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इंदौर में साइबर ठगों का कहर, पेंशन कार्ड और सस्ती बाइक के झांसे में तीन लोगों से 4.57 लाख की ठगी


इंदौर  इंदौर में साइबर अपराधियों का जाल लगातार फैलता जा रहा है। शहर में सामने आए तीन अलग-अलग मामलों में ठगों ने पेंशन कार्ड बनवाने, मोबाइल हैक करने और सस्ती बाइक दिलाने का झांसा देकर तीन लोगों से कुल 4.57 लाख रुपए से अधिक की ठगी कर ली। सभी मामलों में लसूडिया थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस लोगों से किसी भी अनजान कॉल, लिंक या सोशल मीडिया विज्ञापन पर भरोसा नहीं करने की अपील कर रही है।

पहले मामले में लसूडिया थाना क्षेत्र की सेटेलाइट टाउनशिप निवासी 75 वर्षीय अखिलेश गायकवाड़ को ठगों ने निशाना बनाया। 15 जून की शाम एक व्यक्ति ने खुद को बैंक ऑफ इंडिया का अधिकारी बताते हुए उन्हें फोन किया और पेंशनधारकों के लिए नया पेंशन कार्ड जारी होने की जानकारी दी। चूंकि अखिलेश पहले इस कार्ड के लिए आवेदन कर चुके थे इसलिए उन्होंने कॉल करने वाले पर विश्वास कर लिया। आरोपी ने बैंक खाते, एटीएम कार्ड और अन्य व्यक्तिगत जानकारी लेने के साथ ऑनलाइन फोटो भी प्राप्त कर लिया। इसके कुछ ही देर बाद उनका मोबाइल ठग के नियंत्रण में चला गया और खाते से तीन अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए करीब 1.39 लाख रुपए निकाल लिए गए। घटना का पता चलते ही उन्होंने साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई।

दूसरे मामले में स्लाइस-सी सेक्टर निवासी गोपाल वाकड़े साइबर ठगी का शिकार बने। 17 जून को उनका मोबाइल अचानक बंद हो गया। मोबाइल दोबारा चालू होने पर उन्हें खाते से 44 हजार रुपए निकलने का संदेश मिला। बैंक पहुंचने पर पता चला कि 98 हजार रुपए का एक और ट्रांजेक्शन भी हो चुका है। इस तरह उनके खाते से कुल करीब 1.42 लाख रुपए निकाल लिए गए। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

तीसरा मामला एक छात्रा से जुड़ा है जिसे इंस्टाग्राम पर सस्ती बाइक खरीदने का विज्ञापन भारी पड़ गया। राजाबाग कॉलोनी में किराये से रहने वाली और मूल रूप से गंधवानी की निवासी पूजा झमेले ने 25 हजार रुपए में दोपहिया वाहन मिलने का विज्ञापन देखा। संपर्क करने पर आरोपी ने पहले दो हजार रुपए बुकिंग राशि के रूप में जमा कराए और बाद में ट्रांसपोर्ट चार्ज समेत अलग-अलग बहानों से कई किश्तों में पैसे मांगता रहा। गाड़ी की फोटो भेजकर भरोसा भी दिलाया गया। आखिरकार छात्रा से करीब 1.76 लाख रुपए ट्रांसफर करा लिए गए। जब लंबे समय तक वाहन नहीं मिला तब उसे ठगी का एहसास हुआ और उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस तीनों मामलों में बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रांजेक्शन की जांच कर रही है। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल पर बैंक संबंधी जानकारी साझा न करें, सोशल मीडिया पर दिखने वाले आकर्षक ऑफरों की सत्यता जांचे बिना भुगतान न करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी थाने में शिकायत करें।

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