डैनी ने पूरे टूर्नामेंट में सात मैचों में 60.40 की शानदार औसत से 302 रन बनाए। इस दौरान उनके बल्ले से 42 चौके और दो छक्के निकले। लगातार बेहतरीन प्रदर्शन की बदौलत उन्होंने इंग्लैंड को फाइनल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
उनकी सबसे यादगार पारी श्रीलंका के खिलाफ आई, जब उन्होंने नाबाद 105 रन बनाकर टीम को बड़ी जीत दिलाई। इसके बाद उन्होंने आयरलैंड के खिलाफ 16 रन, स्कॉटलैंड के विरुद्ध 7 रन, वेस्टइंडीज के खिलाफ 65 रन और न्यूजीलैंड के खिलाफ नाबाद 89 रन की शानदार पारी खेली। सेमीफाइनल में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उन्होंने 12 रन का योगदान दिया और फाइनल में 8 रन जोड़कर इतिहास रच दिया।
लॉर्ड्स में खेले गए खिताबी मुकाबले में इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए चार विकेट पर 150 रन बनाए। टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही और एमी जोन्स जल्दी आउट हो गईं। इसके बाद कप्तान नेट साइवर-ब्रंट और डैनी वायट-हॉज ने दूसरे विकेट के लिए 25 रन जोड़े। एलिस कैप्सी ने 23 रन बनाए, जबकि कप्तान नेट साइवर-ब्रंट 58 रन और फ्रेया कैंप 44 रन बनाकर नाबाद रहीं। दोनों ने पांचवें विकेट के लिए 80 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी कर टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया।
हालांकि, ऑस्ट्रेलिया ने बेथ मूनी और फोएबे लिचफील्ड की शानदार बल्लेबाजी के दम पर लक्ष्य आसानी से हासिल कर सात विकेट से जीत दर्ज की और रिकॉर्ड सातवीं बार विमेंस टी20 वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम कर लिया। इंग्लैंड ट्रॉफी नहीं जीत सका, लेकिन डैनी वायट-हॉज का ऐतिहासिक रिकॉर्ड इस टूर्नामेंट की सबसे बड़ी व्यक्तिगत उपलब्धियों में दर्ज हो गया।