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E20 पेट्रोल विवाद को लेकर संजय राउत का दावा, बोले- गडकरी की छवि को खुद BJP पहुंचा रही नुकसान


नई दिल्‍ली । शिवसेना यूबीटी संजय राउत (Sanjay Raut) ने शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी (Union Minister Nitin Gadkari) को लेकर एक बड़ा दावा कर दिया है। संजय राउत के मुताबिक केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की छवि को खुद भारतीय जनता पार्टी (BJP) नुकसान पहुंचाना चाहती है क्योंकि गडकरी देश के अगले प्रधानमंत्री बनने के लिए एक मजबूत दावेदार हैं। संजय राउत ने कहा है कि नितिन गडकरी को बदनाम करने के पीछे कोई बाहरी ताकत नहीं, बल्कि खुद बीजेपी के ही कुछ बड़े नेता शामिल हैं।

संजय राउत ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि गडकरी को लेकर जनता के बीच जो भी भ्रम फैलाया जा रहा है, उसके पीछे उनकी अपनी ही पार्टी के लोग हैं। राउत ने कहा, “गडकरी साहब को लेकर जो भ्रम फैला है, उसमें उनके ही पार्टी के लोगों का हाथ है। नितिन गडकरी को बदनाम करने में और कोई नहीं बल्कि भारतीय जनता पार्टी के ही लोग हैं…वे उन्हें किसी न किसी तरह से एक जाल में फंसाना चाहते हैं।”

2014 से पहले का दिया हवाला
राउत ने अतीत का जिक्र करते हुए कहा, “2014 से पहले भी जब गडकरी को पार्टी अध्यक्ष के रूप में दूसरे कार्यकाल देने की चर्चा चल रही थी, तब भी उन्हें इसी तरह फंसाने की कोशिशें हुईं।” उन्होंने दावा किया कि नितिन गडकरी की लोकप्रियता अच्छी है और वे पीएम पद के अगले दावेदार हो सकते थे इसलिए भाजपा खुद ही साजिश रच रही। राउत ने कहा, “वे पीएम पद के एक मजबूत दावेदार हैं, इसलिए उन्हें इतना बदनाम कर दो कि जनता के बीच उनकी छवि खराब हो जाए। ये उनकी ही पार्टी के लोग कह रहे हैं। उनको भी सब पता है।”

नितिन गडकरी क्यों चर्चा में?
गौरतलब है कि नितिन गडकरी केंद्रीय मंत्री इन दिनों E20 पेट्रोल (20% एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल) को लेकर विवादों में हैं। दरअसल भारत सरकार ने देश में 20 फीसदी एथेनॉल मिले हुए पेट्रोल को अनिवार्य कर दिया है। सरकार के इस कदम का खूब विरोध हो रहा है। हालांकि नितिन गडकरी ने सार्वजनिक रूप से चुनौती दी है कि E20 फ्यूल से गाड़ियों में कोई खराबी नहीं आती है। इस चुनौती के बाद बहस और तेज हो गई है। वाहन मालिकों का आरोप है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से गाड़ियों के माइलेज में गिरावट आ रही है, पुरानी गाड़ियों के इंजन को नुकसान पहुंच रहा है और लोगों को जबरन इसे अपनाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। आरोप हैं कि नितिन गडकरी के इसमें निजी हित भी हैं।

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