HIGHLIGHTS:
- 30,000 से अधिक आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी आंदोलन में शामिल
- 17–18 फरवरी: काली पट्टी बांधकर कार्य
- 23–24 फरवरी: दो दिवसीय सामूहिक हड़ताल
- नियमितीकरण या संविदा में विलय की मुख्य मांग
- वेतन सीधे खातों में देने और एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट करने की मांग

OUTSOURCE EMPLOYEES PROTEST: ग्वालियर। मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े 30 हजार से अधिक आउटसोर्स कर्मचारी इन दिनों काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज करा रहे हैं। बता दें कि मध्य प्रदेश संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य संघ के प्रदेशव्यापी आह्वान पर ग्वालियर सहित पूरे राज्य में यह प्रदर्शन किया जा रहा है। कर्मचारियों ने 17 और 18 फरवरी को भी काली पट्टी बांधकर काम करने का ऐलान किया है, जबकि 23 और 24 फरवरी को सामूहिक हड़ताल पर जाने की घोषणा भी की गयी है।
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किन संस्थानों पर पड़ेगा असर
यह आंदोलन शासकीय मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों, सिविल अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, शहरी स्वास्थ्य केंद्रों, संजीवनी क्लिनिक और पोषण पुनर्वास केंद्रों में कार्यरत कर्मचारियों द्वारा किया जा रहा है। ऐसे में दो दिन की प्रस्तावित हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यापक असर पड़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
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क्या हैं प्रमुख मांगें?
संघ के प्रदेश अध्यक्ष कोमल सिंह के अनुसार, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत वर्षों से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों को बिना शर्त विभाग में तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों पर समायोजित कर नियमित किया जाए।साथ ही वैकल्पिक रूप से उन्हें संविदा में मर्ज करने की मांग भी रखी गई है।
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कर्मचारियों का कहना है कि उत्तर प्रदेश और हरियाणा की तर्ज पर ठोस नीति बनाकर स्थायी समाधान निकाला जाए। साथ ही निजी आउटसोर्स एजेंसियों की वेतन अनियमितताओं पर रोक लगाने और सीधे खातों में वेतन भुगतान की व्यवस्था लागू करने की मांग भी की गई है।