सरकार का उद्देश्य ग्रामीणों को उनकी आबादी भूमि का वैधानिक स्वामित्व दिलाना है ताकि भविष्य में वे अपनी संपत्ति का कानूनी उपयोग कर सकें। इसके साथ ही राज्य सरकार ने स्टाम्प शुल्क पंजीयन शुल्क और पंचायत उपकर पूरी तरह माफ करने का फैसला भी लागू कर दिया है। इन सभी रियायतों का वित्तीय भार सरकार स्वयं उठाएगी। अनुमान है कि इस योजना पर सरकार को लगभग 3800 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ वहन करना पड़ेगा।
पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने इस संबंध में आवश्यक अधिसूचनाएं जारी कर दी हैं। नई व्यवस्था के अनुसार अब केवल उप पंजीयक कार्यालय ही नहीं बल्कि तहसीलदार प्रभारी तहसीलदार और नायब तहसीलदार भी स्वामित्व योजना के अंतर्गत आने वाली भूमि की रजिस्ट्री कर सकेंगे। इससे प्रदेश में मौजूद सीमित संख्या वाले उप पंजीयक कार्यालयों पर दबाव कम होगा और ग्रामीणों को अपने क्षेत्र में ही रजिस्ट्री की सुविधा मिल जाएगी।
सरकार का मानना है कि जब ग्रामीणों के नाम पर भूमि का विधिवत पंजीयन हो जाएगा तो उन्हें बैंक और अन्य वित्तीय संस्थानों से आसानी से ऋण मिल सकेगा। इसका उपयोग वे मकान निर्माण छोटे व्यवसाय कृषि कार्य और अन्य आर्थिक गतिविधियों में कर सकेंगे। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ लोगों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आने की उम्मीद है।
योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आयुक्त भू संसाधन प्रबंधन की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जाएगी। इस समिति में महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक आयुक्त कोष एवं लेखा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारी और एमपीएसईडीसी के प्रबंध संचालक सहित अन्य विशेषज्ञ शामिल होंगे। समिति समय समय पर योजना की समीक्षा करेगी दिशा निर्देश जारी करेगी और प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए आवश्यक निर्णय लेगी।
सरकार ने योजना के प्रचार प्रसार जनजागरूकता और आवश्यक मुद्रण कार्यों के लिए 10 करोड़ रुपये भी स्वीकृत किए हैं। राजस्व विभाग को योजना से जुड़े परिपत्र जारी करने और आवश्यक स्पष्टीकरण देने का अधिकार दिया गया है ताकि पूरे प्रदेश में प्रक्रिया एक समान और पारदर्शी तरीके से लागू हो सके।
इस फैसले को ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति के अधिकार मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि मुफ्त रजिस्ट्री और स्थानीय स्तर पर पंजीयन की सुविधा मिलने से लाखों परिवारों को कानूनी सुरक्षा मिलेगी और ग्रामीण विकास को नई गति मिलेगी।
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