ऑटो स्टार्ट-स्टॉप सिस्टम का मुख्य उद्देश्य उस समय होने वाली ईंधन की खपत को रोकना है, जब वाहन पूरी तरह स्थिर होता है और इंजन केवल चालू रहने के कारण पेट्रोल या डीजल खर्च कर रहा होता है। सामान्य परिस्थितियों में यदि कोई वाहन ट्रैफिक सिग्नल या जाम में कई मिनट तक खड़ा रहता है तो इंजन लगातार ईंधन की खपत करता रहता है। यह फीचर ऐसी स्थिति में इंजन को अस्थायी रूप से बंद कर अनावश्यक ईंधन खर्च को कम करता है।
ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य शहरी परिस्थितियों में इस तकनीक के उपयोग से वाहन की कुल ईंधन दक्षता में लगभग 5 से 10 प्रतिशत तक सुधार देखा जा सकता है। वहीं जिन शहरों में भारी ट्रैफिक और लंबे समय तक रेड लाइट पर रुकना आम बात है, वहां यह बचत लगभग 12 से 15 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। इसका सीधा लाभ उन लोगों को अधिक मिलता है जो प्रतिदिन भीड़भाड़ वाले मार्गों पर नियमित रूप से वाहन चलाते हैं।
यदि मासिक खर्च के आधार पर इसका अनुमान लगाया जाए तो इसका प्रभाव और स्पष्ट हो जाता है। उदाहरण के तौर पर यदि कोई व्यक्ति महीने में लगभग 1000 किलोमीटर कार चलाता है और वाहन का औसत माइलेज 15 किलोमीटर प्रति लीटर है, तो उसे लगभग 66 लीटर पेट्रोल की आवश्यकता होगी। यदि पेट्रोल की कीमत लगभग 102 रुपये प्रति लीटर मानी जाए तो मासिक ईंधन खर्च करीब 6,700 रुपये से अधिक बैठता है। ऐसी स्थिति में यदि ऑटो स्टार्ट-स्टॉप सिस्टम केवल 8 प्रतिशत तक भी ईंधन बचाने में सफल रहता है तो लगभग 5 लीटर से अधिक पेट्रोल की बचत हो सकती है, जिससे हर महीने लगभग 500 से 550 रुपये तक का खर्च कम किया जा सकता है।
हालांकि यह बचत सभी परिस्थितियों में समान नहीं होती। इसका वास्तविक लाभ वाहन के उपयोग, ट्रैफिक की स्थिति, ड्राइविंग शैली और रुकने के समय पर निर्भर करता है। जिन क्षेत्रों में लगातार हाईवे ड्राइविंग होती है और वाहन कम रुकता है, वहां इस फीचर का प्रभाव अपेक्षाकृत कम देखने को मिलता है। इसके विपरीत महानगरों और घनी आबादी वाले शहरों में जहां बार-बार रुकना पड़ता है, वहां यह तकनीक अधिक उपयोगी साबित होती है।
वाहन निर्माता इस सिस्टम को इस तरह विकसित करते हैं कि बार-बार इंजन बंद और चालू होने से इंजन या स्टार्टर मोटर पर अनावश्यक दबाव न पड़े। इसके लिए विशेष प्रकार की बैटरी, मजबूत स्टार्टर और उन्नत इंजन प्रबंधन प्रणाली का उपयोग किया जाता है। इसलिए सामान्य परिस्थितियों में इस फीचर का नियमित उपयोग वाहन की कार्यक्षमता पर नकारात्मक प्रभाव नहीं डालता।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती ईंधन कीमतों और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता को देखते हुए ऑटो स्टार्ट-स्टॉप जैसी तकनीकें भविष्य की जरूरत बनती जा रही हैं। यदि चालक इस सुविधा का सही तरीके से उपयोग करे और अनावश्यक रूप से इसे बंद न रखे, तो समय के साथ ईंधन खर्च में अच्छी बचत होने के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन में भी कमी लाई जा सकती है। यह फीचर छोटी-छोटी बचत के माध्यम से लंबे समय में वाहन मालिकों को आर्थिक लाभ पहुंचाने वाली उपयोगी तकनीकों में शामिल माना जा रहा है।