने उसे बेहतर उपचार के लिए दिल्ली भेजने का निर्णय लिया। परिजनों ने बताया कि दिल्ली ले जाते समय रास्ते में गौरांश की धड़कन भी बंद हो गई थी। चिकित्सकों ने उसे दोबारा जीवित करने का प्रयास किया और फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन गंभीर सिर की चोटों के कारण डॉक्टर उसे बचा नहीं सके।
गौरांश परिवार का इकलौता बेटा था। उसकी मौत की खबर सामने आते ही झाबुआ जिले के राणापुर कस्बे में शोक की लहर फैल गई। रिश्तेदारों और परिचितों ने परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। दिल्ली में आवश्यक कानूनी और चिकित्सकीय प्रक्रिया पूरी करने के बाद परिजन रविवार शाम एंबुलेंस से गौरांश के पार्थिव शरीर को लेकर राणापुर के लिए रवाना हो गए।